Sarva Pratham Ganapati Ko Puje
श्री गणेश स्तवन सर्वप्रथम गणपति को पूजे, पश्चात् कार्य आरम्भ करें जो सृष्टि के कर्ता-धर्ता, वे विपदाएँ तत्काल हरें गजवदन विनायक एकदन्त जो, प्रगट भये सब हर्ष भरे मुदित हुए पार्वति शिवशंकर, इन्द्र, अप्सरा नृत्य करें वक्रतुण्ड लम्बोदर गणपति, निरख चन्द्रमा हँसी करे शाप दियो तब चन्द्रदेव को, कलाहीन तत्काल करे ॠद्धि-सिद्धि के बीच विराजै, […]
Nato Nam Ko Mosu Tanak Na Todyo Jay
गाढ़ी प्रीति नातो नाम को मोसूँ, तनक न तोड्यो जाय पानाँ ज्यूँ पीली पड़ी रे, लोग कहै पिंड रोग छाने लँघन मैं कियो रे, श्याम मिलण के जोग बाबुल वैद बुलाइया रे, पकड़ दिखाई म्हाँरी बाँह मूरख वैद मरम नहि जाणे, दरद कलेजे माँह जाओ वैद घर आपणे रे, म्हाँरो नाम न लेय ‘मीराँ’ तो […]
Kali Nam Kam Taru Ram Ko
राम स्मरण कलि नाम कामतरु राम को दलनिहार दारिद दुकाल दुख, दोष घोर धन धाम को नाम लेत दाहिनों होत मन वाम विधाता वाम को कहत मुनीस महेस महातम, उलटे सूधे नाम को भलो लोक – परलोक तासु जाके बल ललित – ललाम को ‘तुलसी’ जग जानियत नामते, सोच न कूच मुकाम को
Man Madhav Ko Neku Niharhi
हरि पद प्रीति मन माधव को नेकु निहारहि सुनु सठ, सदा रंक के धन ज्यों, छिन छिन प्रभुहिं सँभारहि सोभा-सील ज्ञान-गुन-मंदिर, सुन्दर परम उदारहि रंजन संत, अखिल अघ गंजन, भंजन विषय विकारहि जो बिनु जोग जग्य व्रत, संयम, गयो चहै भव पारहि तो जनि ‘तुलसिदास’ निसि वासर, हरिपद कमल बिसारहि
Rajan Ram Lakhan Ko Dije
विश्वामित्र की याचना राजन! राम-लखन को दीजै जस रावरो, लाभ बालक को, मुनि सनाथ सब कीजै डरपत हौं, साँचे सनेह बस, सुत प्रभाव बिनु जाने पूछो नाम देव अरु कुलगुरु, तुम भी परम सयाने रिपु दल दलि, मख राखि कुसल अति, अल्प दिननि घर ऐंहैं ‘तुलसिदास’ रघुवंस तिलक की, कविकुल कीरति गेहैं
Kaha Sukh Braj Ko So Sansar
ब्रज-महिमा कहाँ सुख ब्रज कौ सौ संसार कहाँ सुखद बंसी-वट जमुना, यह मन सदा विचार कहाँ बन धाम कहाँ राधा सँग, कहाँ संग ब्रज वाम कहाँ विरह सुख बिन गोपिन सँग, ‘सूर’ स्याम मन साम
Kaha Pardesi Ko Patiyaro
वियोग कहापरदेसी कौ पतियारौ प्रीति बढ़ाई चले मधुबन कौ, बिछुरि दियौ दुख भारौ ज्यों जल-हीन मीन तरफत त्यौं, व्याकुल प्राण हमारौ ‘सूरदास’ प्रभु गति या ब्रज की, दीपक बिनु अँधियारौ
Khelan Ko Hari Duri Gayo Ri
यशोदा की चिन्ता खेलन कौं हरि दूरि गयौ री संग-संग धावत डोलत हैं, कह धौं बहुत अबेर भयौ री पलक ओट भावत नहिं मोकौं, कहा कहौं तोहि बात नंदहिं तात-तात कहि बोलत, मोहि कहत है मात इतनो कहत स्याम-घन आये, ग्वाल सखा सब चीन्हे दौरि जाइ उर लाइ ‘सूर’ प्रभु, हरषि जसोदा लीन्हे
Chadi Man Hari Vimukhan Ko Sang
प्रबोधन छाड़ि मन, हरि-विमुखन को संग जिनके संग कुमति उपजत है, परत भजन में भंग कहा होत पय-पान कराए, विष नहिं तजत भुजंग कागहिं कहा कपूर चुगाए, स्वान न्हवाए गंग खर कौं कहा अरगजा-लेपन मरकट भूषन अंग गज कौं कहा सरित अन्हवाए, बधुरि धरै वह ढंग पाहन पतित बान नहिं बेधत, रीतो करत निषंग ‘सूरदास’ […]
Jag Me Jiwat Hi Ko Nato
मोह माया जग में जीवत ही को नातो मन बिछुरे तन छार होइगो, कोउ न बात पुछातो मैं मेरो कबहूँ नहिं कीजै, कीजै पंच-सुहातो विषयासक्त रहत निसि –वासर, सुख सियारो दुःख तातो साँच झूँट करि माया जोरी, आपन रूखौ खातो ‘सूरदास’ कछु थिर नहिं रहई, जो आयो सो जातो