Sajanwa Nainan Mere Tumhari Aur
हरि दर्शन सजनवा नैनन मेरे तुमरी ओर विरह कमण्डल हाथ लिये हैं, वैरागी दो नैन दरस लालसा लाभ मिले तो, छके रहे दिन रैन विरह भुजंगम डस गया तन को, मन्तर माने न सीख फिर-फिर माँगत ‘कबीर’ है, तुम दरशन की भीख
Ham To Ek Hi Kar Ke Mana
आत्म ज्ञान हम तो एक ही कर के माना दोऊ कहै ताके दुविधा है, जिन हरि नाम न जाना एक ही पवन एक ही पानी, आतम सब में समाना एक माटी के लाख घड़े है, एक ही तत्व बखाना माया देख के व्यर्थ भुलाना, काहे करे अभिमाना कहे ‘कबीर’ सुनो भाई साधो, हम हरि हाथ […]
He Antaryami Prabho
हितोपदेश हे अंतर्यामी प्रभो, आत्मा के आधार तो तुम छोड़ो हाथ तो, कौन उतारे पार आछे दिन पाछे गये, हरि से किया न हेत अब पछताये होत क्या, चिड़िया चुग गई खेत ऊँचे कुल क्या जनमिया, करनी ऊँच न होई सुवरन कलस सुरा भरा, साधू निन्दे सोई ऐसी बानी बोलिये, मन का आपा खोय औरन […]
Nath Tav Charan Sharan Main Aayo
शरणागति नाथ तव चरण शरन में आयो अब तक भटक्यो भव सागर में, माया मोह भुलायो कर्म फलनि की भोगत भोगत, कईं योनिनि भटकायो पेट भयो कूकर सूकर सम, प्रभु-पद मन न लगायो भई न शान्ति, न हिय सुख पायो, जीवन व्यर्थ गँवायो ‘प्रभु’ परमेश्वर पतति उधारन, शरनागत अपनायो
Tum Bin Jiwan Bhar Bhayo
शरणागति तुम बिन जीवन भार भयो! कब लगि भटकाओगे प्रीतम, हिम्मत हार गयो कहाँ करों अब सह्यो जात नहिं, अब लौ बहुत सह्यो अपनो सब पुरुषारथ थाक्यों, तव पद सरन गह्यो सरनागत की पत राखत हो, सब कोऊ यही कह्यो करुणानिधि करुणा करियो मोहि, मन विश्वास भयो
Bhajan Ko Namahi Nam Bhayo
भजन महिमा भजन को नामहि नाम भयो जासों द्रवहि न प्राननाथ, वह कैसे भजन भयो कर माला, मुख नाम, पै न मन में कोई भाव रह्यो केवल भयो प्रदरसन, लोगन हूँ ने भगत कह्यो पायो मानुष जन्म, वृथा ऐसे ही समय गयो मन में साँची लगन होय सो, साँचो भजन कह्यो बिरह व्यथा में बीतहिं […]
Bhajan Bin Jiwan Manahu Masan
भजन महिमा भजन बिन जीवन मनहुँ मसान जीवन के जीवन मनमोहन, उन बिन मरन समान चलत फिरत दीखत जो यह तन,सो जनु प्रेत समान कहा काम आवहिगो वैभव, जब तन को अवसान जो कछु मिल्यौ न फल्यौ जगत में, कियो न हरि गुण-गान है बस यही चातुरी साँची, भजै स्याम रसखान
Man Tu Kahe Bhayo Achet
प्रबोधन मन! तू काहे भयो अचेत भटकत रह्यो व्यर्थ में अब तक, कियो न हरि से हेत पायो मानुष-जन्म हाय! तू ताहि वृथा कर देत अरे भूलि हीरा कों बौरे, करत काँच सो हेत प्राननाथ सों प्रीति न करि तू, पूजत पामर प्रेत सुमिर सुमिर रे! सदा स्याम को, संतत स्नेह समेत
Are Man Kar Prabhu Par Vishvas
प्रभु का भरोसा अरे मन कर प्रभु पर विश्वास भटक रहा क्यों इधर-उधर तूँ, झूठे सुख की आस सुन्दर देह सुहावनि नारी, सब विधि भोग-विलास क्या पाया घरबार पुत्र से, मिटी न यम की त्रास क्षण-भङ्गुर सब भोग निरंतर, बने काल के ग्रास मिले परम सुख, घटे कभी नहिं, जिनके मन विश्वास
Udho Kahan Sikhvo Yog
मोहन से योग ऊधौ! कहा सिखावौ जोग हमरो नित्य-जोग प्रियतम सौं, होय न पलक बियोग वे ही हमरे मन मति सर्वस, वे ही जीवन प्रान वे ही अंग-अंग में छाये, हमको इसका भान