Pratham Saneh Duhun Man Janyo

राधे श्याम मिलन प्रथम सनेह दुहुँन मन जान्यो सैन-सैन कीनी सब बातें, गुपत प्रीति सिसुता प्रगटान्यो खेलन कबहुँ हमारे आवहु, नंद-सदन ब्रज – गाँउँ द्वारे आइ टेरि मोहि लीजो, कान्ह है मेरो नाउँ जो कहियै घर दूरि तुम्हारो, बोलत सुनियै टेर तुमहिं सौंह वृषभानु बबा की, प्रात-साँझ इक फेर सूधी निपट देखियत तुमकों, तातें करियत […]

Prabhu Tero Vachanbharoso Sancho

भक्त-वत्सलता प्रभु तेरो वचन भरोसो साँचो पोषन भरन विसंभर स्वामी, जो कलपै सो काँचौ जब गजराज ग्राह सौं अटक्यौ, बली बहुत दुख पायौ नाम लेट ताही छन हरिजू, गरुड़हि छाँड़ि छुड़ायौ दुःशासन जब गही द्रौपदी, तब तिहिं वसन बढ़ायौ ‘सूरदास’ प्रभु भक्त बछल हैं, चरन सरन हौं आयौ

Prabhuji Main Picho Kiyo Tumharo

चरणाश्रय प्रभुजी मैं पीछौ कियौ तुम्हारौ तुम तो दीनदयाल कहावत, सकल आपदा टारौ महा कुबुद्धि, कुटिल, अपराधी, औगुन भर लिये भारौ ‘सूर’ क्रूर की यही बीनती, ले चरननि में डारौ

Prabhu More Avgun Chit N Dharo

समदर्शी प्रभु प्रभु मोरे अवगुण चित्त न धरो समदर्शी है नाम तिहारो, चाहो तो पार करो इक लोहा पूजा में राखत, इक घर बधिक परो यह द्विविधा पारस नहिं जानत, कंचन करत खरो इक नदिया इक नार कहावत, मैलो ही नीर भरो जब मिलि के दोउ एक वरण भए, सुरसरि नाम परो एक जीव, एक […]

Prat Kal Uthi Makhan Roti

बालकृष्ण की बान प्रातकाल उठि माखन रोटी, को बिनु माँगे दैहै अब उहि मेरे कुँवर कान्ह को, छिन-छिन गोदी लैहै कहियौ पथिक जाइ, घर आवहु, राम कृष्ण दोउ भैया दोउ बालक कत होत दुखारी, जिनके मो सी मैया ‘सूर’ पथिक सुनि, मोहि रैन-दिन, बढ्यो रहत उर सोच मेरो अलक-लड़ैतो मोहन, करत बहुत संकोच

Bal Mohan Dou Karat Biyaru

बल मोहन बल मोहन दोऊ करत बियारू, जसुमति निरख जाय बलिहारी प्रेम सहित दोऊ सुतन जिमावत, रोहिणी अरु जसुमति महतारी दोउ भैया साथ ही मिल बैठे, पास धरी कंचन की थारी आलस कर कर कोर उठावत, नयनन नींद झपक रही भारी दोउ जननी आलस मुख निरखत, तन मन धन कीन्हों बलिहारी बार बार जमुहात ‘सूर’ […]

Bali Bali Ho Kuwari Radhika

राधा कृष्ण प्रीति बलि बलि हौं कुँवरि राधिका, नन्दसुवन जासों रति मानी वे अति चतुर, तुम चतुर-शिरोमनि, प्रीत करी कैसे रही छानी बेनु धरत हैं, कनक पीतपट, सो तेरे अन्तरगत ठानी वे पुनि श्याम, सहज तुम श्यामा, अम्बर मिस अपने उर आनी पुलकित अंग अवहि ह्वै आयो, निरखि सखी निज देह सयानी ‘सूर’ सुजान सखी […]

Baso Mere Nenan Me Yah Jori

राधा कृष्ण माधुर्य बसौ मेरे नैनन में यह जोरी सुन्दर श्याम कमल – दल – लोचन, सँग वृषभानु किशोरी मोर-मुकुट मकराकृति कुण्डल, पीताम्बर झकझोरी ‘सूरदास’ प्रभु तुम्हरे दरस को, कहा बरनौं मति थोरी

Bichure Syam Bahut Dukh Payo

बिछोह बिछुरे स्याम बहुत दुख पायौ दिन-दिन पीर होति अति गाढ़ी, पल-पल बरष बिहायौ व्याकुल भई सकल ब्रज-वनिता, नैक संदेस न पायो ‘सूरदास’ प्रभु तुम्हरे मिलन कौ, नैनन अति झर लायौ

Biharat Ras Rang Gopal

रास लीला बिहरत रास रंग गोपाल नवल स्यामहि संग सोभित, नवल सब ब्रजबाल सरद निसि अति नवल उज्जवल, नव लता बन धाम परम निर्मल पुलिन जमुना, कलपतरु विश्राम कोस द्वादस रास परिमिति, रच्यो नंदकुमार ‘सूर’ प्रभु सुख दियो निसि रमि, काम कौतुक हार