Maiya Ne Bandha Lala Ko
माखन चोर मैया ने बाँधा लाला को नहीं माखन की चोरी छोड़ी, तब उसका शिक्षा देने को जसुमति तो बाँध नहीं पाई, थक करके आखिर बैठ गई इतना कठोर यह काम किया मन में भारी वे पछताई गोपीजन सुन दौड़ी आई हा हा कर सभी दुखी थीं मैया से कान्हा स्वतः बंधे आंसू से भरी […]
Mope Kirpa Karo Giridhari
शरणागति मोपे किरपा करो गिरिधारी! मैं आई शरण तुम्हारी मैं हूँ अभागिन भाग जगाओ, डूबती नैया पार लगाओ दुखिया के हो तुम दुखहारी, कोई न जाने पीर हमारी अपनों से भी हुई पराई, अपनी विपदा उन्हें सुनाई सबने ही जब बात बनाई, रो रो कर के तुम्हें पुकारी तुम्हरे बिन कोई सुने न मोरी, तुम […]
Mo Se Kaha Na Jay Kaha Na Jay
मोहन के गुण मो से कहा न जाय, कहा न जाय, मनमोहन के गुण सारे अविनाशी घट घट वासी, यशुमति नन्द दुलारे लाखों नयना दरस के प्यासे, वे आँखों के तारे गोपियन के संग रास रचाये, मुरलीधर मतवारे शरद पूर्णिमा की रजनी थी, रास रचायो प्यारे उनके गुण सखि कितने गाऊँ, वे सर्वस्व हमारे
Mohan Ne Murali Adhar Dhari
मुरली का जादू मोहन ने मुरली अधर धरी वृन्दावन में ध्वनि गूंज रही, सुन राधे-स्वर सब मुग्ध हुए कोई न बचा इस जादू से, सबके मन इसने चुरा लिए जड़ भी चैतन्य हुए सुन कर, उन्मत्त दशा पशु पक्षी की जल प्रवाह कालिन्दी में रुक गया, कला ये वंशी की गोपीजन की गति तो विचित्र, […]
Mhara Sohan Sundar Shyam Pyara Bega Aajyo Ji
मथुरा गमन (राजस्थानी) म्हारा सोहन सुन्दर श्याम प्यारा, बेगा आज्यो जी मथुरा नगरी जा कर म्हाने, भूल न ज्याजो जी गोपीजन सब भोली भाली, कपट न जाणे जी चतुर सभी मथुरा की नारी, रींझ न ज्याजो जी बंसी की धुन कान पड्या, घर बार भुला कर जी दौड़ी आई मोहन प्यारा, मिलणें थाँसे जी रोवण […]
Mrig Naini Ko Pran Naval Rasiya
रसिया मृगनैनी को प्रान नवल रसिया, मृगनैनी बड़ि-बड़ि अखिंयन कजरा सोहे, टेढ़ी चितवन मेरे मन बसिया अतलस को याकें लहेंगा सोहे, प्यारी झुमक मेरे मन बसिया छोटी अंगुरिन मुँदरी सोहे, बीच में आरसी मन बसिया बाँह बड़ो बाजूबन्द सोहे, हियरे में हार दीपत छतिया ‘पुरुषोत्तम’ प्रभु की छबि निरखत, सबै छोड़ ब्रज में बसिया रंग […]
Yashumati Nand Nandan Banwari
वन भेजे यशुमति नँद-नंदन बनवारी रूप माधुरी कमल-नयन की, अद्वितीय मनहारी लटकनी चाल, लकुटिया कर में, गौ-वत्स चराने जाये विद्युत-सी दंतावलि दमके, मनमोहन मुस्काये ग्वाल-बाल सँग भोजन करते, वन में आज बिहारी गोलाकार बिराजै बालक, मध्य गोवर्धनधारी छवि देखने देव देवियाँ, तभी गगन में आये रूप माधुरी निरख श्याम की, आनँद नहीं समाये भोजन में […]
Yashoda Nand Gopijan Dukhi Hai
विरह वेदना यशोदा, नन्द, गोपीजन, दुखी है विरह पीड़ा से परम प्यारा सभी का मैं, कहे यो श्याम उद्धव से उधोजी ब्रज में जाकर के, मिले तब नन्द बाबा से कभी गोविंद आयेंगे, यों पूछा नन्द ने उनसे बही तब आँसुओं की धार, यशोदा नन्द नयनों से रुँध गया कण्ठ दोनों का, बोल ना पाय […]
Rang Darat Laj Na Aai
होली रंग डारत लाज न आई, नन्दजी के कुँवर कन्हाई माखन-चोर रसिक मतवारे, गलियन धूम मचाई, गुलचे खाये भूल गये क्यों, करन लगे ठकुराई सखि! वाँको शरम न आई हाथ लकुटिया काँधे कमरिया, बन बन धेनु चराई, जाति अहीर सबहिं जन जानत, करन लगे ठकुराई छलिये जानत लोग लुगाई मात जसोदा ऊखल बाँधे, रोनी सूरति […]
Rachyo Annakut Vidhivat Hai
अन्नकूट रच्यौ अन्नकूट विधिवत् है ब्रज में पाक बनाये गोप गोपियाँ ग्वाल-बाल, मन मोद बढ़ाये मीठे और चरपरे व्यंजन, मन ललचाये गिनती हो नहीं सके, देख सब ही चकराये तुलसी दल की पुष्पमाल गोवर्धन पहने चंदन केशर तो ललाट पे, शोभित गहने मोरपंख का मुकट, गले में तो वनमाला गोवर्धन ये नहीं, किन्तु है नंद […]