Dulha Ban Aaya Tripurari

शिव विवाह (राजस्थानी) दूल्हा बणआया त्रिपुरारी पारबती की सखियाँ प्यारी, गावे हिलि मिलि गारी भसम रमाय बाघंबर पहर्यो, गल मुण्डमाला धारी हाथ त्रिशूल बजावत डमरू, नंदी की असवारी भूत पिशाच बराती बणग्या, नाचै दै दै तारी सरप करे फुंकार कण्ठ में, डरप रह्या नर नारी सीस जटा बिच गंगा विहरे, भाल चाँद छबि न्यारी निरखत […]

Dudh Piwat Shyam Sundar

दुग्ध सेवा दूध पीवत श्याम सुन्दर, प्राण प्यारी साथ कनक प्यालो दूध को भर, दियो ललिता हाथ पुलकित हो पीवत दोऊ, मुग्ध अति सुहात लाड़िली और लाल मोहन, हँसत नहीं अघात स्याम स्यामा की-छबि पे गोपियाँ बलि जात  

Devi Doshon Ka Daman Kare

देवी चरित्र देवी दोषों का दमन करे करती कृपा सदा भक्तों पर, उनके कष्ट हरे नष्ट करें दुष्टो को माता, कर त्रिशूल धरे मूल प्रकृति से सृष्टि का सृजन, ये भी आप करे चन्द्रवदनी माँ दिव्याभूषण, वस्त्र धरे रति लाजे वे ही तो हिमाचल की पुत्री जो, शिव वामांग विराजै महिषासुर निशुम्भ शुम्भ का भी, […]

Dekha Dekha Yashoda Tera Lal

श्रीकृष्ण माधुरी देखा देखा यशोदा तेरा लाल मैंने देखा कस्तूरी का तिलक बिराजे, उर पचरंगी माल मोर पखा सिर ऊपर सोहे, घूँघर वारे बाल पीताम्बर को कटि में धारे, काँधे कारी शाल कानों में तो कुण्डल सोहे और लालिमा गाल चरणों में नुपूर छमकाये, चले लटकनी चाल यमुना तट पे रास रचाये, नाचे दे-दे ताल […]

Devi Usha Jyotirmai

विनती देवि उषा! ज्योतिर्मयी, तुम प्रेरक सत्कर्म सत्पथ पर हों अग्रसर अडिग रहे निज धर्म सूर्यदेव! गायत्री से करूँ आपका ध्यान निष्ठा होए इष्ट में, करें आप कल्याण हे प्रभु प्रेम विभोर हो, जपूँ आपका नाम नयन अश्रु विगलित रहे, सेवा हो निष्काम असत्, तिमिर अरु मृत्यु का, करो सर्वथा नाश सत्य, ज्ञान, अमृतत्व दो, […]

Sabse Prem Karo Man Pyare

शरणागति सबसे प्रेम करो मन प्यारे, कोई जाति या वंश द्वेष शत्रुता हो न किसी से, सब ही प्रभु के अंश प्राणों में प्रभु शक्ति न ऐसी,करूँ तुम्हारा ध्यान जड़ता भर दो इस जीवन में, बचे ने कुछ भी ज्ञान मुझसे बड़ा न पापी कोई, मैंने पाप छिपाये प्रायश्चित कर पाऊँ कैसे, समझ नहीं कुछ […]

Dhanya Sakhi Suno Jasoda Maiya

बालकृष्ण चरित धन्य सखी सुनो जसोदा मैया घुँटुरन चलत बालकृष्ण अति कोमल नन्हें पैया मनमोहन को रूप रसीलो, गोपीजन मन भावत बारंबार कमल मुख निरखत, नंदालय सब आवत किलकि किलकि हुलसत है लालन, भगत बछल मनरंजन देत असीस सबहि गोपीजन, चिरजीवो दुख-भंजन 

Dhanya Dhanya Vrindavan Dham

वृन्दावान महिमा धन्य धन्य वृन्दावान धाम राधा के संग क्रीड़ा करते जहाँ नित्य घनश्याम ग्वाल-सखा सँग यमुना तट पे, तरु कदंब की छैंया मुरली मधुर बजाये मोहन, और चराये गैंया इसका जो भी ध्यान लगाये, हर्ष न हृदय समाये छटा वर्णनातीत लाल की, कोई पार न पाये वृन्दावन की पावन रज का, सादर तिलक लगाये […]

Dharti Mata Ye Samjhaye

निर्वेद धरती माता यह समझाये जिसको तू अपना है कहता, कुछ भी साथ न जाए मुझको पाने को ही प्यारे तुम, आपस में क्यों लड़ते खोया विवेक जो मिला प्रभु से मिल जुल क्यों नहीं रहते जो महाराजा सम्राट समझते, पृथ्वीपति अपने को हुए मृत्यु के ग्रास अन्त में, अहंकार था जिनको खोद-खोद मुझको जिसने […]

Dhara Par Pragte Palanhar

श्रीकृष्ण प्राकट्य धरा पर प्रगटे पालनहार, बिरज में आनँद छायो रे पीत पताका घर घर फहरे, मंगल गान हर्ष की लहरें गूँजे पायल की झंकार, विरज में आनँद छायो रे नर-नारी नाचे गोकुल में, मात यशोदा बलि बलि जाए द्वारे भीर गोप-गोपिन की, बिरज में आनंद छायो रे दान दे रहे नंद जसोदा, माणिक मोती […]