Jankinath Sahay Kare Tab
रामाश्रय जानकीनाथ सहाय करे, तब कौन बिगाड़ सके नर तेरो सूरज, मंगल, सोम, भृगुसुत, बुध और गुरु वरदायक तेरो राहु केतु की नाहिं गम्यता, तुला शनीचर होय है चेरो दुष्ट दुशासन निबल द्रौपदी, चीर उतारण मंत्र विचारो जाकी सहाय करी यदुनन्दन, बढ़ गयो चीरको भाग घनेरो गर्भकाल परीक्षित राख्यो, अश्वत्थामा को अस्त्र निवार्यो भारत में […]
Jo Nishchal Bhakti Kare
शिव आराधना जो निश्छल भक्ति करे उसको, भोले शम्भू अपना लेते वे धारण करें रजोगुण को, और सृष्टि की रचना करते होकर के युक्त सत्त्वगुण से, वे ही धारण पोषण करते माया त्रिगुणों से परे प्रभु, शुद्ध स्वरूप स्थित होते ब्रह्मा, विष्णु, अरु, रुद्र, रूप, सृष्टि, पालन,लय वहीं करें हैं पूर्ण ब्रह्म प्रभु आशुतोष, अपराध […]
Kahe Ko Soch Kare Manwa Tu
कर्मयोग काहे को सोच करे मनवा तूँ! होनहार सब होता प्यारे मंत्र जाप से शांति मिले पर, विधि -विधान को कैसे टारे कर्म किया हो जैसा तुमने, तदनुसार प्रारब्ध बना है जैसी करनी वैसी भरनी, नियमबद्ध सब कुछ होना है हरिश्चन्द्र, नल, राम, युधिष्ठिर, नाम यशस्वी दुनिया जाने पाया कष्ट गये वो वन में, कर्म-भोग […]
Aasakti Jagat Ki Nashta Kare
सत्संग की महिमा आसक्ति जगत् की नष्ट करें, खुल जाता है मुक्ति का द्वार स्वाध्याय, सांख्य व योग, त्याग, प्रभु को प्रसन्न उतने न करें व्रत, यज्ञ, वेद या तीर्थाटन, यम, नियम, प्रभु को वश न करें तीनों युग में सत्संग सुलभ, जो करे प्रेम से नर नारी यह साधन श्रेष्ठ सुगम निश्चित, दे पूर्ण […]
Abhiman Vyakti Ka Patan Kare
अभिमान अभिमान व्यक्ति का पतन करे धन, बुद्धि, विद्या, पद का हो, अभिमान व्यक्ति का ज्ञान हरे अपमान करे कोई का जो, वह बीज द्वेष का बोता है परमात्म तत्त्व ही आत्मा तो, आत्मा का अनादर होता है हम क्षमा मैत्री का भाव रखें, हम अहंकार से दूर रहें सन्मति से शत्रु मित्र बने, हो […]
Apurva Nratya Hanuman Kare
मारुति-सुत का नृत्य अपूर्व नृत्य हनुमान करें है दिव्य देह, सिन्दूर लेप, करताल करो में चित्त हरें आनन्दित मुख की श्रेष्ठ छटा, श्रीराम नाम का गान करें चरणों में मोहक घुँघरू, दो नयनों से प्रेमाश्रु झरें कटि में शोभित है रक्ताम्बर, अंजनी-सुत हम पर कृपा करें
Satsang Kare Jo Jivan Main
शिव स्तवन सत्संग करे जो जीवन में, हो जाये बेड़ा पार काशी जाये मधुरा जाये, चाहे न्हाय हरिद्वार चार धाम यात्रा कर आये, मन में रहा विकार बिन सत्संग ज्ञान नहीं उपजे, हो चाहे यत्न हजार ‘ब्रह्मानंद’ मिले जो सदगुरु, हो अवश्य उद्धार
Dhuri Dhusrit Nil Kutil Kach Kare Kare
अन्तर्धान लीला धुरि धूसरित नील कुटिल कच, कारे कारे मुखपै बिथुरे मधुर लगें, मनकूँ अति प्यारे झोटा खात बुलाक, मोर को मुकुट मनोहर ऐसो वेष बनाइ जाउ जब, बन तुम गिरिधर तब पल-पल युग-युग सरिस, बीतत बिनु देखे तुम्हें अब निशिमहँ बन छाँड़ि तुम, छिपे छबीले छलि हमें
Shyam Bina Yah Koun Kare
श्याम की मोहिनी स्याम बिना यह कौन करै चित वहिं तै मोहिनी लगावै, नैक हँसनि पै मनहि हरै रोकि रह्यौ प्रातहिं गहि मारग, गिन करि के दधि दान लियौ तन की सुधि तबहीं तैं भूली, कछु कहि के दधि लूट लियौ मन के करत मनोरथ पूरन, चतुर नारि इहि भाँति कहैं ‘सूर’ स्याम मन हर्यौ […]
Jasumati Man Abhilash Kare
माँ की अभिलाषा जसुमति मन अभिलाष करे कब मेरो लाल घुटुरूअन रैंगे, कब धरती पग धरै कब द्वै दाँत दूध के देखौ, कब तोतरे मुख वचन झरै कब नंद ही बाबा कहि बोले, कब जननी कहि मोहि ररै ‘सूरदास’ यही भाँति मैया , नित ही सोच विचार करै