Anurag Gopiyon Jaisa Ho
गोपियों की प्रीति अनुराग गोपियों जैसा हो श्रीकृष्ण प्रेम का मूर्तिमान, विग्रह है श्री राधाजी ही महाभाव रूप उनका पावन,राधारानी का प्रेम वही श्री राधा का उद्देश्य यही, बस सुख पहुँचाएँ प्यारे को वे करते प्रेम प्रियाजी से, यह श्रेय श्री कृष्ण बड़प्पन को जीवन में जो कुछ सुख दुख है, हम स्वीकारें सहर्ष उसे […]
Ho Ji Hari Kit Gaye Neha Lagay
विरह व्यथा हो जी हरि!कित गए नेहा लगाय नेह लगाय मेरो मन हर लियो, रस-भरी टेर सुनाय मेरे मन में ऐसी आवै, प्राण तजूँ विष खाय छाँड़ि गए बिसवासघात करि, नेह की नाव चढ़ाय ‘मीराँ’ के प्रभु कब रे मिलोगे, रहे मधुपुरी छाय
Sakhi Meri Nind Nasani Ho
विरह व्यथा सखी, मेरी नींद नसानी हो पिव को पंथ निहारत सिगरी, रैण बिहानी हो सखियन मिल कर सीख दई मन, एक न मानी हो बिन देख्याँ कल नाहिं पड़त, जिय ऐसी ठानी हो अंग-अंग व्याकुल भये मुख ते, पिय पिय बानी हो अंतर-व्यथा विरह की कोई, पीर न जानी हो चातक जैहि विधि रटे […]
Ho Ik Nai Bat Suni Aai
श्री राधा प्राकट्य हौं इक नई बात सुनि आई कीरति रानी कुँवरी जाई, घर-घर बजत बधाई द्वारे भीर गोप-गोपिन की, महिमा बरनि न जाई अति आनंद होत बरसाने, रतन-भूमि निधि छाई नाचत तरुन वृद्ध अरु बालक, गोरस-कीच मचाई ‘सूरदास’ स्वामिनि सुखदायिनि, मोहन-सुख हित आई
Mohan Jagi Ho Bali Gai
प्रभाती मोहन जागि, हौं बलि गई तेरे कारन श्याम सुन्दर, नई मुरली लई ग्वाल बाल सब द्वार ठाड़े, बेर बन की भई गय्यन के सब बन्ध छूटे, डगर बन कौं गई पीत पट कर दूर मुख तें, छाँड़ि दै अलसई अति अनन्दित होत जसुमति, देखि द्युति नित नई जगे जंगम जीव पशु खग, और ब्रज […]
Mohan Lalpalne Jhule Jasumati Mat Jhulave Ho
झूला मोहनलाल पालने झूलैं, जसुमति मात झुलावे हो निरिख निरखि मुख कमल नैन को, बाल चरित जस गावे हो कबहुँक सुरँग खिलौना ले ले, नाना भाँति खिलाये हो चुटकी दे दे लाड़ लड़ावै, अरु करताल बजाये हो पुत्र सनेह चुचात पयोधर, आनँद उर न समाये हो चिरजीवौ सुत नंद महर को, ‘सूरदास’ हर्षाये हो
Mohi Taj Kahan Jat Ho Pyare
हृदयेश्वर श्याम मोहि तज कहाँ जात हो प्यारे हृदय-कुंज में आय के बैठो, जल तरंगवत होत न न्यारे तुम हो प्राण जीवन धन मेरे, तन-मन-धन सब तुम पर वारे छिपे कहाँ हो जा मनमोहन, श्रवण, नयन, मन संग तुम्हारे ‘सूर’ स्याम अब मिलेही बनेगी, तुम सरबस हो कान्ह हमारे
Main Apani Sab Gai Chare Ho
गौ चारण लीला मैं अपनी सब गाइ चरैहौं प्रात होत बल के संग जैहौं, तेरे कहे न रैहौं ग्वाल-बाल गाइनि के भीतर, नेकहु डर नहिं लागत आजु न सोवौं, नंद-दुहाई, रैनि रहौंगो जागत और ग्वाल सब गाइ चरैहैं, मैं घर बैठौ रैहौं ‘सूर’ श्याम, तुम सोइ रहो अब, प्रात जान मैं दैहौं
Bali Bali Ho Kuwari Radhika
राधा कृष्ण प्रीति बलि बलि हौं कुँवरि राधिका, नन्दसुवन जासों रति मानी वे अति चतुर, तुम चतुर-शिरोमनि, प्रीत करी कैसे रही छानी बेनु धरत हैं, कनक पीतपट, सो तेरे अन्तरगत ठानी वे पुनि श्याम, सहज तुम श्यामा, अम्बर मिस अपने उर आनी पुलकित अंग अवहि ह्वै आयो, निरखि सखी निज देह सयानी ‘सूर’ सुजान सखी […]
Tu Dayalu Din Ho Tu Dani Ho Bhikhari
शरणागति तू दयालु, दीन हौं, तू दानि, हौं भिखारी हौं प्रसिद्ध पातकी, तू पाप – पुंज – हारी नाथ तू अनाथ को, अनाथ कौन मोसो मो समान आरत नहिं, आरतहर तोसो ब्रह्म तू, हौं जीव, तू ठाकुर, हौं चेरो तात, मात, गुरु, सखा तू, सब बिधि हितू मेरो तोहि मोहिं नाते अनेक, मानियै जो भावै […]