Ka Mere Man Mah Base Vrindawan Var Dham
अभिलाषा कब मेरे मन महँ बसै, वृन्दावन वर धाम कब रसना निशि दिन रटै, सुखते श्यामा श्याम कब इन नयननिते लखूँ, वृन्दावन की धूरि जो रसिकनि की परम प्रिय, पावन जीवन मूरि कब लोटूँ अति विकल ह्वै, ब्रजरज महँ हरषाय करूँ कीच कब धूरि की, नयननि नीर बहाय कब रसिकनि के पैर परि, रोऊँ ह्वैके […]
Kachu Pat Pahinati Rahi
बंसी का जादू कछु पट पहिनति रही, कछुक आभूषण धारति कछु दर्पन महँ देखि माँग, सिन्दूर सम्हारति जो जो कारज करति रही, त्यागो सो तिनने चलीं बेनु सुनि काज अधुरे छोड़े उनने बरजी पति पितु बन्धु ने, रोकी बहुत पर नहीं रुकी कही बहुत पर ते नहीं, लोक लाज सम्मुख झुकी
Ek Aur Vah Kshir Nir Main Sukh Se Sowen
श्री राधाकृष्ण एक ओर वह क्षीर नीर में, सुख से सोवैं करि के शैया शेष लक्ष्मीजी, जिन पद जोवैं वे ही राधेश्याम युगल, विहरत कुंजनि में लोकपाल बनि तऊ चरावत, धेनु वननि में निज ऐश्वर्य भुलाय कें, करैं अटपटे काम है तेज पुंज उन कृष्ण को, बारम्बार प्रणाम है
Aur Ansha Avtar Krishna Bhagwan Swayam Hai
परब्रह्म श्री कृष्ण और अंश अवतार कृष्ण भगवान स्वयम् हैं वे मानुस बनि गये, यशोदा नन्द-नँदन हैं सकल भुवन के ईश एक, आश्रय वनवारी मोर मुकुट सिर धारि अधर, मुरली अति प्यारी रस सरबस श्रृंगार के, साक्षात् श्रृंगार हैं जो विभु हैं, आनन्दघन, उन प्रभु की हम शरन हैं