Baje Baje Muraliya Baje
बाजे बाजे मुरलिया बाजे वृन्दावन में तरू कदम्ब तल, राधे श्याम बिराजे अद्भुत शोभा दिव्य युगल की, कोटि काम रति लाजें नटवर वेष घण्यो साँवरिया, बाँस की बनी बँसुरिया, बंशी धुनि सुनि भगन सबहिजन, प्रीति रीति रस जागे कनक मुद्रिका अँगुरी सोहे, मोर मुकुट माथे पे सोहे, गोपी ग्वाल मुदित मन बिहसें सकल गोरी लाजे […]
Rang Chayo Barsane Main
होली रंग छायो बरसाने में नंदलाल खेलन को आयो होरी को हुरदंग मचायो नाचै सब दे दे कर ताल, रंग छायो बरसाने में घर द्वारे पे घेर के गोरिन ऊपर रंग बरसायो सब मगन भई ब्रजबाल, रंग छायो बरसाने में छैली मीठी बात बनावे, गोपिन को मन ये ललचाये श्याम ने सबको किचड निहाल, रंग […]
Shrimad Bhagawat Mahima Apar
श्रीमद् भागवत श्रीमद् भागवत महिमा अपार नित नवण करे श्रद्धा पूर्वक, भवसागर से हो जाय पार यद्यपि पुराण अठ्ठारह हैं, स्थान उच्च पर भागवत् का श्रीकृष्ण-कथा पावन इसमें, वाङमय स्वरूप राधावर का भगवदीय तत्व का मना सुलभ, होता हमको इसके द्वारा यह महा-पुराण, हम सुने कहे श्रीकृष्ण-चरित इसमें सारा सब उपनिषदों का सार यही, आत्मा […]
Chit Chura Liya Is Chitwan Ne
मोहन की मोहिनी चित्त चुरा लिया इस चितवन ने आनंद न समाये उर माहि, सखि अटक गया मनमोहन में यशुमति के आंगन खेल रहा, मैं मुग्ध हुई उसकी छबि पर मैं भूल गई घर बार सभी, जादू छाया उसका मुझ पर कानों में कुण्डल को पहने, सखि चमक गाल पर झलक रही आभास हुआ मुझको […]
Chintan Karti Sada Gopiyan
गौधरण चिन्तन करतीं सदा गोपियाँ, मुरलीधर का रम जातीं कर गान श्याम की लीलाओं का जभी चराने गौंओं को वे वन में जाते उनकी चर्चा करें, शाम तक जब वे आते अरी सखी! वंशी में जब वे स्वर को भरते सिद्ध पत्नियों के मन को नन्दनन्दन हरते मोर पंख का मुकट श्याम के मस्तक सोहे […]
Chaitanya Swarup Hi Atma Hai
आत्मानुभूति चैतन्य स्वरूप ही आत्मा है यह शुद्ध देह का शासक है, अन्तःस्थित वही शाश्वत है आत्मा शरीर को मान लिया, मिथ्या-विचार अज्ञान यही यह देह मांसमय अपवित्र और नाशवान यह ज्ञान सही है इच्छाओं का तो अन्त नहीं, मन में जिनका होता निवास मृग-तृष्णा के ही तो सदृश, मानव आखिर होता निराश यह राग […]
Chaitanya Maha Prabhu Ki Jay Jay
चैतन्य महाप्रभु चैतन्य महाप्रभु की जय जय, जो भक्ति भाव रस बरसाये वे विष्णुप्रिया के प्राणनाथ, इस धरा धाम पर जो आये वे शचीपुत्र गौरांग देव प्रकटे, सबके मन हर्षाये हे देह कान्ति श्री राधा सी, जो भक्तों के मन को भाये रस के सागर चैतन्य देव, श्री गौर चन्द्र वे कहलाये आसक्ति शून्य वह […]
Chod Jhamela Jhuthe Jag Ka Kah Gaye Das Kabir
मिथ्या संसार छोड़ झमेला झूठे जग का, कह गये दास कबीर उड़ जायेगा साँस का पंछी, शाश्वत नहीं शरीर तुलसीदास के सीता राघव उनसे मन कर प्रीति रामचरित से सीख रे मनवा, मर्यादा की रीति बालकृष्ण की लीलाओं का धरो हृदय में ध्यान सूरदास से भक्ति उमड़े करो उन्हीं का गान मीरा के प्रभु गिरिधर […]
Chabili Radhe Puje Ri Gangour
गणगौर पूजन छबीली राधे पूजे री गणगौर ललितादिक सब सखियाँ पहुँची वृषभान की पौर पारबती शिवजी को पूजन, श्याम सुन्दर मन मोर सघन कुंज, वृन्दावन अनुपम मिलि गयौ नंद-किसोर ‘नंददास’ प्रभु आय अचानक, घेरी लियो चहुँ ओर
Jag Uthe Bhagya Bharat Ke
श्री राधा प्राकट्य जग उठे भाग्य भारत के, परम आनन्द है छाया श्याम की प्रियतमा राधा, प्रकट का काल शुभ आया बज उठीं देव-दुन्दुभियाँ, गान करने लगे किन्नर सुर लगे पुष्प बरसाने, अमित आनन्द उर में भर चले सब ग्वाल नर नारी, वृद्ध बालक सुसज्जित हो सभी मन में प्रफुल्लित हो, देवियाँ देव हर्षित हो […]