He Govind He Gopal He Govind Rakho Sharan

शरणागति हे गोविन्द, हे गोपाल, हे गोविन्द राखो शरण अब तो जीवन हारे, हे गोविन्द, हे गोपाल नीर पिवन हेतु गयो, सिन्धु के किनारे सिन्धु बीच बसत ग्राह, चरन धरि पछारे चार प्रहर युद्ध भयो, ले गयो मझधारे नाक कान डूबन लागे, कृष्ण को पुकारे द्वारका में शब्द गयो, शोर भयो भारे शंख-चक्र, गदा-पद्म, गरूड़ […]

He Hari Nam Ko Aadhar

नाम स्मरण है हरि नाम को आधार और या कलिकाल नाहिन, रह्यो विधि ब्यौहार नारदादि, सुकादि संकर, कियो यहै विचार सकल श्रुति दधि मथत काढ्यो, इतो ही घृतसार दसहुँ दिसि गुन करम रोक्यो, मीन को ज्यों जार ‘सूर’ हरि को सुजस गावत, जेहि मिटे भवभार

Ho Ik Nai Bat Suni Aai

श्री राधा प्राकट्य हौं इक नई बात सुनि आई कीरति रानी कुँवरी जाई, घर-घर बजत बधाई द्वारे भीर गोप-गोपिन की, महिमा बरनि न जाई अति आनंद होत बरसाने, रतन-भूमि निधि छाई नाचत तरुन वृद्ध अरु बालक, गोरस-कीच मचाई ‘सूरदास’ स्वामिनि सुखदायिनि, मोहन-सुख हित आई