Jay Jay Jay Giriraj Kishori

पार्वती वन्दना जय-जय-जय गिरिराजकिशोरी जय महेश मुखचंद्र चकोरी जय गजवदन षडानन माता जग-जननी दामिनि-द्युति दाता नहिं तव आदि मध्य अवसाना अमित प्रभाव वेद नहीं जाना भव-भय-विभव पराभव कारिणि विश्व-विमोहिनि स्वबस विहारिणि

Jay Jayti Jay Raghuvansh Bhushan

श्री राम वन्दना जय जयति जय रघुवंशभूषण राम राजिवलोचनम् त्रैताप खंडन जगत्-मंडन ध्यानगम्य अगोचरम् अद्वैत अविनाशी अनिन्दित, मोक्षप्रद अरि गंजनम् तव शरण भवनिधि-पारदायक, अन्य जगत् विडम्बनम् हे दीन-दारिद के विदारक, दयासिन्धु कृपाकरम हे भक्तजन के राम जीवन-मूल मंगल मंगलम्

Jay Ram Rama Ramnam Samanam

श्री राम वन्दना जय राम रमा- रमनं समनं , भव-ताप भयाकुल पाहिजनं अवधेस, सुरेस, रमेस विभो, सरनागत माँगत पाहि प्रभो दस-सीस-बिनासन बीस भुजा, कृत दूरि महा-महि भूरि-रुजा रजनी-चर-वृन्द-पतंग रहे, सर-पावक-तेज प्रचंड दहे महि-मंडल-मंडन चारुतरं, धृत-सायक-चाप-निषंग-बरं मद-मोह-महा ममता-रजनी, तमपुंज दिवाकर-तेज-अनी मनजात किरात निपात किए, मृग, लोभ कुभोग सरेनहिए हति नाथ अनाथनि पाहि हरे, विषया वन पाँवर […]

Purte Nikasi Raghuvir Vadhu

वन में सीता राम पुरतें निकसी रघुवीर वधू धरि धीर दए मग में डग द्वै झलकीं भरि भाल कनीं जल कीं, पुट सूखि गए मधुराधर वै फिरि बूझति है, चलनो अब केतिक पर्ण कुटी करिहौ कित ह्वै तिय की लखि आतुरता पिय की अखियाँ अति चारु चलीं जल च्वै

Ishwar Ans Jiv Avinasi

सुभाषित ईश्वर अंस जीव अविनासी, चेतन अमल सहज सुखरासी उलटा नाम जपत जगजाना, वाल्मीकि भये ब्रह्म समाना जहाँ सुमति तहँ संपति नाना, जहाँ कुमति तहँ विपति निदाना जा पर कृपा राम की होई, तापर कृपा करहिं सब कोई जिनके कपट, दम्भ नहिं माया, तिनके ह्रदय बसहु रघुराया जिन हरि –भक्ति ह्रदय नहिं आनी, जीवत शव […]

Anguli Par Dhar Giriraj

गिरिधारी अँगुली पर धर गिरिराज नाम गिरधारी पायो है बन्द हुयो सुरपति पूजन, गिरिराज पुजायो है सवा लाख मण सामग्री को, भोग लगायो है पड़ी स्वर्ग में खबर, क्रोध शचीपति को आयो है मूसलधार अपार बहुत ही, जल बरसायो है पड़ी न ब्रज पर बूँद, इन्द्र मन में घबरायो है ब्रजवासी सब कहें श्याम, गिरिराज […]

Antar Mam Vikasit Karo

निवेदन (बंगला) अन्तर मम विकसित करो अन्तरतर हे निर्मल करो, उज्ज्वल करो, सुन्दर करो हे! जाग्रत करो, उद्यत करो, निर्भय करो हे! मंगल करो, निरलस, निःसंशय करो हे! युक्त करो हे सवार संगे, मुक्त करो हे बंध! संचार करो सकल कर्मे, शान्त तोमार छंद! चरण-पद्मे मम चित्त, निष्पंदित करो! मम चित्त, निष्पंदित करो! नंदित करो, […]

Antarman Se Karu Archana

गायत्री स्तवन अन्तर्मन से करूँ, अर्चना हे गायत्री माता जपे आपका महामंत्र, वह सभी सिद्धियाँ पाता अनुपम रूप आपका माता, वर्णन हो नहीं पाता महिमा अपरम्पार आपकी, भक्तों की हो त्राता दिव्य तेज की एक किरण से, मन प्रकाश भर जाता

Antaryami Ko Pahchano

अन्तरवृत्ति अन्तर्यामी को पहचानो मन में होय उजेरा क्रोध लोभ मद अहंकार ने, मानव जीवन घेरा हुए मोह से ग्रस्त सभी जन, छाया घना अँधेरा यौवन बीता, समय जा रहा, किन्तु विवेक न जागा जिसने संग किया संतों का, तमस हृदय का भागा

Atulit Bal Ke Dham

महावीर वन्दना अतुलित बल के धाम पवनसुत, तेज प्रताप निधान राम जानकी हृदय बिराजै, संकटहर हनुमान अग्रगण्य ज्ञानी अंजनि-सुत, सद्गुण के हो धाम अजर अमर हो सिद्धि प्रदाता, रामदूत अभिराम कंचन वर्ण आपके वपु का, घुँघराले वर केश हाथों में है वज्र, ध्वजा अरु अति विशिष्ट है वेश गमन आपका मन सदृश है, छोह करे […]