Sakhi Sapane Mohan Aaye

ब्रज की स्मृति सखि, सपने में मनमोहन आये बड़े दुखी है मथुरा में वे, कोई तो समझाये टप टप आँसू गिरें नयन से, घूम रहे उपवन में नहीं सँभाल पाते अपने को, व्याकुलता है मन में कहते प्राणेश्वरी राधिके, निश दिन रहूँ उदास लोग भले ही कहें यहाँ सुख, झूठ-मूठ विश्वास तेरे बिना एक पल […]

Sakhi Ye Badbhagi Hai Mor

बड़भागी नंद यशोदा सखी! ये बड़भागी हैं मोर जेहि पंखन को मुकुट बन्यो है धर लियो नंद किशोर बड़ भागी अति नंद यशोदा, पुण्य किये भर जोर शिव विरंचि नारद मुनि ज्ञानी, ठाड़े हैं कर जोर ‘परमानन्द’ दास को ठाकुर, गोपियन के चितचोर  

Sakhi Ri Achraj Ki Yah Baat

अचरज की बात सखी री! अचरज की यह बात निर्गुण ब्रह्म सगुन ह्वै आयौ, बृजमें ताहि नचात पूरन-ब्रह्म अखिल भुवनेश्वर, गति जाकी अज्ञात ते बृज गोप-ग्वाल सँग खेलत, बन-बन धेनु चरात जाकूँ बेद नेति कहि गावैं, भेद न जान्यौ जात सो बृज गोप-बधुन्ह गृह नित ही, चोरी कर दधि खात शिव-ब्रह्मादि, देव, मुनि, नारद, जाकौ […]

Sadashiv Bholenath Kahayen

सदाशिव महिमा सदाशिव भोलेनाथ कहाये आशुतोष भयहारी शम्भो, महिमा ॠषि-मुनि गाये शरणागत जो करे याचना, वह निहाल हो जाये औढरदानी विरुद तिहारो, अन्य देव सकुचाये वर देकर विचित्र संकट में, अपने को उलझाये भस्मासुर बाणासुर से श्री हरि निस्तार कराये तीन नयन, सर्पों की माला, चिता भस्म लपटाये अशुभ वेष धारण तुम कीन्हों, तो भी […]

Sanakadik Devon Ke Purvaj

श्री सनकादि का उपदेश सनकादिक देवों के पूर्वज, ब्रह्माजी के मानस ये पूत मन में जिनके आसक्ति नहीं, वे तेजस्वी प्रज्ञा अकूत है सदुपदेश उनका ये ही ‘धन इन्द्रिय-सुख के हों न दास’ पुरुषार्थ चतुष्टय उपादेय, सद्भाव, चरित का हो विकास विद्या सम कोई दान नहीं, सत् के समान तप और नहीं आसक्ति सदृश न […]

Samarpan Karun Buddhi Bal Mera

भीष्मजी द्वारा स्तवन समर्पण करूँ बुद्धि बल मेरा और न कुछ भी दे पाऊँ प्रभु, जो भी है वह तेरा मेरा मन आबद्ध जगत् में, घट घट के प्रभु वासी दो प्रबोध हे त्रिभुवन-सुन्दर! वृन्दावन के वासी पंकज-नयन, तमाल-वर्ण, आवृत अलकावली मुख पे पीत वसन रवि-किरणों के सम, शोभित श्यामल तन पे अनुपम शोभा कुरुक्षेत्र […]

Sarvatra Bramh Ki Satta Hi

ब्रह्ममय जगत् सर्वत्र ब्रह्म की सत्ता ही यह जगत् जीव के ही सदृश, है अंश ब्रह्म का बात यही माया विशिष्ट हो ब्रह्म जभी, तब वह ईश्वर कहलाता है ईश्वर, निमित्त व उपादान से दृश्य जगत् हो जाता है जिस भाँति बीज में अंकुर है, उस भाँति ब्रह्म में जग भी है सो जीव, सृष्टि, […]

Sarva Pratham Ganapati Ko Puje

श्री गणेश स्तवन सर्वप्रथम गणपति को पूजे, पश्चात् कार्य आरम्भ करें जो सृष्टि के कर्ता-धर्ता, वे विपदाएँ तत्काल हरें गजवदन विनायक एकदन्त जो, प्रगट भये सब हर्ष भरे मुदित हुए पार्वति शिवशंकर, इन्द्र, अप्सरा नृत्य करें वक्रतुण्ड लम्बोदर गणपति, निरख चन्द्रमा हँसी करे शाप दियो तब चन्द्रदेव को, कलाहीन तत्काल करे ॠद्धि-सिद्धि के बीच विराजै, […]