Kar Chintan Shri Krishna Ka

श्री राधाकृष्ण कर चिन्तन श्रीकृष्ण का, राधावर का ध्यान अमृत ही अमृत झरे, करुणा-प्रेम निधान जप तप संयम दान व्रत, साधन विविध प्रकार श्रीकृष्ण से प्रेम ही, निगमागम का सार कृष्ण कृष्ण कहते रहो, अमृत-मूरि अनूप श्रुति-शास्त्र का मधुर फल, रसमय भक्ति स्वरूप श्रीराधा की भक्ति में निहित प्यास का रूप आदि अन्त इसमें नहीं, […]

Karahu Prabhu Bhavsagar Se Par

नाम-महिमा करहुँ प्रभु भवसागर से पार कृपा करहु तो पार होत हौं, नहिं बूड़ति मँझधार गहिरो अगम अथाह थाह नहिं, लीजै नाथ उबार हौं अति अधम अनेक जन्म की, तुम प्रभु अधम उधार ‘रूपकुँवरि’ बिन नाम श्याम के, नहिं जग में निस्तार 

Karahu Man Nandnandan Ko Dhyan

प्रबोधन करहुँ मन, नँदनंदन को ध्यान येहि अवसर तोहिं फिर न मिलैगो, मेरो कह्यो अब मान अन्तकाल की राह देख मत, तब न रहेगो भान घूँघरवाली अलकैं मुख पर, कुण्डल झलकत कान मोर-मुकुट अलसाने नैना, झूमत रूप निधान दिव्य स्वरुप हृदय में धरले करहुँ नित्य प्रभु गान

Karo Ab Jaane Ki Taiyari

चेतावनी करो अब जाने की तैयारी साधु संत सम्राट भी जायें, जाते सब संसारी देह तुम्हारी लगी काँपने, अंत काल की बारी ईर्ष्या द्वेष अहं नहीं छूटे, उम्र बिता दी सारी मोह जाल में फँसा रहे मन, वह है व्यक्ति अनारी काम न आये कोई अन्ततः, फिर भी दुनियादारी खाते, चलते सभी समय बस, जपलो […]

Karmo Ka Fal Hi Sukh Dukh Hai

कर्म-फल कर्मों का फल ही सुख दुख है जिसने जैसा हो कर्म किया, उसका फल वह निश्चित पायेगा जो कर्म समर्पित प्रभु को हो, तो वह अक्षय हो जायेगा जो भी ऐसा सत्कर्मी हो, वह उत्तम गति को पायेगा जो व्यक्ति करे निष्काम कर्म, सर्वथा आश्रित प्रभु के ही ऐसे भक्तों का निस्संदेह, उद्धार स्वयं […]

Kaha Karun Vaikuntha Hi Jaaye

ब्रज महिमा कहा कँरू वैकुण्ठ ही जाये जहाँ नहिं नंद जहाँ न जसोदा, जहाँ न गोपी ग्वाल न गायें जहाँ न जल जमुना को निर्मल, जहँ नहिं मिले कदंब की छायें जहाँ न वृन्दावन में मुरली वादन सबका चित्त चुराये ‘परमानंद’ प्रभु चतुर ग्वालिनि, व्रज तज मेरी जाय बलाये 

Kahe Kanhaiya Bada Ho Gaya

गौचारण लीला कहे कन्हैया बड़ा हो गया, सुन जसुमति हर्षाये नेह नीर भर के नयनों में, लाला को समझाये नटखट बालकृष्ण नहीं माने, नन्दराय मुसकाये करा कलेवा ग्वाल-बाल सँग, वन को लाल पठाये लिये लकुटिया हाथ, कामरी कंधे पर लटकाये मोर-मुकुट सिर सोहे, कटि में पीत वसन लहराये पावन अधिक आज वृन्दावन, मुरली मधुर सुनाये […]

Kaliya Nag Par Nratya Kiya

कालिया नाग का उद्धार कालिया-नाग पर नृत्य किया, साँवरिया का यह अभिनय था यमुना जल विष की गर्मी से, दिन रात खौलता रहता था कालिय-दह में हरि कूद गये, निडर हो उसमें खेल रहे भय से मूर्छित सब ग्वाल-बाल, अपनी पीड़ा को किसे कहें जीवन सर्वस्व गोपियों के, उनको कालिय ने जकड़ लिया फिर तो […]

Kahe Ko Soch Kare Manwa Tu

कर्मयोग काहे को सोच करे मनवा तूँ! होनहार सब होता प्यारे मंत्र जाप से शांति मिले पर, विधि -विधान को कैसे टारे कर्म किया हो जैसा तुमने, तदनुसार प्रारब्ध बना है जैसी करनी वैसी भरनी, नियमबद्ध सब कुछ होना है हरिश्चन्द्र, नल, राम, युधिष्ठिर, नाम यशस्वी दुनिया जाने पाया कष्ट गये वो वन में, कर्म-भोग […]

Kahe Re Van Dhoondhan Jaai

अन्तर्यामी काहे रे वन ढूँढन जाई घट घट वासी सदा अलेपा, तोही संग समाई पुष्प मध्य ज्यों गंध बसत है, मुकुर माँहि जस छार्इं तैसे ही हरि बसे निरन्तर, घट घट खोजौ भाई बाहर भीतर एकौ जानौ, ‘नानक’ ज्ञान बताई