Bala Main Beragan Hungi

वैराग्य बाला, मैं वैरागण हूँगी जिन भेषाँ म्हारो साहिब रीझे, सो ही भेष धरूँगी सील संतोष धरूँ घट भीतर, समता पकड़ रहूँगी जाको नाम निरंजन कहिए, ताको ध्यान धरूँगी गुरु के ज्ञान रगूँ तन कपड़ा, मन-मुद्रा पैरूँगी प्रेम-प्रीत सूँ हरि-गुण गाऊँ, चरणन लिपट रहूँगी या तन की मैं करूँ कींगरी, रसना नाम रटूँगी ‘मीराँ’ के […]

Baadar Dekh Dari Shyam

बादल देख डरी बादर देख डरी हो श्याम! मैं तो बादर देख डरी काली-पीली घटा उमड़ी, बरस्यो एक घरी जित जाऊँ तित पानी ही पानी, भई सब भोम हरी जाको पिव परदेस बसत है, भीजै बार खरी ‘मीराँ’ के प्रभु गिरिधर नागर,कीज्यो प्रीत खरी

Baje Baje Re Shyam Teri Pejaniyan

श्याम की पैंजनियाँ बाजे-बाजे रे स्याम तेरी पैजनियाँ माता यशोदा चलन सिखावत, उँगली पकड़ कर दो जनियाँ राजत अनुपम लाल झगुला, पीट बरन सुन्दर तनिया ‘मीराँ’ के प्रभु गिरिधर नागर, तीन लोक के तुम धनिया

Baso Mere Nainan Me Nandlal

मोहिनी मूर्ति बसो मोरे नैनन में नंदलाल मोहनी मूरति, साँवरी सूरति, नैणा बने बिसाल अधर सुधारस मुरली राजत, उर बैजंती माल छुद्र घंटिका कटि तट सोभित, नूपुर सबद रसाल ‘मीराँ’ प्रभु संतन सुखदाई, भगत-बछल गोपाल

Barse Badariya Sawan Ki

प्रतीक्षा बरसे बदरिया सावन की, सावन की मनभावन की सावन में उमग्यो मेरो मनवा, भनक सुनी हरि आवन की नन्हीं-नन्हीं बूँदन मेहा बरसे, शीतल पवन सुहावन की ‘मीराँ’ के प्रभु गिरिधर नागर, आनँद मंगल गावन की

Shyam Milan Ro Ghano Umavo

मिलन की प्यास श्याम मिलणरो घणो उमावो, नित उठ जोऊँ बाट लगी लगन छूटँण की नाहीं, अब कुणसी है आँट बीत रह्या दिन तड़फत यूँ ही, पड़ी विरह की फाँस नैण दुखी दरसण कूँ तरसै, नाभि न बैठे साँस रात दिवस हिय दुःखी मेरो, कब हरि आवे पास ‘मीराँ’ के प्रभु कब रे मिलोगे, पूरवो […]

Ho Ji Hari Kit Gaye Neha Lagay

विरह व्यथा हो जी हरि!कित गए नेहा लगाय नेह लगाय मेरो मन हर लियो, रस-भरी टेर सुनाय मेरे मन में ऐसी आवै, प्राण तजूँ विष खाय छाँड़ि गए बिसवासघात करि, नेह की नाव चढ़ाय ‘मीराँ’ के प्रभु कब रे मिलोगे, रहे मधुपुरी छाय

Hari Mere Jivan Pran Adhar

प्राणाधार हरि मेरे जीवन प्राण अधार और आसरो है नहीं तुम बिन, तीनूँ लोक मँझार आप बिना मोहि कछु न सुहावै, निरख्यौ सब संसार ‘मीराँ’ कहे मैं दासि रावरी, दीज्यौ मती बिसार

Hari Tum Haro Jan Ki Pir

पीड़ा हरलो हरि तुम हरो जन की भीर द्रौपदी की लाज राखी, तुम बढ़ायो चीर भक्त कारन रूप नरहरि, धर्यो आप सरीर हरिणकस्यप मारि लीन्हौं, धर्यो नाहिं न धीर बूड़तो गजराज राख्यौ, कियो बाहर नीर दासी ‘मीराँ’ लाल गिरिधर, हरो म्हारी पीर

Hamro Pranam Banke Bihari Ko

मीरा का प्रणाम हमरो प्रणाम बाँके बिहारी को मोर मुकुट माथे तिलक बिराजै, कुण्डल अलका कारी को अधर धर मुरली मधुर बजावै, रिझावै राधा प्यारी को यह छबि देख मगन भई ‘मीराँ’, मोहन गिरिवर धारी को