Sune Ri Maine Nirbal Ke Balram
शरणागति सुने री मैंने निरबल के बल राम पिछली साख भरूँ संतन की, आइ सँवारे काम जब लगि गज बल अपनो बरत्यो, नेक सर्यो नहिं काम निरबल ह्वै हरि नाम पुकार्यो, आये आधे नाम द्रुपद-सुता निरबल भई ता दिन, तजि आये निज धाम दुःशासन की भुजा थकित भई, बसन रूप भये स्याम अप-बल, तप-बल और […]
Nirbal Ke Pran Pukar Rahe Jagdish Hare
जगदीश स्तवननिर्बल के प्राण पुकार रहे, जगदीश हरे जगदीश हरेसाँसों के स्वर झंकार रहे, जगदीश हरे जगदीश हरेआकाश हिमालय सागर में, पृथ्वी पाताल चराचर मेंये शब्द मधुर गुंजार रहे, जगदीश हरे जगदीश हरेजब दयादृष्टि हो जाती है, जलती खेती हरियाती हैइस आस पे जन उच्चार रहे, जगदीश हरे जगदीश हरेतुम हो करुणा के धाम सदा, […]