Jasoda Kaha Kahon Hon Baat
लाला की करतूत जसोदा! कहा कहों हौं बात तुम्हरे सुत के करतब मोसे, कहत कहे नहिं जात भाजन फोरि, ढोलि सब गोरस, ले माखन-दधि खात जो बरजौं तो आँखि दिखावै, रंचु-नाहिं सकुचात और अटपटी कहलौं बरनौ, छुवत पान सौं गात दास ‘चतुर्भुज’ गिरिधर-गुन हौं, कहति कहति सकुचात
Gokul Me Bajat Aha Badhaai
श्रीकृष्ण प्राकट्य गोकुल में बाजत अहा बधाई भीर भई नन्दजू के द्वारे, अष्ट महासिद्धि आई ब्रह्मादिक रुद्रादिक जाकी, चरण-रेनु नहीं पाई सो ही नन्दजू के पूत कहावत, कौतुक सुन मोरी माई ध्रुव, अमरीष, प्रह्लाद, विभीषण, नित-नित महिमा गाई सो ही हरि ‘परमानँद’ को ठाकुर, ब्रज प्रसन्नता छाई
Aaj Grah Nand Mahar Ke Badhai
जन्मोत्सव आज गृह नंद महर के बधाई प्रात समय मोहन मुख निरखत, कोटि चंद छवि छाई मिलि ब्रज नागरी मंगल गावति, नंद भवन में आई देति असीस, जियो जसुदा-सुत, कोटिन बरस कन्हाई अति आनन्द बढ्यौ गोकुल में, उपमा कही न जाई ‘सूरदास’ छवि नंद की घरनी, देखत नैन सिराई
Aaj Sakhi Nandnandan Pragate
श्रीकृष्ण प्राकट्य आजु सखी, नँद-नंदन प्रगटे, गोकुल बजत बधाई री कृष्णपक्ष की अष्टमी भादौ, योग लग्न घड़ी आई री गृह-गृह ते सब बनिता आई, गावत गीत बधाई री जो जैसे तैसे उठि धाई, आनन्द उर न समाई री चौवा चन्दन और अरगजा, दधि की कीच मचाई री बन्दीजन सुर नर गुन गावें, शोभा बरनि न […]
Aaj Braj Main Chayo Anand
श्रीकृष्ण प्राकट्य आज व्रज में छायो आनन्द नंद महर घर ढोटा आयो, पूरण परमानंद विविध भाँति बाजे बाजत हैं, वेद पढ़त द्विज-वृंद छिरकत दूध दही घृत माखन, मोहन-मुख अरविन्द देत दान ब्रजराज मगन मन, फूलत नाहिं समाय देते असीस सबहिं जन ब्रज के, बार-बार बलि जाय
Avatarit Hue Bhagwan Krishna
श्रीकृष्ण प्राकट्य अवतरित हुए भगवान कृष्ण, पृथ्वी पर मंगल छाया है बज गई स्वर्ग की दुन्दुभियाँ,चहुँ दिशि आनन्द समाया है था गदा, चक्र अरु कमल, शंख, हाथों में शोभित बालक के श्रीवत्स चिन्ह वक्षःस्थल पे, कटि में भी पीताम्बर झलके वसुदेव देवकी समझ गये, यह परमपुरुष पुरुषोत्तम है जो पुत्र रूप में प्राप्त हुआ, साक्षात् […]
Nand Ghar Aaj Bhayo Anand
श्री कृष्ण प्राकट्य नन्द घर आज भयो आनन्द मातु यशोदा लाला जायो, ज्यों पूनों ने चन्द गोपी गोप गाय गायक-गन, सब हिय सरसिज वृन्द नन्दनँदन रवि उदित भये हिय, विकसे पंकज वृन्द वसुधा मुदित समीर बहत वर, शीतल मन्द सुगन्ध गरजत मन्द मन्द घन नभ महँ, प्रकटे आनँद कन्द माया बन्धु सिन्धु सब सुख के, […]
Jasumati Man Abhilash Kare
माँ की अभिलाषा जसुमति मन अभिलाष करे कब मेरो लाल घुटुरूअन रैंगे, कब धरती पग धरै कब द्वै दाँत दूध के देखौ, कब तोतरे मुख वचन झरै कब नंद ही बाबा कहि बोले, कब जननी कहि मोहि ररै ‘सूरदास’ यही भाँति मैया , नित ही सोच विचार करै
Khelan Ko Hari Duri Gayo Ri
यशोदा की चिन्ता खेलन कौं हरि दूरि गयौ री संग-संग धावत डोलत हैं, कह धौं बहुत अबेर भयौ री पलक ओट भावत नहिं मोकौं, कहा कहौं तोहि बात नंदहिं तात-तात कहि बोलत, मोहि कहत है मात इतनो कहत स्याम-घन आये, ग्वाल सखा सब चीन्हे दौरि जाइ उर लाइ ‘सूर’ प्रभु, हरषि जसोदा लीन्हे
Khijat Jat Makhan Khat
बाल-माधुर्य खीजत जात माखन खात अरुण लोचन भौंह टेढ़ी, बार-बार जँभात कबहुँ रुनझुन चलत घुटुरुनि, छुटि धूसर गात कबहुँ झुकि के अलक खैंचत, नैन जल भरि जात कबहुँ तोतरे बोल बोलत, कबहुँ बोलत तात ‘सूर’ हरि की निरखि सोभा, पलक तजत न जात