Nirkhi Syam Haldhar Musukane
यमलार्जुन उद्धार निरखि स्याम हलधर मुसुकाने को बाँधै, को छोरै इन कौं, यह महिमा येई पै जाने उत्पति, प्रलय करत हैं जेई, सेष सहस मुख सुजस बखाने जमलार्जुन –तरु तोरि उधारन, पारन करन आपु मन माने असुर सँहारन, भक्तनि तारन, पावन पतित कहावत बाने ‘सूरदास’ प्रभु भाव-भक्ति के, अति हित जसुमति हाथ बिकाने
Nisi Din Barsat Nain Hamare
विरह व्यथा निसि दिन बरसत नैन हमारे सदा रहत पावस-ऋतु हम पर, जब तें श्याम सिधारे अंजन थिर न रहत अँखियन में, कर कपोल भये कारे कचुंकि-पट सूखत नहीं कबहूँ, उर बिच बहत पनारे आँसू सलिल भये पग थाके, बहे जात सित तारे ‘सूरदास’ अब डूबत है ब्रज, काहे न लेत उबारे
Nainan Nirkhi Syam Swarup
विराट स्वरूप नैनन निरखि स्याम-स्वरूप रह्यौ घट-घट व्यापि सोई, जोति-रूप अनूप चरन सातों लोक जाके, सीस है आकास सूर्य, चन्द्र, नक्षत्र, पावक, ‘सूर’ तासु प्रकास
Naina Bhaye Anath Hamare
विरह व्यथा नैना भये अनाथ हमारे मदनगुपाल यहाँ ते सजनी, सुनियत दूरि सिधारे वै हरि जल हम मीन बापुरी, कैसे जियहिं नियारे हम चातक चकोर श्यामल घन, बदन सुधा-निधि प्यारे मधुबन बसत आस दरसन की, नैन जोई मग हारे ‘सूरदास’ ऐसे मनमोहन, मृतक हुते पुनि मारे
Patit Pawan Virad Tumharo
विनय पतित पावन बिरद तुम्हारो, कौनों नाम धर्यौ मैं तो दीन दुखी अति दुर्बल, द्वारै रटत पर्यौ चारि पदारथ दिये सुदामहि, तंदुल भेंट धर्यौ द्रुपद-सुता की तुम पत राखी, अंबर दान कर्यौ संदीपन को सुत प्रभु दीने, विद्या पाठ कर्यौ ‘सूर’ की बिरियाँ निठुर भये प्रभु, मेरौ कछु न सर्यौ
Palna Syam Jhulavati Janani
पलना पलना स्याम झुलावति जननी अति अनुराग ह्रदय में, गावति, प्रफुलित मगन होति नँद घरनी उमँगि- उमँगि प्रभु भुजा पसारत, हरषि जसोमति अंकम भरनी ‘सूरदास’ प्रभु मुदित जसोदा, पूरन भई पुरातन करनी
Pati Madhuwan Te Aai
श्याम की पाती पाती मधुवन तै आई ऊधौ हरि के परम सनेही, ताके हाथ पठाई कोउ पढ़ति फिरि फिरि ऊधौ, हमको लिखी कन्हाई बहूरि दई फेरि ऊधौ कौ, तब उन बाँचि सुनाई मन में ध्यान हमारौ राख्यो, ‘सूर’ सदा सुखदाई
Pragat Bhai Sobha Tribhuwan Ki
राधा प्राकट्य प्रगट भई सोभा त्रिभुवन की, श्रीवृषभानु गोप के आई अद्भुत रूप देखि ब्रजबनिता, रीझि – रीझि के लेत बलाई नहिं कमला न शची, रति, रंभा, उपमा उर न समाई जा हित प्रगट भए ब्रजभूषन, धन्य पिता, धनि माई जुग-जुग राज करौ दोऊ जन, इत तुम, उत नँदराई उनके मनमोहन, इत राधा, ‘सूरदास’ बलि […]
Pratham Saneh Duhun Man Janyo
राधे श्याम मिलन प्रथम सनेह दुहुँन मन जान्यो सैन-सैन कीनी सब बातें, गुपत प्रीति सिसुता प्रगटान्यो खेलन कबहुँ हमारे आवहु, नंद-सदन ब्रज – गाँउँ द्वारे आइ टेरि मोहि लीजो, कान्ह है मेरो नाउँ जो कहियै घर दूरि तुम्हारो, बोलत सुनियै टेर तुमहिं सौंह वृषभानु बबा की, प्रात-साँझ इक फेर सूधी निपट देखियत तुमकों, तातें करियत […]
Prabhu Tero Vachanbharoso Sancho
भक्त-वत्सलता प्रभु तेरो वचन भरोसो साँचो पोषन भरन विसंभर स्वामी, जो कलपै सो काँचौ जब गजराज ग्राह सौं अटक्यौ, बली बहुत दुख पायौ नाम लेट ताही छन हरिजू, गरुड़हि छाँड़ि छुड़ायौ दुःशासन जब गही द्रौपदी, तब तिहिं वसन बढ़ायौ ‘सूरदास’ प्रभु भक्त बछल हैं, चरन सरन हौं आयौ