Hari Tum Haro Jan Ki Pir

पीड़ा हरलो हरि तुम हरो जन की भीर द्रौपदी की लाज राखी, तुम बढ़ायो चीर भक्त कारन रूप नरहरि, धर्यो आप सरीर हरिणकस्यप मारि लीन्हौं, धर्यो नाहिं न धीर बूड़तो गजराज राख्यौ, कियो बाहर नीर दासी ‘मीराँ’ लाल गिरिधर, हरो म्हारी पीर

Hari Mere Jivan Pran Adhar

प्राणाधार हरि मेरे जीवन प्राण अधार और आसरो है नहीं तुम बिन, तीनूँ लोक मँझार आप बिना मोहि कछु न सुहावै, निरख्यौ सब संसार ‘मीराँ’ कहे मैं दासि रावरी, दीज्यौ मती बिसार

Ho Ji Hari Kit Gaye Neha Lagay

विरह व्यथा हो जी हरि!कित गए नेहा लगाय नेह लगाय मेरो मन हर लियो, रस-भरी टेर सुनाय मेरे मन में ऐसी आवै, प्राण तजूँ विष खाय छाँड़ि गए बिसवासघात करि, नेह की नाव चढ़ाय ‘मीराँ’ के प्रभु कब रे मिलोगे, रहे मधुपुरी छाय

Aao Aao Shyam Hraday Ki Tapan Bujhao

हृदय की तपन आओ आओ श्याम, हृदय की तपन बुझाओ चरण कमल हिय धरो, शोक संताप नसाओ यों कहि रोई फूटि-फूटि के, गोपी सस्वर रहि न सके तब श्याम भये, प्रकटित तहँ सत्वर मदन मनोहर वेष तैं, मनमथ के मनकूँ करत प्रकटे प्रभु तिन मध्य में, शोक मोह हियको हरत

Aur Ansha Avtar Krishna Bhagwan Swayam Hai

परब्रह्म श्री कृष्ण और अंश अवतार कृष्ण भगवान स्वयम् हैं वे मानुस बनि गये, यशोदा नन्द-नँदन हैं सकल भुवन के ईश एक, आश्रय वनवारी मोर मुकुट सिर धारि अधर, मुरली अति प्यारी रस सरबस श्रृंगार के, साक्षात् श्रृंगार हैं जो विभु हैं, आनन्दघन, उन प्रभु की हम शरन हैं

Kachu Pat Pahinati Rahi

बंसी का जादू कछु पट पहिनति रही, कछुक आभूषण धारति कछु दर्पन महँ देखि माँग, सिन्दूर सम्हारति जो जो कारज करति रही, त्यागो सो तिनने चलीं बेनु सुनि काज अधुरे छोड़े उनने बरजी पति पितु बन्धु ने, रोकी बहुत पर नहीं रुकी कही बहुत पर ते नहीं, लोक लाज सम्मुख झुकी

Ka Mere Man Mah Base Vrindawan Var Dham

अभिलाषा कब मेरे मन महँ बसै, वृन्दावन वर धाम कब रसना निशि दिन रटै, सुखते श्यामा श्याम कब इन नयननिते लखूँ, वृन्दावन की धूरि जो रसिकनि की परम प्रिय, पावन जीवन मूरि कब लोटूँ अति विकल ह्वै, ब्रजरज महँ हरषाय करूँ कीच कब धूरि की, नयननि नीर बहाय कब रसिकनि के पैर परि, रोऊँ ह्वैके […]

Kalindi Kamniy Kulgat

श्री कृष्ण माधुर्य कालिन्दी कमनीय कूलगत, बालु सुकोमल ब्रज बाथिनि महँ बिछी रहे, बनिके तहँ निश्चल तापै विहरत श्याम चरण, मनि नूपुर धारे परम मृदुल मद भरे बजे, जहाँ जहाँ सुकुमारे अब टक ब्रजरज मध्य में, अंकित जो पदचिन्ह हैं तिनि चरननि वन्दन करौं, जो सबही तें भिन्न हैं केशपाश अति सघन, वरन कारे घुँघरारे […]

Dhuri Dhusrit Nil Kutil Kach Kare Kare

अन्तर्धान लीला धुरि धूसरित नील कुटिल कच, कारे कारे मुखपै बिथुरे मधुर लगें, मनकूँ अति प्यारे झोटा खात बुलाक, मोर को मुकुट मनोहर ऐसो वेष बनाइ जाउ जब, बन तुम गिरिधर तब पल-पल युग-युग सरिस, बीतत बिनु देखे तुम्हें अब निशिमहँ बन छाँड़ि तुम, छिपे छबीले छलि हमें

Nand Ghar Aaj Bhayo Anand

श्री कृष्ण प्राकट्य नन्द घर आज भयो आनन्द मातु यशोदा लाला जायो, ज्यों पूनों ने चन्द गोपी गोप गाय गायक-गन, सब हिय सरसिज वृन्द नन्दनँदन रवि उदित भये हिय, विकसे पंकज वृन्द वसुधा मुदित समीर बहत वर, शीतल मन्द सुगन्ध गरजत मन्द मन्द घन नभ महँ, प्रकटे आनँद कन्द माया बन्धु सिन्धु सब सुख के, […]