Jiv Bas Ram Nam Japna
हरिनाम स्मरण जीव बस राम नाम जपना, जरा भी मत करना फिकरी भाग लिखी सो हुई रहेगी, भली बुरी सगरी ताप करके हिरणाकुश राजा, वर पायो जबरी लौह लकड़ से मार्यो नाहीं, मर्यौ मौत नख री तीन लोक ककी माता सीता, रावण जाय हरी जब लक्षमण ने करी चढ़ाई, लंका गई बिखरी आठों पहर राम […]
Dar Lage Aur Hansi Aave
कलियुग की रीति डर लागे और हाँसी आवे, गजब जमाना आया रे धन दौलत से भरा खजाना, वैश्या नाच नचाया रे मुट्ठी अन्न जो साधू माँगे, देने में सकुचाया रे कथा होय तहँ श्रोता जावे, वक्ता मूढ़ पचाया रे भाँग, तमाखू, सुलफा, गाँजा, खूब शराब उड़ाया रे उलटी चलन चले दुनियाँ में, ताते जी घबराया […]
Tan Ki Dhan Ki Kon Badhai
अन्त काल तन की धन की कौन बड़ाई, देखत नैनों में माटी मिलाई अपने खातिर महल बनाया, आपहि जाकर जंगल सोया हाड़ जले जैसे लकरि की मोली, बाल जले जैसे घास की पोली कहत ‘ कबीर’ सुनो मेरे गुनिया, आप मरे पिछे डूबी रे दुनिया
Tune Hira So Janam Gawayo
भजन महिमा तूँने हीरा सो जनम गँवायो, भजन बिना बावरे ना संता के शरणे आयो, ना तूँ हरि गुण गायो पचि पचि मर्यो बैल की नाईं, सोय रह्यो उठ खायो यो संसार हात बनियों की, सब जग सौदे आयो चतुर तो माल चौगुना कीना, मूरख मूल गवाँयो यो संसार माया को लोभी, ममता महल चितायो […]
Din Yu Hi Bite Jate Hain Sumiran Kar Le Tu Ram Nam
नाम स्मरण दिन यूँ ही बीते जाते हैं, सुमिरन करले तूँ राम नाम लख चौरासी योनी भटका, तब मानुष के तन को पाया जिन स्वारथ में जीवन खोया, वे अंत समय पछताते हैं अपना जिसको तूँने समझा, वह झूठे जग की है माया क्यों हरि का नाम बीसार दिया, सब जीते जी के नाते हैं […]
Deh Dhara Koi Subhi Na Dekha
दुःखी दुनिया देह धरा कोई सुखी न देखा, जो देखा सो दुखिया रे घाट घाट पे सब जग दुखिया, क्या गेही वैरागी रे साँच कहूँ तो कोई न माने, झूट कह्यो नहिं जाई रे आसा तृष्णा सब घट व्यापे, कोई न इनसे सूना रे कहत ‘कबीर’ सभी जग दुखिया, साधु सुखी मन जीता रे
Pani Main Min Piyasi Re
आत्म ज्ञान पानी में मीन पियासी रे, मोहे सुन-सुन आवे हाँसी रे जल थल सागर पूर रहा है, भटकत फिरे उदासी रे आतम ज्ञान बिना नर भटके, कोऊ मथुरा, कोई कासी रे गंगा और गोदावरी न्हाये, ज्ञान बिना सब नासी रे कहत ‘कबीर’ सुनो भाई साधो, सहज मिले अविनासी रे
Pritam Aaye Pritam Aaye Aaj Mere Ghar Pritam Aaye
हरि दर्शन प्रीतम आए प्रीतम आये, आज मेरे घर प्रीतम आये रहत रहत मैं अँगना बुहारूँ, मोतियाँ माँग भराऊँ, भराऊँ चरण पखार देख सुख पाऊँ, सब साधन बरसाऊँ पाँच सखी मिल मंगल गाये, राग सरस मैं गाऊँ करूँ आरती, प्रेम निछावर, पल-पल मैं बलि जाऊँ कहे ‘कबीर’ धन भाग हमारा, परम पुरुष वर पाऊँ
Bhajo Re Bhaiya Ram Govind Hari
हरि कीर्तन भजो रे भैया राम गोविन्द हरी जप तप साधन कछु नहिं लागत, खरचत नहिं गठरी संतति संपति सुख के कारण, जासे भूल परी कहत ‘कबीर’ राम नहिं जा मुख, ता मुख धुल भरी
Mat Kar Moh Tu Hari Bhajan Ko Man Re
भजन महिमा मत कर मोह तू, हरि-भजन को मान रे नयन दिये दरसन करने को, श्रवण दिये सुन ज्ञान रे वदन दिया हरि गुण गाने को, हाथ दिये कर दान रे कहत ‘कबीर’ सुनो भाई साधो, कंचन निपजत खान रे