Jay Bhuwaneshwari Jay Narayani
देवी स्तवन जय भुवनेश्वरि जय नारायणि संतति की रक्षा करती हो अज्ञान, अहं को हरती हो, सुख वैभव हमको देती हो जैसे प्रभात की सूर्य किरण, वैसी श्री अंगों की शोभा मुसकान अधर पर छाई है, रत्नाभूषण की अमित प्रभा आये जो शरण दीन पीड़ित उसकी रक्षा माँ ही करती हे सनातनी हे कात्यायिनि, सेवक […]
Jab Haar Kisi Ke Hath Nahi
समदृष्टि जय हार किसी के हाथ नहीं जब विजय प्राप्त हो अपने को, ले श्रेय स्वयं यह ठीक नहीं हम तो केवल कठपुतली हैं, सब कुछ ही तो प्रभु के वश में है जीत उन्हीं के हाथों में और हार भी उनके हाथों में जब मिलें पराजय अपयश हो, पुरुषार्थ हमारा जाय कहाँ हो हार […]
Jasoda Kaha Kahon Hon Baat
लाला की करतूत जसोदा! कहा कहों हौं बात तुम्हरे सुत के करतब मोसे, कहत कहे नहिं जात भाजन फोरि, ढोलि सब गोरस, ले माखन-दधि खात जो बरजौं तो आँखि दिखावै, रंचु-नाहिं सकुचात और अटपटी कहलौं बरनौ, छुवत पान सौं गात दास ‘चतुर्भुज’ गिरिधर-गुन हौं, कहति कहति सकुचात
Jasoda Tero Bhagya Kahyo Na Jay
यशोदा का भाग्य जसोदा तेरो भाग्य कह्यो ना जाय जो मूरति ब्रह्मादिक दुर्लभ, सो ही प्रगटी आय शिव, नारद, सनकादिक, महामुनि मिलवे करत उपाय जे नंदलाल धूरि धूसर वपु, रहत कंठ लपटाय रतन जटित पौढ़ाय पालने, वदन देखि मुसकाय बलिहारी मैं जाऊँ लाल पे, ‘परमानंद’ जस गाय
Ja Ko Manvranda Vipin Haryo
वंदनावन-महिमा जाको मन वृन्दा विपिन हर्यो निरिख निकुंज पुंज-छवि राधे, कृष्ण नाम उर धर्यो स्यामा स्याम स्वरूप सरोवर, परी जगत् बिसर्यो कोटि कोटि रति काम लजावै, गोपियन चित्त हर्यो ‘श्रीभट’ राधे रसिकराय तिन्ह, सर्वस दै निबर्यो
Jagahu Brajraj Lal Mor Mukut Ware
प्रभाती जागहु ब्रजराज लाल मोर मुकुट वारे पक्षी गण करहि शोर, अरुण वरुण भानु भोर नवल कमल फूल, रहे भौंरा गुंजारे भक्तन के सुने बैन, जागे करुणा अयन पूजि के मन कामधेनु, पृथ्वी पगु धारे करके फिर स्नान ध्यान, पूजन पूरण विधान बिप्रन को दियो दान, नंद के दुलारे करके भोजन गुपाल गैयन सँग भये […]
Jane Kya Jadu Bhara Hua Shri Krishna Aapki Gita Main
गीताजी की महिमा जाने क्या जादू भरा हुआ, श्रीकृष्ण आपकी गीता में जब शोक मोह से घिर जाते, गीता संदेश स्मरण करते, उद्धार हमारा ही इसमें, भगवान आपकी गीता में निगमागम का सब सार भरा, संकट से यह उबार लेती नित अमृत का हम पान करें, हे श्री कृष्ण आपकी गीता में है कर्म, भक्ति […]
Jinake Prafulla Rajiv Nayan
श्रीराम चरित जिनके प्रफुल्ल राजीव नयन, मर्यादा के जो श्रेष्ठ धाम शोभा सागर श्रीरामचन्द्र, सीतापति को शत-शत प्रणाम बाहु प्रलम्ब प्रभु शक्तिमान, कोमल कर धारे धनुष बान मैं नतमस्तक प्रभु कृपा करो, पादाम्बुज भक्ति करो दान राज्याभिषेक होने वाला, इस समाचार से जो न सुखी वनवास हुआ है सुन करके, उनका मन तनिक न हुआ […]
Ja Rahe Pran Dhan Mathura Ko
मथुरा प्रवास जा रहे प्राणधन मथुरा को राधा रानी हो रही व्यथित, सूझे कुछ भी नहीं उनको अंग अंग हो रहे शिथिल, और नीर भरा नयनों में आर्त देख राधा को प्रियतम, स्वयं दुःखी है मन में प्रिया और प्यारे दोनों की, व्याकुल स्थिति ऐसी दिव्य प्रेम रस की यह महिमा, उपमा कहीं न वैसी […]
Jin Ke Sarvas Jugal Kishor
युगल श्री राधाकृष्ण जिनके सर्वस जुगलकिशोर तिहिं समान अस को बड़भागी, गनि सब के सिरमौर नित्य विहार निरंतर जाको, करत पान निसि भोर ‘श्री हरिप्रिया’ निहारत छिन-छिन, चितय नयन की कोर