Nana Vidhi Lila Karen Shyam
भक्त के भगवान नाना विधि लीला करें स्याम श्री हरि की शरण गजेन्द्र गया, जभी ग्राह ने जकड़ लिया विनती को सुन फौरन पहुँचे और ग्राह से मुक्त किया द्रुपत सुता का चीर खिंच रहा बोली-‘आस तिहारी’ लिया वस्त्र अवतार बचाई, लाज तभी गिरधारी नहीं उठाऊँ शस्त्र युद्ध में, यह केशव की बान तोड़ प्रतिज्ञा […]
Nam Japan Kyon Chod Diya
नाम-जप नाम जपन क्यों छोड़ दिया क्रोध न छोड़ा, झूँठ न छोड़ा, सत्य वचन क्यों छोड़ दिया झूठे जग में जी ललचा कर, असल देश क्यों छोड़ दिया कौड़ी को तो खूब सम्भाला, लाल-रतन क्यों छोड़ दिया जिहि सुमिरन ते अति सुख पावे, सो सुमिरन क्यों छोड़ दिया रे नर इक भगवान भरोसे, तन-मन-धन क्यों […]
Narayan Ka Nit Nam Japo
कीर्तन महिमा नारायण का नित नाम जपो, हृदय से मंगलकारी श्री राम कृष्ण हरि नारायण एक ही स्वरूप संकट हारी है रामबाण औषधि है सब रोगों का जो शमन करें प्रभु कीर्तन हो तन्मय हो कर सब चिंताओं को दूर करें कलि-काल में साधन बड़ा यही हम जपे प्रभु का नाम नित्य परिवार सहित संकीर्तन […]
Nav Se Kar Do Ganga Paar
केवट का मनोभाव नाव से कर दो गंगा पार भाग्यवान् मैं हूँ निषाद प्रभु लेऊ चरण पखार जब प्रभु देने लगे मुद्रिका जो केवट का नेग बोला केवट प्रभु दोनों की जाति ही भी तो एक चरण कमल के आश्रित हूँ प्रभु करो न लोकाचार भवसागर के आप हो केवट करना मुझको पार
Nirbal Ke Pran Pukar Rahe Jagdish Hare
जगदीश स्तवन निर्बल के प्राण पुकार रहे, जगदीश हरे जगदीश हरे साँसों के स्वर झंकार रहे, जगदीश हरे जगदीश हरे आकाश हिमालय सागर में, पृथ्वी पाताल चराचर में ये शब्द मधुर गुंजार रहे, जगदीश हरे जगदीश हरे जब दयादृष्टि हो जाती है, जलती खेती हरियाती है इस आस पे जन उच्चार रहे, जगदीश हरे जगदीश […]
Nirmal Vivek Ho Ant Samay
गजेन्द्र स्तुति निर्मल विवेक हो अन्त समय गजेन्द्र-मोक्ष स्तवन करे, नित ब्रह्म मुहूर्त में हो तन्मय अद्भुत स्तुति नारायण की, जो गजेन्द्र द्वारा सुलभ हमें हो अन्त समय में जैसी मति, वैसी ही गति हो प्राप्त हमें पापों, विघ्नों का शमन करें, स्तुति श्रेय यश को देती निष्काम भाव अरू श्रद्धा से, हम करें कष्ट […]
Nirvishayi Banayen Man Ko Ham
प्रबोधन निर्विषयी बनायें मन को हम चिन्तन हो बस परमात्मा का, हो सुलभ तभी जीवन में राम मन और इन्द्रियाँ हो वश में, संयम सेवा का संग्रह हो अनुकूल परिस्थिति आयेगी, सब कार्य स्वतः मंगलमय हो उत्पन्न कामना से होते, सारे ही पाप और विपदा जब अचल शांति हो प्राप्त तभी, मानव को रहे न […]
Nishchint Huve Baithe Na Raho
प्रबोधन निश्चिंत हुए बैठे न रहो शाश्वत जीवन यहाँ किसका है, पैदा होए वे मरते भी दिन कभी एक से नहीं रहे, इसका विचार तुम करो अभी जब जन्म दिवस आता है तो, खुशियाँ सब लोग मनाते हैं कम वर्ष हो गये जीवन के, समझे जो नहीं पछताते हैं
Nishkam Karma Se Shanti Mile
निष्काम कर्म निष्काम कर्म से शान्ति मिले जीवन में चाहों के कारण, केवल अशांति मन छायेगी सुख शांति सुलभ निश्चित, संतृप्ति भाव मन में होगी सम्मान प्राप्ति का भाव रहे, तो कुण्ठाएँ पैदा होगी संयम बरते इच्छाओं पर, मन में न निराशा तब होगी स्वाभाविक जो भी कर्म करें, फल की इच्छा न रखें मन […]
Nishthur Bane Ho Kaise
विरह वेदना निष्ठुर बने हो कैसे, चित्तचोर हे बिहारी चित्तवन तुम्हारी बाँकी, सर्वस्व तुम्ही पे वारी सूरत तेरी सुहानी, नैनों में वह समाई हम से सहा न जाये, ऐसा वियोग भारी मुरली की धुन सुना दो, रस प्यार का बहा दो चन्दा सा मुख दिखा दो, अनुपम छबि तुम्हारी वन वन भटक रही है, तुमको […]