Ladili Surang Palne Jhule
झूला लाड़िली सुरंग पालने झूले कीरति रानी सुलावै, गावै, हर्षित अति मन फूले भाँति भाँति के लिये खिलौना, प्रमुदित गोद खिलावे देखि देखि मुसकाति सलोनी द्वैदंतुलि दरसावे शोभा की सागर श्री राधा, उमा रमा रति वारी तिहि छन की शोभा कछु-न्यारी, विधि निज हाथ सँवारी यशोदा का सुखलाल को पलना मात पौढ़ाये स्नान करा झँगुला […]
Lal Bhaye Nand Lal
होली लाल भये नँदलाल, साँवरो रंग गयो है लाल मुकुट, कटि लाल हैं, लाल गले वनमाल अलकें लाल सुलाल होठ के, दर्शन करें निहाल ढंग यह आज नयो है गोप गोपियाँ सभी लाल हैं, और बज रही ताल ढोल मृदंग झाँझ सब बाजे, नभ में लाल गुलाल अनोखो फाग छयो है गगन लाल अरु घटा […]
Lal Gulal Gupal Hamari
होली लाल गुलाल गुपाल हमारी, आँखिन में जिन डारोजू वदन चंद्रमा नैन चकोरी, इन अन्तर जिन पारोजू गाओ राग बसंत परस्पर, अटपट खेल निवारोजू कुंकुम रंग सों भरि पिचकारी, तकि नैनन जिन मारोजू बाँकी चितवन नेह हृदय भरि, प्रेम की दृष्टि निहारोजू नागरि-नागर भवसागर ते, ‘कृष्णदास’ को तारोजू
Vandaniya Tulsi Maharani
तुलसी अर्चना वंदनीय तुलसी महारानी, अद्भुत महिमा शास्त्र बखानी नित्य धाम गोलोक से आई, कल्पवृक्ष सम महिमा गाई श्याम वर्ण शोभा सुखदाई, पृथ्वी मूल्यवान निधि पाई श्री हरि सेवा पूजन हेतु, तुलसीजी का बाग लगाये प्रेत पिशाच भूत भग जाये, यज्ञ, दान, व्रत का फल पाये प्रभु पूजा नैवेद्य आदि में, तुलसी दल अनिवार्य धराये […]
Van Main Raas Chata Chitarai
रास लीला वन में रास छटा छितराई चम्पा बकुल मालती मुकुलित, मनमोहक वनराई कानन में सजधज के गोपियन,रूप धर्यो सुखदाई शरद पूर्णिमा यमुना-तट पे, ऋतु बसंत है छाई आकर्षक उर माल सुवेषित अभिनव कृष्ण पधारे दो-दो गोपी मध्य श्याम ने, रूप अनेकों धारे राजत मण्डल मध्य कन्हैया, संग राधिका प्यारी वेणु बजी ताल और लय […]
Van Main Ruchir Vihar Kiyo
वन विहार वन में रुचिर विहार कियो शारदीय पूनम वृन्दावन, अद्भुत रूप लियो धरी अधर पे मुरली मोहन स्वर लहरी गुंजाई ब्रज बालाएँ झटपट दौड़ी, सुधबुध भी बिसराई छलिया कृष्ण कहे सखियों को, अनुचित निशि में आना लोक लाज मर्यादा हेतु, योग्य पुनः घर जाना अनुनय विनय करें यों बोली, ‘तुम सर्वस्व हमारे’ ‘पति-पुत्र घर […]
Var De Veena Vadini Var De
सरस्वती स्तुति वर दे वीणावादिनि! वर दे! प्रिय स्वतंत्र रव अमृत मंत्र, नव भारत में भर दे काट अंध उर के बंधन-स्तर, बहा जननि, ज्योर्तिमय निर्झर कलुष-भेद-तम हर, प्रकाश भर, जगमग जग कर दे नव गति, नव लय, ताल-छंद, नव, नवल कंठ, नव जलद मंद्र रव नव नभ के नव विहग वृन्द को नव पर, […]
Banar Jabaro Re
लंका दहन (राजस्थानी) बानर जबरो रे, लंका नगरी में मच गयो हाँको रे मात सीताजी आज्ञा दीनी, फल खा तूँ पाको रे कूद पड्यो इतने में तो हनुमत मार फदाको रे रूख उठाय पटक धरती पर, भोग लगाय फलाँ को रे राक्षसियाँ अरडावे सारी, काल आ गयो म्हाको रे उजड़ गई अशोक वाटिका, बिगड़ग्यो सारो […]
Vipatti Ko Samjhen Ham Vardaan
विपदा का लाभ विपत्ति को समझें हम वरदान सुख में याद न आये प्रभु की, करें नहीं हम गान कुन्ती ने माँगा था प्रभु से, विपदायें ही आयें कष्ट दूर करने प्रभु आये, दर्शन तब हो जायें हुआ वियोग श्याम से जिनका, गोपियन अश्रु बहाये स्मरण करे प्रतिपल वे उनको, दिवस रात कट जाये अनुकुल […]
Vipada Mangu Main Giridhari
विपदा की चाह विपदा माँगू मैं गिरिधारी कुन्ती देवी कहे आपने, कई आपदा टारी शत-शत करूँ प्रणाम अकिंचन, हूँ अबोध मैं नारी लाक्षा-गृह अग्नि, हिडिम्ब से रक्षा की असुरारी दुर्वासा भोजन को आये तब भी विपद् निवारी तृप्त किया उनको विश्वम्भर, बची द्रोपदी प्यारी दुष्ट दुशासन ने खीचीं थी, पुत्र-वधू की सारी लियो वस्त्र अवतार, […]