Braj Me Aaj Sakhi Dekhyo Ri Tona
श्याम का जादू ब्रज में आज सखी देख्यो री टोना ले मटकी सिर चली गुजरिया, आगे मिले बाबा नंद का छोना दधि को नाम बिसरि गयो प्यारी, ले लेहुरी कोउ स्याम सलोना वृन्दावन की कुंज गलिन में, आँख लगाय गयो मन-मोहना ‘मीराँ’ के प्रभु गिरिधर नागर, सुन्दर श्याम सुधर रस लोना
Braj Main Kaisi Hori Machai
होली ब्रज में कैसी होरी मचाई, करत परस्पर रोरी नंदकुँवर बरसाने आये, खेलन के मिस होरी बाँह पकड़ एक ग्वालिन की वे, बहुत ही करै चिरौरी अब तो बहियाँ छोड़ो प्यारे, देखत हमें किसोरी अधिक अधीर राधिका आई, जानत श्याम ठगोरी होली खेलत राधा मोहन, गलियन रंग बह्योरी लाल भयो कटिपट मोहन को, लाल राधिका […]
Braj Main Ghar Ghar Bajat Badhai
श्री राधा प्राकट्य ब्रिज में घर घर बजत बधाई अतिशय रूप निरख कन्या का माँ कीरति है हर्षाई सकल लोक की सुंदरता, वृषभानु गोप के आई जाको जस सुर मुनी सब कोई, भुवन चतुर्दश गाई नवल-किशोरी गुन निधि श्यामा, कमला भी ललचाई प्रगटे पुरुषोत्तम श्री राधा द्वै विधि रूप बनाई
Braj Ko Bacha Lo Mohan
गोवर्धन लीला ब्रज को बचा लो मोहन, रक्षा करो हमारी हो कु्रद्ध शची के पति ने, वर्षा करी है भारी आँधी भी चल रही है, ओले बरस रहे हैं पानी से भर गया ब्रज, सब कष्ट से घिरे हैं गिरिराज को उखाड़ा, ले हाथ पर हरि ने उसको उठाये रक्खा, दिन सात तक उन्होंने ब्रज […]
Braj Ke Birahi Log Bichare
वियोग ब्रज के बिरही लोग बिचारे बिन गोपाल ठगे से ठाढ़े, अति दुरबल तनु हारे मात जसोदा पंथ निहारति, निरखति साँझ सकारे सबही कान्ह कान्ह कहि बोलत, अँखियन बहत पनारे यह मथुरा काजर की रेखा, जे निकसे ते कारे ‘परमानंद’ स्वामी बिन ऐसे, ज्यों चंदा बिनु तारे
Tha Magh Mas Braj Balayen
चीर हरण था माघ मास ब्रज बालाएँ, यमुना जल में सब स्नान करें होता था ऊषाकाल जभी, श्रीकृष्ण चरित गुणगान करें जल क्रीडा में थी मग्न सभी, तत्काल श्याम वहाँ पहुँच गये अभिलाषा जो उनके मन में, सर्वेश्वर उसको जान गये ले वस्त्र उठा बालाओं के, वे तरु कदम्ब पर चढ़े तभी वे बोले सुन्दरियों […]
Aaj Braj Main Chayo Anand
श्रीकृष्ण प्राकट्य आज व्रज में छायो आनन्द नंद महर घर ढोटा आयो, पूरण परमानंद विविध भाँति बाजे बाजत हैं, वेद पढ़त द्विज-वृंद छिरकत दूध दही घृत माखन, मोहन-मुख अरविन्द देत दान ब्रजराज मगन मन, फूलत नाहिं समाय देते असीस सबहिं जन ब्रज के, बार-बार बलि जाय
Udho Braj Ki Yad Satave
ब्रज की याद ऊधो! ब्रज की याद सतावै जसुमति मैया कर कमलन की, माखन रोटी भावै बालपने के सखा ग्वाल, बाल सब भोरे भारे सब कुछ छोड़ मोहिं सुख दीन्हौ, कैसे जाय बिसारे ब्रज-जुवतिन की प्रीति -रीति की, कहा कहौं मैं बात लोक-वेद की तज मरजादा, मो हित नित ललचात आराधिका, नित्य आराध्या, राधा को […]
Ya Braj Me Kachu Dekho Ri Tona
मुग्धा या वृज में कछु देखोरी टोना ले मटुकी गिर चली गुजरिया, आय मिले बाबा नंद को छोना दधि की पांग बिसरि गई प्यारी, लीजो रीं कोई श्याम सलौना बृन्दावन की कुंज गलिन में, आँख लगायो री मन-मोहना ‘मीराँ’ के प्रभु गिरिधर नागर, सुन्दर श्याम सुघर रस लोना
Braj Main Kanha Dhum Machai
होली ब्रज में कान्हा धूम मचाई, ऐसी होरी रमाई इतते आई सुघड़ राधिका, उतते कुँवर कन्हाई हिलमिल के दोऊ फाग रमत है, सब सखियाँ ललचाई, मिलकर सोर मचाई राधेजी सैन दई सखियन के, झुंड-झुंड झट आई रपट झपट कर श्याम सुन्दर कूँ, बैयाँ पकड़ ले जाई, लालजी ने नाच नचाई मुरली पीताम्बर छीन लियो है, […]