Karam Gati Tare Nahi Tari
कर्म विपाक करम गति तारे नाहिं टरी मुनि वसिष्ठ से पण्डित ज्ञानी, सोध के लगन धरी सीता हरण, मरण दशरथ को, वन में विपति परी नीच हाथ हरिचन्द बिकाने, बली पताल धरी कोटि गाय नित पुण्य करत नृग, गिरगिट जोनि परी पाण्डव जिनके आप सारथी, तिन पर विपति परी दुर्योधन को गर्व घटायो, जदुकुल नाश […]
Kahe Ko Tan Manjta Re Mati Main Mil Jana Hai
सत्संग महिमा काहे को तन माँजता रे, माटी में मिल जाना है एक दिन दूल्हा साथ बराती, बाजत ढोल निसाना है एक दिन तो स्मशान में सोना, सीधे पग हो जाना है सत्संगत अब से ही करले, नाहिं तो फिर पछताना है कहत ‘कबीर’ सुनो भाई साधो, प्रभु का ध्यान लगाना है
Kuch Lena Na Dena Magan Rahna
आत्मानंद कछु लेना न देना मगन रहना पाँच तत्त्व का बना पींजरा, जामे बोलत मेरी मैना गहरी नदिया नाव पुरानी, केवटिया से मिले रहना तेरा पीया तेरे घट में बसत है, सखी खोल कर देखो नैना कहत ‘कबीर’ सुनो भाई साधो, गुरु-चरण में लिपट रहना
Gunghat Ka Pat Khol Re Toko Peev Milenge
अज्ञान निवृत्ति घूँघट का पट खोल रे, तोहे पिया मिलेंगे घट घट में वह साईं रमता, कटुक वचन मत बोल रे धन जोबन को गरब न कीजे, झूठा पचरंग चोल रे सुन्न महल में दीप जलाले, आसन सों मत डोल रे जाग जुगुत सो रंग-महल में, पिय पायो अनमोल रे कहे ‘कबीर’ अनन्द भयो है, […]
Janam Dhokhe Main Khoy Dayo
मोह माया जनम धोखे में खोय दयो बारह बरस बालपन बीते, बीस में युवा भयो तीन बरस के अंत में जाग्यो, बाढ्यो मोह नयो धन और धाम पुत्र के कारण, निस दिन सोच भयो बरस पचास कमर भई टेढ़ी, सोचत खात लह्यो बरस साठ सत्तर के ऊपर, केस सफ़ेद भयो कहत ‘कबीर’ सुनो भाई साधो, […]
Jivan Ke Din Char Re Man Karo Punya Ke Kam
नाशवान संसार जीवन के दिन चार रे, मन करो पुण्य के काम पानी का सा बुदबुदा, जो धरा आदमी नाम कौल किया था, भजन करूँगा, आन बसाया धाम हाथी छूटा ठाम से रे, लश्कर करी पुकार दसों द्वार तो बन्द है, निकल गया असवार जैसा पानी ओस का, वैसा बस संसार झिलमिल झिलमिल हो रहा, […]
Jiwan Ko Vyartha Ganwaya Hai
चेतावनी जीवन को व्यर्थ गँवाया है मिथ्या माया जाल जगत में, फिर भी क्यों भरमाया है मारी चोंच तो रुई उड़ गई, मन में तूँ पछताया है यह मन बसी मूर्खता कैसी, मोह जाल मन भाया है कहे ‘कबीर’ सुनो भाई साधो, मनुज जन्म जो पाया है
Jiv Bas Ram Nam Japna
हरिनाम स्मरण जीव बस राम नाम जपना, जरा भी मत करना फिकरी भाग लिखी सो हुई रहेगी, भली बुरी सगरी ताप करके हिरणाकुश राजा, वर पायो जबरी लौह लकड़ से मार्यो नाहीं, मर्यौ मौत नख री तीन लोक ककी माता सीता, रावण जाय हरी जब लक्षमण ने करी चढ़ाई, लंका गई बिखरी आठों पहर राम […]
Dar Lage Aur Hansi Aave
कलियुग की रीति डर लागे और हाँसी आवे, गजब जमाना आया रे धन दौलत से भरा खजाना, वैश्या नाच नचाया रे मुट्ठी अन्न जो साधू माँगे, देने में सकुचाया रे कथा होय तहँ श्रोता जावे, वक्ता मूढ़ पचाया रे भाँग, तमाखू, सुलफा, गाँजा, खूब शराब उड़ाया रे उलटी चलन चले दुनियाँ में, ताते जी घबराया […]
Tan Ki Dhan Ki Kon Badhai
अन्त काल तन की धन की कौन बड़ाई, देखत नैनों में माटी मिलाई अपने खातिर महल बनाया, आपहि जाकर जंगल सोया हाड़ जले जैसे लकरि की मोली, बाल जले जैसे घास की पोली कहत ‘ कबीर’ सुनो मेरे गुनिया, आप मरे पिछे डूबी रे दुनिया