Namo Namo Tulsi Maharani
तुलसी की महिमा नमो नमो तुलसी महारानी, नमो नमो हरि की पटरानी जाको दरस परस अघ नासे, महिमा वेद पुराण बखानी साखा पत्र मंजरी कोमल, श्री पति चरण-कमल लपटानी धन्य आप ऐसो व्रत कीन्हो, सालिगराम के शीश चढ़ानी छप्पन भोग धरे हरि आगे, तुलसी बिन प्रभु एक न मानी प्रेम प्रीत कर हरि वश कीन्हे, […]
Nand Nandan Aage Nachungi
गाढ़ी प्रीति नँद-नंदन आगे नाचूँगी नाच नाच पिय तुमहिं रिझाऊँ, प्रेमीजन को जाँचूँगी प्रेम प्रीत का बाँध घूँघरा, मोहन के ढिंग छाजूगीं लोक-लाज कुल की मरजादा, या मैं एक न राखूँगी पिय के पलँगाँ जा पौढूँगी, ‘मीराँ’ हरि रँग राँचूँगी
Dekhat Shyam Hase
सुदामा से भेंट देखत श्याम हँसे, सुदामा कूँ देखत श्याम हँसे फाटी तो फुलड़ियाँ पाँव उभाणे, चलताँ चरण घसे बालपणे का मीत सुदामा, अब क्यूँ दूर बसे कहा भावज ने भेंट पठाई, ताँदुल तीन पसे कित गई प्रभु मेरी टूटी टपरिया, माणिक महल लसे कित गई प्रभु मेरी गउअन बछियाँ, द्वार पे सब ही हँसे […]
Daras Mhane Bega Dijyo Ji
विरह व्यथा दरस म्हाने बेगा दीज्यो जी, खबर म्हारी बेगी लीज्यो जी आप बिना मोहे कल न पड़त है, म्हारा में गुण एक नहीं है जी तड़पत हूँ दिन रात प्रभुजी, सगला दोष भुला दिज्यो जी भगत-बछल थारों बिरद कहावे, श्याम मोपे किरपा करज्यो जी मीराँ के प्रभु गिरिधर नागर, आज म्हारी लाज राखिज्यो जी
Daras Bina Dukhan Lage Nain
विरह व्यथा दरस बिन दूखँण लागै नैन जब से तुम बिछुड़े मेरे प्रभुजी, कबहुँ न पायो चैन सबद सुनत मेरी छतियाँ काँपें, कड़वे लागै बैन विरह कथा कासूँ कहुँ सजनी, बह गई करवत ऐन कल न परत, हरि को मग जोवत, भई छमासी रैन ‘मीरा’ के प्रभु कबरे मिलोगे, दुख मेटण सुख दैन
Thane Kai Kai Samjhawan
विरह व्यथा थाने काँईं काँईं समझाँवा, म्हारा साँवरा गिरधारी पुरब जनम की प्रीत हमारी, अब नहीं जाय बिसारी रोम रोम में अँखियाँ अटकी, नख सिख की बलिहारी सुंदर बदन निरखियो जब ते, पलक न लागे म्हाँरी अब तो बेग पधारो मोहन, लग्यो उमावो भारी ‘मीराँ’ के प्रभु गिरिधर नागर, सुधि लो तुरत ही म्हारी
Tori Savari Surat Nandlala Ji
साँवरी सूरत तोरी साँवरी सुरत नन्दलालाजी जमुना के तीरे धेनु चरावत, काली कामली वालाजी मोर-मुकुट पीताम्बर शोभे, कुण्डल झलकत लालाजी ‘मीराँ’ के प्रभु गिरिधर नागर, भक्तन के प्रति पालाजी
Tera Koi Nahi Rokanhar
मग्न मीरा तेरा कोइ नहिं रोकनहार, मगन होय मीराँ चली लाज सरम कुल की मरजादा, सिर से दूर करी मानापमान दोऊ घर पटके, निकसी हूँ ज्ञान गली ऊँची अटरिया लाल किवड़िया, निरगुण सेज बिछी पचरंगी झालर सुभ सोहे, फूलन फूल कली बाजूबंद कठूला सोहे, माँग सिंदुर भरी पूजन थाल हाथ में लीन्हा, सोभा अधिक भली […]
Tumhare Kaaran Sab Sukh Chodya
विरह व्यथा तुम्हरे कारण सब सुख छोड्यो, अब मोहि क्यूँ तरसावो बिरह व्यथा लागी उर अंदर, सो तुम आय बुझावो अब छोड्याँ नहिं बनै प्रभूजी, हँस कर तुरत बुलाओ ‘मीराँ’ दासी जनम जनम की, अंग सूँ अंग लगाओ