Purushartha Kiya Gat Jivan Main

पुरुषार्थ पुरुषार्थ किया गत जीवन में, प्रारब्ध वही तो होता है जो आज करें हम कर्म वही, कल का भविष्य हो जाता है आवश्यक हम सत्कार्य करे, तत्क्षण फल की आशा न करें भगवान् कृष्ण भी अर्जुन को, ये ही उपदेश प्रदान करें कहीं होनहार की आड़ लिये, हम अकर्मण्य नहीं हो जाये कर्तव्य-कर्म हम […]

Pulakit Malay Pawan Manthar Gati

वसंतोत्सव पुलकित मलय-पवन मंथर गति, ऋतु बसंत मन भाये मधुप-पुंज-गुंजित कल-कोकिल कूजित हर्ष बढ़ाये चंदन चर्चित श्याम कलेवर पीत वसन लहराये रंग बसंती साड़ी में, श्री राधा सरस सुहाये भाव-लीन अनुपम छबिशाली, रूप धरे नँद-नंदन घिरे हुवे गोपीजन से वे क्रीड़ा रत मन-रंजन गोप-वधू पंचम के ऊँचे स्वर में गीत सुनाती रसनिधि मुख-सरसिज को इकटक […]

Pujan Ko Giriraj Goverdhan

अन्नकूट उत्सव पूजन को गिरिराज गोवर्धन चले नंद के लाल कर श्रंगार सभी ब्रज नारी और गये सब ग्वाल नंद यशोदा भी अति उत्सुक ले पूजा का थाल गये पूजने गोवर्धन गिरि, तिलक लगाये भाल भाँति भाँति के व्यंजन एवं फल भी विविध रसाल एक ओर मनमोहन ने तब कर ली देह विशाल गिरिवर रूप […]

Pragati Anup Rup Vrashbhanu

श्री राधा प्राकट्य प्रगटी अनूप रूप, वृषभानु की दुलारी राधा शुचि मधुर-मधुर, कीर्तिदा-कुमारी चंद्र-वदन रूप सौम्य, दोऊ कर-कमल मधुर विशद नयन-कमल मधुर, आनँद विस्तारी अरुन चरन-पद्म सदृश, भौंह मधुर भाव मधुर अधरनि मुसकान मधुर, सरवस बलिहारी आए तहँ दरसन हित, शिव, ऋषि व्रतधारी रासेश्वरि श्री राधा के, कान्हा की प्यारी  

Pragati Nagari Rup Nidhan

श्री राधा प्राकट्य प्रगटी नागरि रूप-निधान निरख निरख सब कहे परस्पर, नहिं त्रिभुवन में आन कृष्ण-प्रिया का रूप अद्वितीय, विधि शिव करे बखान उपमा कहि कहि कवि सब हारे, कोटि कोटि रति-खान ‘कुंभनदास’ लाल गिरधर की, जोरी सहज समान  

Pragate Abhiram Shyam

श्री कृष्ण प्राकट्य प्रगटे अभिराम श्याम, रसिक ब्रज-बिहारी गोकुल को नंद-भवन, जन-मन सुखकारी आनँद अपार छयौ, दुःख-शोक भागि गयौ हरन विषम भूमि-भार, आये अवतारी सबके अति हिय हुलास, नंद-सुअन-दरस-आस दौरे तजि तजि निवास, आतुरता भारी पहुँचे सब नन्द-भवन, दरसन करि अति निहाल पायौ सब सुख अपार, गोकुल नर-नारी  

Pragate Shri Vaaman Avtar

वामन अवतार प्रगटे श्री वामन अवतार निरख अदिति मुख करत प्रशंसा, जगजीवन आधार तन श्याम पीत-पट राजत, शोभित है भुज चार कुण्डल मुकुट कंठ कौस्तुभ-मणि, अरु भृगुरेखा सार देखि वदन आनंदित सुर-मुनि, जय-जय निगम उचार ‘गोविंददास’ हरि वामन होके, ठाड़े बलि के द्वार  

Pratham Gou Charan Ko Din Aaj

गौचारण प्रथम गो-चारन को दिन आज प्रातःकाल उठि जसुमति मैया, सुमन सजाये साज विविध भाँति बाजे बाजत है, रह्यो घोष अति गाज गोपीजन सब गीत मनोहर, गाये तज सब काज लरिका सकल संग संकर्षण, वेणु बजाय रसाल धेनू चराये बाल-कृष्ण-प्रभु, नाम धर्यो गोपाल  

Prabal Prem Ke Pale Padkar

भक्त के भगवान् प्रबल प्रेम के पाले पड़कर, प्रभु को नियम बदलते देखा अपना मान भले टल जाये, भक्त का मान न टलते देखा जिनके चरण-कमल कमला के, करतल से न निकलते देखा उसको ब्रज करील कुंजन के, कण्टक पथ पर चलते देखा जिनकी केवल कृपा दृष्टि से, सकल सृष्टि को पलते देखा उनको गोकुल […]

Prabhu Adbhut Teri Maya

मोह माया प्रभु अद्भुत तेरी माया, जिसका पार न कोई पाया धन दौलत सम्बन्धी अथवा, पुत्र पिता या जाया ममता कभी न छूटे उनसे, जिनमें रहा भुलाया गर्भवास कर नौ महिने तक, पृथ्वी पर मैं आया प्यार मिला घर के लोगों से, समझ नहीं कुछ पाया युवा काल ऐसे ही खोया, मस्ती मजा उड़ाया वृद्धावस्था […]