Budhapa Bairi Tu Kyon Kare Takor

वृद्धा अवस्था बुढ़ापा बैरी, तूँ क्यों करे टकोर यौवन में जो साथ रहे, वे स्नेही बने कठोर जीर्ण हो गया अब तन सारा, रोग व दर्द सताते गई शक्ति बोलो कुछ भी तो, ध्यान कोई ना देते चेत चेत रे मनवा अब तो, छोड़ सभी भोगों को राम-कृष्ण का भजन किये बिन, ठोर नहीं हैं […]

Manwa Nahi Vichari Re

पछतावा (राजस्थानी) मनवा नहीं विचारी रे थारी म्हारी करता उमर बीति सारी रे बालपणा में लाड़-लड़ायो, माता थारी रे भर जोबन में लगी लुगाई सबसे प्यारी रे बूढ़ो हुयो समझ में आई, ऊमर हारी रे व्यर्थ बिताई करी एक बस, थारी म्हारी रे मिनख जनम खो दियो, तू जप ले कृष्ण मुरारी रे अन्तकाल थारो […]

Man Main Shubh Sankalp Ho

अभिलाषा मन में शुम संकल्प हों, शुरू करूँ जब काम सर्वप्रथम सुमिरन करूँ, नारायण का नाम मनोवृत्ति वश में रहे, कार्यसिद्धि को पाय ऋद्धि-सिद्धि गणपति सहित, पूजूँ विघ्न न आय नहीं चाहिये जगत् या राज्य स्वर्ग सुख-भोग प्राणिमात्र का दुख हरूँ, सुखी रहें सब लोग सभी रोग से रहित हों, सबका हो कल्याण दीन दुखी […]

Mat Kar Itana Pyar Tu Tan Se

देह से प्रेम मत कर इतना प्यार तू तन से, नहीं रहेगा तेरा बहुत सँवारा इत्र लगाया, और कहे यह मेरा बढ़िया भोजन नित्य कराया, वस्त्रों का अंबार बचपन, यौवन बीत गया तब, उतरा मद का भार पति, पत्नी-बच्चों तक सीमित था तेरा संसार स्वारथ के साथी जिन पर ही, लूटा रहा सब प्यार सब […]

Bhula Raha Hai Tu Youwan Main

नवधा भक्ति भूला रहा तू यौवन में, क्यों नहीं समझता अभिमानी तू राग, द्वेष, सुख, माया में, तल्लीन हो रहा अज्ञानी जो विश्वसृजक करुणासागर की तन्मय होकर भक्ति करे प्रतिपाल वहीं तो भक्तों के, सारे संकट को दूर करें हरि स्मरण कीर्तन, दास्य, सख्य, पूजा और आत्मनिवेदन हो हरि-कथा श्रवण हो, वन्दन हो, अरु संतचरण […]

Bhav Ke Bhukhe Prabhu Hain

भाव के भूखे भाव के भूखे प्रभु हैं, भाव ही तो सार है भाव से उनको भजे जो, उसका बेड़ा पार है वस्त्र भूषण या कि धन हो, सबके दाता तो वही अर्पण करें सर्वस्व उनको, भाव तो सच्चा यही भाव से हम पत्र, जल या पुष्प उनको भेंट दे स्वीकारते उसको प्रभु, भव-निधि से […]

Bhagyanusar Fal Prapta Hame

भाग्यानुसार फल भाग्यानुसार फल प्राप्त हमें भगवान् नियामक कर्मों के, जैसा बोया हो मिले हमें विवेक प्रभु से प्राप्त हमें, हम चाहें जैसा वही करें ये अहंकार व काम क्रोध, जो पाप कर्म में प्रवृत करें प्रभु में तो विषमता जरा नहीं, हम कर्मों का ही फल पायें वे तो कर्मों को देख रहे, शुभ […]

Bhaj Le Pyare Hari Ka Nam

नाम स्मरण भजले प्यारे हरि का नाम, इसमें लगे न कुछ भी दाम कर न बुराई कभी किसी की, जप ले मन से हरि का नाम नयनों से दर्शन हो हरि का, सुनों कान से प्रभु का गान करो तीर्थ सेवन पैरों से, करो हाथ से समुचित दान मन बुद्धि श्रद्धा से प्यारे, होय नित्य […]

Bhagwan Krishna Ke Charno Main

स्तुति भगवान् कृष्ण के चरणों में, मैं करूँ वंदना बारंबार जो प्राणि-मात्र के आश्रय हैं, भक्तों के कष्ट वही हरतें ब्रह्मादि देव के भी स्वामी, मैं करूँ प्रार्थना बारंबार जो आदि अजन्मा भी यद्यपि हैं, पर विविध रूप धारण करते पृथ्वी पर लीलाएँ करते, मैं करूँ स्तवन बारंबार जब संकट से हम घिर जाते, करूणानिधि […]

Bhagvad Gita Sandesh Amar

श्रीमद्भगवद् गीता भगवद्गीता-संदेश अमर उपहार अनूठा करें ग्रहण, जैसे पुष्पों से सार भ्रमर गीताजी ऐसा क्रान्ति ग्रन्थ, मानव का जीवन सार्थक हो जिस पथ पर गये महाजन वो, हम चलें तभी अभ्युदय हो विपरीत परिस्थिति में जब हम, घिर जायँ न सूझे मार्ग हमें भ्रम दूर करें, निर्देश करें, गीताजी का कोई श्लोक हमें हम […]