Pawan Mand Sugandh Shital
श्री बद्रीनाथ स्तवन पवन मंद सुगंध शीतल, हेम मन्दिर शोभितम् नित निकट गंगा बहति निर्मल, श्रीबद्रीनाथ विश्वम्भरम् शेष सुमिरन करत निशिदिन, ध्यान धरत महेश्वरम् श्री वेद, ब्रह्मा करत स्तुति, श्री बद्रीनाथ विश्वम्भरम् इन्द्र, चन्द्र, कुबेर, दिनकर, धूप दीप निवेदितम् सिद्ध मुनिजन करत जय जय, श्रीबद्रीनाथ विश्वम्भरम् शक्ति, गौरी, गणेश, शारद, नारद मुनि उच्चारणम् योग ध्यान […]
Pashu Hinsa Ka Ho Gaya Ant
भगवान बुद्ध पशु-हिंसा का हो गया अन्त, भगवान बुद्ध अवतरित हुए लख यज्ञ कर्म में पशु-वध को, अन्याय घोर प्रभु द्रवित हुए वे कृपा सिन्धु करुणानिधि थे, वैराग्यवान् जो बुद्ध हुए राजा शुद्धोधन की रानी, मायादेवी से जन्म लिया सोचा पशु का वध क्रूर कर्म, जड़ता को तत्पर दूर किया पशु-हिंसा द्वारा यज्ञों से, हो […]
Pitu Matu Sahayak Swami Sakha
प्रार्थना पितु मातु सहायक स्वामी सखा, तुमही एक नाथ हमारे हो जिनके कछु और अधार नहीं, तिनके तुम ही रखवारे हो प्रतिपाल करो सगरे जग को, अतिशय करुणा उर धारे हो भूले हैं हम तुम को, तुम तो, हमरी सुधि नाहिं बिसारे हो शुभ, शान्ति-निकेतन, प्रेमनिधे, मन-मंदिर के उजियारे हो उपकारन को कछु अंत नहीं, […]
Pujan Ko Giriraj Goverdhan
अन्नकूट उत्सव पूजन को गिरिराज गोवर्धन चले नंद के लाल कर श्रंगार सभी ब्रज नारी और गये सब ग्वाल नंद यशोदा भी अति उत्सुक ले पूजा का थाल गये पूजने गोवर्धन गिरि, तिलक लगाये भाल भाँति भाँति के व्यंजन एवं फल भी विविध रसाल एक ओर मनमोहन ने तब कर ली देह विशाल गिरिवर रूप […]
Pragati Anup Rup Vrashbhanu
श्री राधा प्राकट्य प्रगटी अनूप रूप, वृषभानु की दुलारी राधा शुचि मधुर-मधुर, कीर्तिदा-कुमारी चंद्र-वदन रूप सौम्य, दोऊ कर-कमल मधुर विशद नयन-कमल मधुर, आनँद विस्तारी अरुन चरन-पद्म सदृश, भौंह मधुर भाव मधुर अधरनि मुसकान मधुर, सरवस बलिहारी आए तहँ दरसन हित, शिव, ऋषि व्रतधारी रासेश्वरि श्री राधा के, कान्हा की प्यारी
Pragati Nagari Rup Nidhan
श्री राधा प्राकट्य प्रगटी नागरि रूप-निधान निरख निरख सब कहे परस्पर, नहिं त्रिभुवन में आन कृष्ण-प्रिया का रूप अद्वितीय, विधि शिव करे बखान उपमा कहि कहि कवि सब हारे, कोटि कोटि रति-खान ‘कुंभनदास’ लाल गिरधर की, जोरी सहज समान
Pragate Abhiram Shyam
श्री कृष्ण प्राकट्य प्रगटे अभिराम श्याम, रसिक ब्रज-बिहारी गोकुल को नंद-भवन, जन-मन सुखकारी आनँद अपार छयौ, दुःख-शोक भागि गयौ हरन विषम भूमि-भार, आये अवतारी सबके अति हिय हुलास, नंद-सुअन-दरस-आस दौरे तजि तजि निवास, आतुरता भारी पहुँचे सब नन्द-भवन, दरसन करि अति निहाल पायौ सब सुख अपार, गोकुल नर-नारी
Pragate Shri Vaaman Avtar
वामन अवतार प्रगटे श्री वामन अवतार निरख अदिति मुख करत प्रशंसा, जगजीवन आधार तन श्याम पीत-पट राजत, शोभित है भुज चार कुण्डल मुकुट कंठ कौस्तुभ-मणि, अरु भृगुरेखा सार देखि वदन आनंदित सुर-मुनि, जय-जय निगम उचार ‘गोविंददास’ हरि वामन होके, ठाड़े बलि के द्वार
Pratham Gou Charan Ko Din Aaj
गौचारण प्रथम गो-चारन को दिन आज प्रातःकाल उठि जसुमति मैया, सुमन सजाये साज विविध भाँति बाजे बाजत है, रह्यो घोष अति गाज गोपीजन सब गीत मनोहर, गाये तज सब काज लरिका सकल संग संकर्षण, वेणु बजाय रसाल धेनू चराये बाल-कृष्ण-प्रभु, नाम धर्यो गोपाल
Prabal Prem Ke Pale Padkar
भक्त के भगवान् प्रबल प्रेम के पाले पड़कर, प्रभु को नियम बदलते देखा अपना मान भले टल जाये, भक्त का मान न टलते देखा जिनके चरण-कमल कमला के, करतल से न निकलते देखा उसको ब्रज करील कुंजन के, कण्टक पथ पर चलते देखा जिनकी केवल कृपा दृष्टि से, सकल सृष्टि को पलते देखा उनको गोकुल […]