Shashwat Sathi Bas Aatma Hi
आत्मानुभूति शाश्वत साथी बस आत्मा ही जन्म से पूर्व, मृत्यु के बाद, रहता जो निरन्तर एक यही वह नहीं छोड़ता कभी हमें, परमात्मा का ही अंश जान परिवार प्रति कर्तव्य व्यक्ति का, इसका भी होए सदा मान रागात्मक भाव नहीं किन्तु, अनुभूति विराग की हो मन में निर्वहन करे दायित्वों का व पालन करे यथा […]
Shastriya Vidhan Se Karma Karen
पाप-निवारण शास्त्रीय विधान से कर्म करे, उन कर्मों को ही कहें धर्म जिनका निषेध है वेदों में, कहलाते सारे वे अधर्म अन्तर्यामी सर्वज्ञ प्रभु, करनी को देख रहे सबकी पापों का प्रायश्चित जो न करे, तो दण्डनीय गति हो उनकी कल्याणकारी हरि के कीर्तन, जो कर पाये पूरे मन से पापों का निवारण हो जाये, […]
Shobhit Shri Vrindavan Dham
श्री वृन्दावन धाम शोभित श्री वृन्दावन धाम यमुनाजी की पावन धारा, क्रीड़ा रत घनश्याम गिरि गोवर्धन पास यहाँ पर, भ्रमण करे गोपाल गौएँ चरतीं, मोर नाचते, मुरली शब्द रसाल मग्न मोर ने पाँख गिराई, सिर पर धरली श्याम राधा रानी के मयूर ने, करी भेंट अभिराम धन्य धन्य अनुपम वृन्दावन, जहाँ गोपियों संग रास रचायो […]
Shyam Tumhara Rup Anutha
अनूठा रूप श्याम तुम्हारा रूप अनूठा, कोटि अनंग लजाये चंचल चितवन कमल-नयन से, प्रेम सरस बरसाये स्निग्ध कपोल अरुणिमा जिनकी, दर्पण सम दमकाये मोर-मुकुट शीश पर शोभित, केश राशि लहराये कमनीय अंग किशोर मूर्ति के, दर्शन मन सरसाये पान करे गोपीजन प्रति पल, फिर भी नहीं अघाये ऐसा अद्भुत ज्योति-पुंज जो, मन का तिमिर भगाये […]
Shyam Dekh Darpan Main Bole
राधिका श्याम सौन्दर्य श्याम देख दर्पण में बोले ‘सुनो राधिका प्यारी आज बताओ मैं सुन्दर या तुम हो सुभगा न्यारी’ असमंजस में पड़ी राधिका, कौन अधिक रुचिकारी ‘हम का कहें कि मैं गोरी पर, तुम तो श्याम बिहारी’ जीत गई वृषभानु-दुलारी, मुग्ध हुए बनवारी भक्तों के सर्वस्व राधिका-श्याम युगल मनहारी
Shyam Main Kaise Darshan Paun
दर्शन की चाह श्याम! मैं कैसे दर्शन पाऊँ दर्शन की उत्कट अभिलाषा और कहीं ना जाऊँ पूजा-विधि भलीभाँति न जानूँ कैसे तुम्हें रिझाऊँ माखन मिश्री का मैं प्रतिदिन, क्या मैं भोग लगाऊँ गोपीजन-सा भाव न मुझमें, कैसे प्रीति बढ़ाऊँ श्री राधा से प्रीति अनूठी, उनके गीत सुनाऊँ तुम्हीं श्याम बतलाओ मुझको, क्या मैं भेंट चढ़ाऊँ […]
Shyam Sundar Mathura Jayen
मथुरा गमन श्याम सुन्दर मथुरा जायें क्रूर बने अक्रूर, प्राणधन को लेने आये बिलख रही है राधारानी, धैर्य बँधाये कोई आने लगीं याद क्रीड़ाएँ, सुध-बुध सबने खोई प्यारी चितवन, मुख मण्डल को, देख गोपियाँ जीतीं संभावित मोहन वियोग से, कैसी उन पर बीती चित्त चुराया नेह लगाया, वही बिछुड़ जब जाये वाम विधाता हुआ सभी […]
Shri Krishna Ka Virah
श्री चैतन्य महाप्रभु श्री कृष्ण का विरह आपको आठों ही प्रहर सताये श्री महाप्रभु चैतन्य वही जो राधा भाव दिखाये राधा कान्ति कलेवर अनुपम, भक्तों के मन भाये रोम रोम में हाव भाव में, गीत कृष्ण के गाये प्रेमावतार महाप्रभु अन्तस में, राधावर छाये ओत प्रोत है कृष्ण-भक्ति से, जन-मन वही लुभाये
Shri Krishna Chandra Madhurati Madhur
श्रीकृष्ण का माधुर्य श्री कृष्णचन्द्र मधुरातिमधुर है अधर मधुर मुख-कमल मधुर, चितवनी मधुर रुचि-वेश मधुर है भृकटि मधुर अरु तिलक मधुर, सिर मुकुट मधुर कच कुटिल मधुर है गमन मधुर अरु नृत्य मधुर, नासिका मधुर नखचन्द्र मधुर है रमण मधुर अरु हरण मधुर, महारास मधुर संगीत मधुर है गोप मधुर, गोपियाँ मधुर, संयोग मधुर उद्गार […]
Shri Krishna Kahte Raho
श्रीकृष्ण-भक्ति श्री कृष्ण कहते रहो, अमृत-मूर्ति अनूप श्रुति शास्त्र का मधुर फल, रसमय भक्ति स्वरूप कर चिन्तन श्रीकृष्ण का, लीलादिक का ध्यान अमृत ही अमृत झरे, करुणा प्रेम-निधान कण-कण में जहाँ व्याप्त है, श्यामा श्याम स्वरूप उस वृन्दावन धाम की, शोभा अमित अनूप जप-तप-संयम, दान, व्रत, साधन विविध प्रकार मुरलीधर से प्रेम ही, निगमाम का […]