Ab Lo Nasani
भजन के पद शुभ संकल्प अब लौं नसानी, अब न नसैंहौं राम-कृपा भव-निसा सिरानी, जागे फिरि न डसैंहौं पायउँ नाम चारु चिंतामनि, उर करतें न खसैंहौं श्याम रूप सुचि रुचिर कसौटी, चित कंचनहिं कसैंहौं परबस जानी हँस्यो इन इंद्रिन, निज बस ह्वै न हँसैंहौं मन मधुकर पन करके ‘तुलसी’, रघुपति पद-कमल बसैंहौं
Ese Ramdin Hitkari
हितकारी राम ऐसे राम दीन हितकारी अति कोमल करुना निधान बिनु कारन पर-उपकारी साधन हीन दीन निज अघ बस सिला भई मुनि नारी गृहते गवनि परसि पद-पावन घोर सापते तारी अधम जाति शबरी नारी जड़ लोक वेद ते न्यारी जानि प्रीत दै दरस कृपानिधि सोउ रघुनाथ उबारी रिपु को अनुज विभिषन निशिचर, कौन भजन अधिकारी […]
Aiso Ko Udar Jagmahi
राम की उदारता ऐसो को उदार जग माहीं बिनु सेवा जो द्रवै दीन पर, राम सरिस कोउ नाहीं जो गति जोग बिराग जतन करि, नहिं पावत मुनि ग्यानी सो गति देत गीध सबरी कहँ, प्रभु न बहुत जिय जानी जो संपत्ति दस सीस अरपि करि रावन सिव पहँ लीन्हीं सोई संपदा विभीषन कहँअति, सकुच सहित […]
Kab Dekhongi Nayan Vah Madhur Murati
राम का माधुर्य कब देखौंगी नयन वह मधुर मूरति राजिव दल नयन, कोमल-कृपा अयन, काम बहु छबि अंगनि दूरति सिर पर जटा कलाप पानि सायक चाप उर रुचिर वनमाल मूरति ‘तुलसिदास’ रघुबीर की सोभा सुमिरि, भई मगन, नहीं तन की सूरति
Kabhuk Ho Ya Rahni Rahongo
संत-स्वभाव कबहुँक हौं या रहनि रहौंगो श्री रघुनाथ कृपालु-कृपातें, संत स्वभाव गहौंगो जथा लाभ संतोष सदा, काहू सों कछु न चहौंगो परहित निरत निरंतर मन क्रम वचन नेम निबहौंगो परिहरि देह जनित चिंता, दुख-सुख समबुद्धि सहौंगो ‘तुलसिदास’ प्रभुयहि पथ अविचल, रहि हरि-भगति लहौंगो
Kabhu Man Vishram N Manyo
संसार चक्र कबहूँ मन विश्राम न मान्यो निसिदिन भ्रमत बिसारि सहन सुख जहँ तहँ इंद्रिन तान्यो जदपि विषय सँग सह्यो दुसह दुख, विषम जान उरझान्यो तदपि न तजत मूढ़, ममता बस, जानतहूँ नहिं जान्यो जन्म अनेक किये नाना विधि, कर्म कीच चित सान्यो ‘तुलसिदास’ ‘कब तृषा जाय सर खनतहिं’ जनम सिरान्यो
Kali Nam Kam Taru Ram Ko
राम स्मरण कलि नाम कामतरु राम को दलनिहार दारिद दुकाल दुख, दोष घोर धन धाम को नाम लेत दाहिनों होत मन वाम विधाता वाम को कहत मुनीस महेस महातम, उलटे सूधे नाम को भलो लोक – परलोक तासु जाके बल ललित – ललाम को ‘तुलसी’ जग जानियत नामते, सोच न कूच मुकाम को
Kahan Ke Pathik Kahan Kinh Hai Gavanwa
परिचय कहाँ के पथिक कहाँ, कीन्ह है गवनवा कौन ग्राम के, धाम के वासी, के कारण तुम तज्यो है भवनवा उत्तर देस एक नगरी अयोध्या, राजा दशरथ जहाँ वहाँ है भुवानवा उनही के हम दोनों कुँवरावा , मात वचन सुनि तज्यो है भवनवा कौन सो प्रीतम कौन देवरवा ! साँवरो सो प्रीतम गौर देवरवा ‘तुलसिदास’ […]
Kaho Tumh Binu Grah Mero Kon Kaj
अनुरोध कहौ तुम्ह बिनु गृह मेरो कौन काज ? विपिन कोटि सुरपुर समान मोको, जो प्रिय परिहर् यो राज वलकल विमल दुकूल मनोहर, कंदमूल – फल अमिय अनाज प्रभु पद कमल विलोकहुँ छिन छिन इहितें, अधिक कहा सुख साज हो रहौ भवन भोग लोलुप ह्वै, पति कानन कियो मुनि को साज ‘तुलसिदास’ ऐसे विरह वचन […]
Koshalpur Me Bajat Badhai
श्री राम जन्म कौशलपुर में बजत बधाई सुंदर सुत जायो कौशल्या, प्रगट भये रघुराई जात कर्म दशरथ नृप कीनो, अगणित धेनु दिवाई गज तुरंग कंचन मणि भूषण, दीन्हे मन हरषाई देत असीस सकल नरनारी, चिरजियो सतभाई ‘तुलसिदास’ आस पूरन भई, रघुकुल प्रकटे आई