Shri Krishna Chandra Sab Main Chaye
सर्वेश्वर श्रीकृष्ण श्री कृष्णचन्द्र सब में छाये जड़ चेतन प्राणीमात्र तथा कण कण में वही समाये जो महादेव के भक्त करे, गुणगान स्तुति उसमें ये विघ्नेश्वर गणपति रूप धरे, विघ्नों का नाश कर देते हम दुर्गाजी का पाठ करें, होते प्रसन्न उससे भी ये सद्बुद्धि देते सूर्यदेव, उनमें भी प्रकाशित तो ये चाहे पूजें किसी […]
Shri Krishna Chandra Hi Yogeshwar
योगेश्वर श्रीकृष्ण श्री कृष्णचन्द्र ही योगेश्वर, जो सभी योगियों के योगी अध्यात्म साधनों के द्वारा, जुड़ जाता उनसे हर योगी भगवान कृष्ण की लीलाएँ या कर्म सभी जन हितकारी हो कर्म, ज्ञान या भक्ति योग, गीतोपदेश मंगलकारी जो स्वास्थ्य प्रदान करे हमको, सीमित उस तक होता न योग सर्वत्र शांति संतोष रहे, सुख सुविधा का […]
Shri Radhe Pyari De Daro Ri Bansuri
बंसी की चोरी श्री राधे प्यारी, दे डारो री बाँसुरी मोरी काहे से गाऊँ राधे, काहे से बजाऊँ, काहे से लाऊँ गैया घेरि मुखड़े से गाओ कान्हा, ताल बजावो, चुटकी से लाओ गैया घेरि या बंशी में मेरो प्राण बसत है, सो ही गई अब चोरी न तो सोने की, ना ही चाँदी की, हरे […]
Sakhiyon Ko Sang Liye
नाचे बनवारी सखियों को संग लिये, नाचत बनवारी मन्द मन्द चलत पवन, पूनम को चाँद गगन बाँसुरी बजाये श्यामसुन्दर सुखकारी कंकण किंकिंणी कलाप, गोपीजन मन उमंग मंडल बीच श्याम संग, राधा सुकुमारी बाजे मृदंग ताल, छनन छनन नूपुर-ध्वनि वृन्दावन यमुना-तट, शोभा प्रियकारी
Samarpan Karun Buddhi Bal Mera
भीष्मजी द्वारा स्तवन समर्पण करूँ बुद्धि बल मेरा और न कुछ भी दे पाऊँ प्रभु, जो भी है वह तेरा मेरा मन आबद्ध जगत् में, घट घट के प्रभु वासी दो प्रबोध हे त्रिभुवन-सुन्दर! वृन्दावन के वासी पंकज-नयन, तमाल-वर्ण, आवृत अलकावली मुख पे पीत वसन रवि-किरणों के सम, शोभित श्यामल तन पे अनुपम शोभा कुरुक्षेत्र […]
Jay Jay Bal Krishna
कृष्ण आरती जय जय बालकृष्ण शुभकारी, मंगलमय प्रभु की छबि न्यारी रत्न दीप कंचन की थारी, आरति करें सकल नर-नारी नन्दकुमार यशोदानन्दन, दुष्ट-दलन, गो-द्विज हितकारी परब्रह्म गोकुल में प्रकटे, लीला हित हरि नर-तनु धारी नव-जलधर सम श्यामल सुन्दर, घुटुरन चाल अमित मनहारी पीत झगा उर मौक्तिक-माला, केशर तिलक दरश प्रियकारी दंतुलिया दाड़िम सी दमके, मृदुल […]
Om Jay Govind Hare
कृष्ण आरती ॐ जय गोविन्द हरे, प्रभु जय गोपाल हरे सत्य सनातन सुन्दर, मन-वच-बुद्धि परे नव नीरद सम श्यामल, शोभा अति भारी चपल कमल दल लोचन, ब्रज जन-बलिहारी शरद पूर्णिमा शशि सम, मुख-मण्डल अभिराम मृग-मद तिलक विराजत, कुंचित केश ललाम मोर-मुकुट कर मुरली, पीताम्बर धारी गल बैजंती माला, राजत बनवारी —- नवनीत चोर कहावे, विश्वम्भर […]
Aarti Girivar Dhari Ki
राधाकृष्ण आरती आरती गिरिवरधारी की, मोहिनी कीर्ति-कुमारी की बैजंती माला उर धारी, पीत-पट की शोभा न्यारी लाड़िली की शोभा भारी, वदन स्वर्णिम है मनहारी युगल सुन्दरता सुखकारी, —-आरती …. भाल पर तिलक बेंदी दमके, कान में कुण्डल भी चमके चरण में नुपूर ध्वनि झमके, दिव्य शोभा मन में अटके माधुरी मुख की रुचिकारी, —-आरती ….. […]