Jamuna Tat Dekhe Nand Nandan

गोपी का प्रेम जमुना तट देखे नंद-नन्दन मोर-मुकुट मकराकृति कुण्डल, पीत वसन, तन चन्दन लोचन तृप्त भए दरसन ते, उर की तपन बुझानी प्रेम मगन तब भई ग्वालिनी, सब तन दसा हिरानी कमल-नैन तट पे रहे ठाड़े, सकुचि मिली ब्रज-नारी ‘सूरदास’ प्रभु अंतरजामी, व्रत पूरन वपु धारी

Jagahu Jagahu Nand Kumar

प्रभाती जागहु जागहु नंद-कुमार रवि बहु चढ्यो रैन सब निघटी, उचटे सकल किवार ग्वाल-बाल सब खड़े द्वार पै, उठ मेरे प्रानअधार घर घर गोपी दही बिलोवै, कर कंकन झंकार साँझ दुहां तुम कह्यो गाईकौं, तामें होति अबार ‘सूरदास’ प्रभु उठे तुरत ही, लीला अगम अपार

Jewat Kanh Nand Ik Thore

भोजन माधुरी जेंवत कान्ह नन्द इक ठौरे कछुक खात लपटात दोउ कर, बाल केलि अति भोरे बरा कौर मेलत मुख भीतर, मिरिच दसन टकटौरे तीछन लगी नैन भरि आए, रोवत बाहर दौरे फूँकति बदन रोहिनी ठाड़ी, लिए लगाइ अँकोरे ‘सूर’ स्याम को मधुर कौर दे, कीन्हे तात निहोरे

Jewat Kanh Nand Ju Ki Kaniya

बालकृष्ण को जिमाना जेंवत कान्ह नन्दजू की कनियाँ कछुक खात कछु धरनि गिरावत, छबि निरखत नँद–रनियाँ बरी, बरा, बेसन बहु भाँतिन, व्यंजन विविध अँगनियाँ आपुन खात नंद-मुख नावत, यह सुख कहत न बनियाँ आपुन खात खवावत ग्वालन, कर माखन दधि दोनियाँ सद माखन मिश्री मिश्रित कर, मुख नावत छबि धनियाँ जो सुख महर जसोदा बिलसति, […]

Dekho Ri Nand Nandan Aawat

श्री चरण देखौ री नँदनंदन आवत वृन्दावन तैं धेनु-वृंद बिच, बेनु अधर धर गावत तन घनश्याम कमल-दल-लोचन, अंग-अंग छबि पावत कारी-गोरी, धौरी-धूमरि, लै लै नाम बुलावत बाल गोपाल संग सब सोभित, मिलि कर-पत्र बजावत ‘सूरदास’ मुख निरखत ही मुख, गोपी-प्रेम बढ़ावत

Dhanya Nand Dhani Jasumati Rani

धन्य नन्द-यशोदा धन्य नन्द, धनि जसुमति रानी धन्य ग्वाल गोपी जु खिलाए, गोदहि सारंगपानी धन्य व्रजभूमि धन्य वृन्दावन, जहँ अविनासी आए धनि धनि ‘सूर’ आह हमहूँ जो, तुम सब देख न पाए

Aaj Grah Nand Mahar Ke Badhai

जन्मोत्सव आज गृह नंद महर के बधाई प्रात समय मोहन मुख निरखत, कोटि चंद छवि छाई मिलि ब्रज नागरी मंगल गावति, नंद भवन में आई देति असीस, जियो जसुदा-सुत, कोटिन बरस कन्हाई अति आनन्द बढ्यौ गोकुल में, उपमा कही न जाई ‘सूरदास’ छवि नंद की घरनी, देखत नैन सिराई

Nand Gharni Sut Bhalo Padhayo

बाल क्रीड़ा नंद-घरनि! सुत भलौ पढ़ायौ ब्रज-बीथिनि पुर-गलिनि, घरै घर, घात-बाट सब सोर मचायौ लरिकनि मारि भजत काहू के, काहू कौ दधि –दूध लुटायौ काहू कैं घर में छिपि जाये, मैं ज्यों-त्यों करि पकरन पायौ अब तौ इन्हें जकरि के बाँधौ, इहिं सब तुम्हरौ गाँव भगायौ ‘सूर’ श्याम-भुज गहि नँदरानी, बहुरि कान्ह ने खेल रचायौ

Nand Dham Khelat Hari Dolat

बाल क्रीड़ा नन्द –धाम खेलत हरि डोलत जसुमति करति रसोई भीतर, आपुन किलकत बोलत टेरि उठी जसुमति मोहन कौं, आवहु काहैं न धाइ बैन सुनत माता पहिचानी, चले घुटुरुवनि पाइ लै उठाइ अंचल गहि पोंछै, धूरि भरी सब देह ‘सोर्दास’ जसुमति रज झारति, कहाँ भरी यह खेह

Sabhi Taj Bhajiye Nand Kumar

श्री कृष्ण स्मरण सभी तज भजिये नंदकुमार और भजें ते काम सरे नहिं, मिटे न भव जंजार यह जिय जानि, इहीं छिन भजि, दिन बीते जात असार ‘सूरदास’ औसर मत चूकै, पाये न बारम्बार