Priti Pagi Shri Ladili Pritam Shyam Sujan
युगल से प्रीति प्रीति पगी श्री लाड़िली, प्रीतम स्याम सुजान देखन में दो रूप है, दोऊ एक ही प्रान ललित लड़ैती लाड़िली, लालन नेह निधान दोउ दोऊ के रंग रँगे, करहिं प्रीति प्रतिदान रे मन भटके व्यर्थ ही, जुगल चरण कर राग जिनहिं परसि ब्रजभूमि को, कन कन भयो प्रयाग मिले जुगल की कृपा से, […]
Kahe Aise Bhaye Kathor
निहोरा काहे ऐसे भये कठोर टेरत टेरत भई वयस अब, तक्यो न मेरी ओर कहा करों, कोउ पंथ न दीखत, साधन भी नहिं और पै तुम बिनु मेरे मनमोहन, दीखत और न ठौर काहे अब स्वभाव निज भूले, करहुँ न करुना कोर हूँ मैं दीन भिखारी प्यारे, तुम उदार-सिरमौर
Kisori Karat Keli Aangal Main
किसोरी की क्रीड़ा किसोरी करत केलि आँगन में चलत फिरत छम छम आँगन में, होत मगन अति मन में कीरति की है लाड़-लड़ैती, बरसत रस छन छन में वृषभानू की तो मनभानी, पगी हुई रसघन में प्रीति-रीति की प्रतिमा पूरी, उपमा नहिं त्रिभुवन में मेरे तो तन-मन की स्वामिनि, लगी लगन चरणन में
Kou Ya Kanha Ko Samujhawe
नटखट कन्हैया कोउ या कान्हा को समुझावै कैसो यह बेटो जसुमति को, बहुत ही धूम मचावै हम जब जायँ जमुन जल भरिबे घर में यह घुस जावै संग सखा मण्डली को लै यह, गोरस सबहिं लुटावै छींके धरी कमोरी को सखि, लकुटी सो ढुरकावै आपु खाय अरु धरती पर, गोरस की कीच बनावै जब हम […]
Kou Re Jaiyo Madhupuri Aur
यशोदा का संदेश कोउ रे! जइयो मधुपूरि ओर वहाँ बसत है मेरो लाला सुन्दर नवल किशोर कहियो वाहि अरे नटखट! क्यों आत न इते बहोर मैया बिलखि बिलखि जीवति है, तकत न वाकी ओर माखन सो तेरो हिय लाला, काहे भयो कठोर मैं तो नित तेरो मग जोऊँ, कान्ह बहोर बहोर अपुनो ही सुत करि […]
Khelat Fag Pran Dhan Mohan
होली का रंग खेलन फाग प्रानधन मोहन, मेरे द्वारे आयो रे नटवर रूप देखि प्रीतम को, मेरो मन उमगायो रे संग सखा सब छैल-छबीले, लाल गुलाल उड़ायो रे सोहत हाथ कनक-पिचकारी, केसर रंग रँगायो रे ओसर पाइ लई मैं मुरली, काजर नयन लगायो रे सिर चुंदरी ओढ़ाय लाल को, लाली भेष बनायो रे घेरि सखिन […]
Jiwan Ke Jiwan Manmohan
श्रीकृष्ण भजन जीवन के जीवन मनमोहन, वरना मृत्यु समान उनके भजन बिना यह जीवन केवल है श्मशान चलती फिरती दिखे देह जो, उसे प्रेत लो जान व्यर्थ ही इसको नित्य सजाये, आखिर तो अवसान मिला विवेक प्रभु से हमको, उनका कर गुणगान
Tum Bin Jiwan Bhar Bhayo
शरणागति तुम बिन जीवन भार भयो! कब लगि भटकाओगे प्रीतम, हिम्मत हार गयो कहाँ करों अब सह्यो जात नहिं, अब लौ बहुत सह्यो अपनो सब पुरुषारथ थाक्यों, तव पद सरन गह्यो सरनागत की पत राखत हो, सब कोऊ यही कह्यो करुणानिधि करुणा करियो मोहि, मन विश्वास भयो
Nachat Nandlal Madhur Bajat Paijaniya
बालकृष्ण नाचत नंदलाल, मधुर बाजत पैजनियाँ निरखि निरखि हुलसहि हिय, मोहित नँदरनियाँ मणिमय आँगन अनूप, निरखत निज छाँह रूप हँसि हँसि निरखत स्वरूप, करि करि किलकरियाँ निरखि सो अनूप रंग, मो मन अतिसय उमंग पुलकित सब अंग अंग, पग पग रुनझुनियाँ
Pran Dhan Sundar Shyam Sujan
दर्शन की प्यास प्रानधन! सुन्दर श्याम सुजान छटपटात तुम बिना दिवस निसि, पड़ी तुम्हारी बान कलपत विलपत ही दिन बीतत, निसा नींद नहिं आवै स्वप्न दरसहू भयौ असंभव, कैसे मन सचु पावै अब मत देर करो मनमोहन, दया नैकु हिय धारौ सरस सुधामय दरशन दै निज, उर को ताप निवारौ