Chalan Vahi Des Pritam Chalan Vahi Des

प्रीतम के देश चालाँ वाही देस प्रीतम, चालाँ वाही देस कहो कसूमल साड़ी रँगावाँ, कहो तो भगवाँ भेस कहो तो मोतियाँ माँग भरावाँ, कहो बिखरावाँ केस ‘मीराँ’ के प्रभु गिरिधर नागर, सुण लो बिरद नरेस

Chod Mat Jajo Ji Maharaj

म्हारी लाज छोड़ मत जाजो जी महाराज मैं अबला बल नाहिं गुसाईं, तुम मेरे सिरताज मैं गुणहीन गुण नाहिं गुसाईं, तुम समरथ महाराज थाँरी होय के किणरे जाऊँ, तुम हिवड़ा रा साज मीराँ के प्रभु और न कोई, राखो म्हारी लाज

Jab Se Mohi Nand Nandan Drashti Padyo Mai

मोहन की मोहिनी जब से मोहि नँद नंदन, दृष्टि पड्यो माई कहा कहूँ या अनुपम छवि, वरणी नहीं जाई मोरन की चन्द्रकला शीश मुकुट सोहे केसर को तिलक भाल तीन लोक मोहे कुण्डल की झलक तो, कपोलन पर छाई मानो मीन सरवर तजि, मकर मिलन आई कुटिल भृकुटि तिलक भाल, चितवन में टौना खंजन अरु […]

Jaao Hari Nirmohiya Re

स्वार्थ की प्रीति जाओ हरि निरमोहिया रे, जाणी थाँरी प्रीत लगन लगी जब और प्रीत थी, अब कुछ उलटी रीत अमृत पाय जहर क्यूँ दीजे, कौण गाँव की रीत ‘मीराँ’ कहे प्रभु गिरधर नागर, आप गरज के मीत

Jaago Bansi Ware Lalna

प्रभाती जागो बंसीवारे ललना, जागो मोहन प्यारे रजनी बीती भोर भयो है, घर घर खुले किवारे गोपी दही मथत सुनियत है, कँगना के झनकारे उठो लालजी भोर भयो है, सुर नर ठाड़े द्वारे ग्वाल बाल सब करत कुलाहल, जय जय सबद उचारे माखन रोटी करो कलेवा, गउवन के रखवारे ‘मीराँ’ के प्रभु गिरिधर नागर, शरणागत […]

Jogiya Kab Re Miloge Aai

मिलने की आतुरता जोगिया, कब रे मिलोगे आई तेरे कारण जोग लियो है, घर-घर अलख जगाई दिवस न भूख, रैन नहिं निंदियाँ, तुम बिन कछु न सुहाई ‘मीराँ’ के प्रभु गिरिधर नागर, मिल कर तपन बुझाई

Jogiya Chaai Rahyo Pardes

विरह व्यथा जोगिया, छाइ रह्यो परदेस जब का बिछड़्या फेर न मिलिया, बहुरि न दियो सँदेस या तन ऊपर भसम रमाऊँ, खार करूँ सिर केस भगवाँ भेष धरूँ तुम कारण, ढूँढत फिर फिर देस ‘मीराँ’ के प्रभु गिरिधर नागर, जीवन व्यर्थ विशेष

Jogi Mat Ja Mat Ja Mat Ja

विरह व्यथा जोगी मत जा, मत जा, मत जा, पाँव पड़ू मैं तोरे प्रेम भगति को पंथ है न्यारो, हमकूँ गैल बता जा अगर चंदन की चिता बनाऊँ, अपने हाथ जला जा जल-जल भई भस्म की ढेरी, अपने अंग लगा जा ‘मीराँ’ कहे प्रभु गिरिधर नागर, जोत में जोत मिला जा

Jo Tum Todo Piya Main Nahi Todu Re

अटूट प्रीति जो तुम तोड़ो पिया, मैं नाहीं तोड़ूँ तोरी प्रीत तोड़ के मोहन, कौन संग जोड़ूँ तुम भये तरुवर मैं भई पँखियाँ, तुम भये सरवर मैं भई मछियाँ तुम भये गिरिवर मैं भई चारा, तुम भये चन्दा, मैं भई चकोरा तुम भये मोती प्रभु, मैं भई धागा, तुम भये सोना, मैं भई सुहागा ‘मीराँ’ […]

Josida Ne Laakh Badhai

श्याम घर आये जोसीड़ा ने लाख बधाई, अब घर आये स्याम आज अधिक आनंद भयो है, जीव लहे सुखधाम पाँच सखी मिलि पीव परसि कै, आनँद आठूँ ठाम बिसरि गयो दुख निरखि पिया कूँ, सफल मनोरथ काम ‘मीराँ’ के सुखसागर स्वामी, भवन गवन कियो राम