Udho Vo Sanwari Chavi Ne
विरथ व्यथा उधो वो साँवरी छवि ने, हमारा दिल चुराया है बजाकर बाँसुरी मीठी, सुनाकर गीत गोविन्द ने रचाकर रास कुंजन में, प्रेम हमको लगाया है छोड़ कर के हमें रोती, बसे वो मधुपुरी जाकर खबर भी ली नहीं फिर के, हमें दिल से भुलाया है हमारा हाल जाकर के, सुनाना श्यामसुन्दर को वो ‘ब्रह्मानन्द’ […]
Darshan Ki Pyasi Mohan
दर्शन की प्यास दर्शन की प्यासी मोहन! आई शरण तुम्हारी रस प्रेम का लगा के, हमको है क्यों बिसारी सूरत तेरी कन्हाई, नयनों में है समाई हमसे सहा न जाये, तेरा वियोग भारी घर बार मोह माया, सब त्याग हमहैं आर्इं चन्दा सा मुख दिखा दो, विनती है यह हमारी बंसी की धुन सुनादो, फिर […]
Priti Ki Rit Na Jane Sakhi
प्रीति की रीति प्रीति की रीत न जाने सखी, वह नन्द को नन्दन साँवरिया वो गायें चराये यमुना तट, और मुरली मधुर बजावत है सखियों के संग में केलि करे, दधि लूटत री वह नटवरिया संग लेकर के वह ग्वाल बाल, मग रोकत है ब्रज नारिन को तन से चुनरी-पट को झटके, सिर से पटके […]
Brajraj Aaj Pyare Meri Gali Me Aana
श्याम का सौन्दर्य ब्रजराज आज प्यारे मेरी गली में आना तेरी छबि मनोहर मुझको झलक दिखाना सिर मोर मुकुट राजे, बनमाल उर बिराजे नूपुर चरण में बाजे, कर में कड़ा सुहाना कुंडल श्रवण में सोहे, बंसी अधर धरी हो तन पीत वसन शोभे, कटि मेखला सजाना विनती यही है प्यारे, सुन नंद के दुलारे ‘ब्रह्मानंद’ […]
Vrindavan Kunj Bhawan
नाचत गिरधारी वृंदावन कुंज भवन, नाचत गिरिधारी धर-धर धर मुरलि अधर, भर-भर स्वर मधुर अधर कर-कर नटवर स्वरूप, सुंदर सुखकारी घन-घन घन बजत ताल, ठुम-ठुम ठुम चलत चाल चरणन छन छन छन छन, नूपुर धुन प्यारी घिर, घिर, घिर करत गान, फिर फिर फिर देत तान मिल, मिल, मिल रचत रास, संग गोप नारी चम, […]
He Sakhi Sun To Vrindawan Main
वृंदावन केलि हे सखि सुन तो वृन्दावन में, बंसी श्याम बजावत है सब साधु संत का दुख हरने, ब्रज में अवतार लिया हरि ने वो ग्वाल-बाल को संग में ले, यमुना-तट धेनु चरावत है सिर मोर-पंख का मुकुट धरे, मकराकृत कुण्डल कानों में वक्षःस्थल पे वनमाल धरे, कटि में पट पीत सुहावत है वृन्दावन में […]
Anguli Par Dhar Giriraj
गिरिधारी अँगुली पर धर गिरिराज नाम गिरधारी पायो है बन्द हुयो सुरपति पूजन, गिरिराज पुजायो है सवा लाख मण सामग्री को, भोग लगायो है पड़ी स्वर्ग में खबर, क्रोध शचीपति को आयो है मूसलधार अपार बहुत ही, जल बरसायो है पड़ी न ब्रज पर बूँद, इन्द्र मन में घबरायो है ब्रजवासी सब कहें श्याम, गिरिराज […]
Anurag Gopiyon Jaisa Ho
गोपियों की प्रीति अनुराग गोपियों जैसा हो श्रीकृष्ण प्रेम का मूर्तिमान, विग्रह है श्री राधाजी ही महाभाव रूप उनका पावन,राधारानी का प्रेम वही श्री राधा का उद्देश्य यही, बस सुख पहुँचाएँ प्यारे को वे करते प्रेम प्रियाजी से, यह श्रेय श्री कृष्ण बड़प्पन को जीवन में जो कुछ सुख दुख है, हम स्वीकारें सहर्ष उसे […]
Apane Ko Sukhi Banaye Ham
अनासक्ति अपने को सुखी बनायें हम कामना पूर्ति जब नहीं होती, तत्काल क्रोध तब आ जाता जब खो देते विवेक तभी, संतुलन नहीं तब रह पाता हम अनासक्त हो कर्म करें, तो अहम् भाव ही मिट जाये प्रभु के हित होए कार्य तभी, कर्तापन भाव न रह पाये होए सहिष्णुता प्रेम भाव, ईर्ष्या व द्वेष […]
Aab Tum Meri Aur Niharo
शरणागति अब तुम मेरी ओर निहारो हमरे अवगुन पै नहि जाओ, अपनो बिरुद सम्भारो जुग जुग साख तुम्हारी ऐसी, वेद पुरानन गाई पतित उधारन नाम तिहारो, यह सुन दृढ़ता आई मैं अजान तुम सम कुछ जानों, घट घट अंतरजामी मैं तो चरन तुम्हारे लागी, शरणागत के स्वामी हाथ जोरि के अरज करति हौं, अपनालो गहि […]