Re Man Krishna Nam Jap Le

श्री कृष्ण स्मरण रे मन कृष्ण नाम जप ले भटक रहा क्यों इधर उधर तू, कान्ह शरण गह ले जनम मरण का चक्कर इससे, क्यों न मुक्त हो जाये यह संसार स्वप्न के जैसा, फिर भी क्यों भरमाये जिनको तू अपना है कहता, कोई भी नहीं तेरा मनमोहन को हृदय बिठाले, चला चली जग फेरा

Jivan Ke Din Char Re Man Karo Punya Ke Kam

नाशवान संसार जीवन के दिन चार रे, मन करो पुण्य के काम पानी का सा बुदबुदा, जो धरा आदमी नाम कौल किया था, भजन करूँगा, आन बसाया धाम हाथी छूटा ठाम से रे, लश्कर करी पुकार दसों द्वार तो बन्द है, निकल गया असवार जैसा पानी ओस का, वैसा बस संसार झिलमिल झिलमिल हो रहा, […]

Pani Main Min Piyasi Re

आत्म ज्ञान पानी में मीन पियासी रे, मोहे सुन-सुन आवे हाँसी रे जल थल सागर पूर रहा है, भटकत फिरे उदासी रे आतम ज्ञान बिना नर भटके, कोऊ मथुरा, कोई कासी रे गंगा और गोदावरी न्हाये, ज्ञान बिना सब नासी रे कहत ‘कबीर’ सुनो भाई साधो, सहज मिले अविनासी रे

Bhajo Re Bhaiya Ram Govind Hari

हरि कीर्तन भजो रे भैया राम गोविन्द हरी जप तप साधन कछु नहिं लागत, खरचत नहिं गठरी संतति संपति सुख के कारण, जासे भूल परी कहत ‘कबीर’ राम नहिं जा मुख, ता मुख धुल भरी

Mat Kar Moh Tu Hari Bhajan Ko Man Re

भजन महिमा मत कर मोह तू, हरि-भजन को मान रे नयन दिये दरसन करने को, श्रवण दिये सुन ज्ञान रे वदन दिया हरि गुण गाने को, हाथ दिये कर दान रे कहत ‘कबीर’ सुनो भाई साधो, कंचन निपजत खान रे

Man Fula Fula Fire Jagat Main Kaisa Nata Re

असार संसार मन फूला-फूला फिरे जगत में कैसा नाता रे मात कहै यह पुत्र हमारा, बहन कहै वीर मेरा रे भाई कहै यह भुजा हमारी, नारी कहै नर मेरा रे पेट पकड़ के माता रोवे, बाँह पकड़ के भाई रे लपटि झपटि के तिरिया रोवे, हंस अकेला जाई रे चार गजी चादर मँगवाई, चढ़ा काठ […]

Moko Kahan Dhundhe Re Bande

आत्मज्ञान मोको कहाँ ढूँढे रे बन्दे, मैं तो तेरे पास में ना मंदिर में ना मस्जिद में, ना पर्वत के वास में ना जप ताप में, ना ही योग में, ना मैं व्रत उपवास में कर्म काण्ड में मैं नहीं रहता, ना ही मैं सन्यास में खोज होय साँची मिल जाऊँ, इक पल की ही […]

Kou Re Jaiyo Madhupuri Aur

यशोदा का संदेश कोउ रे! जइयो मधुपूरि ओर वहाँ बसत है मेरो लाला सुन्दर नवल किशोर कहियो वाहि अरे नटखट! क्यों आत न इते बहोर मैया बिलखि बिलखि जीवति है, तकत न वाकी ओर माखन सो तेरो हिय लाला, काहे भयो कठोर मैं तो नित तेरो मग जोऊँ, कान्ह बहोर बहोर अपुनो ही सुत करि […]

Man Ga Tu Madhav Rag Re

चेतावनी मन गा तू माधव राग रे, कर माधव से अनुराग रे कृष्ण भजन को नर तन पाया, यहाँ आय जग में भरमाया छोड़ छोड़ यह माया छाया, श्याम सुधारस पाग रे माधव ही तेरा अपना है, और सभी कोरा सपना है दुनिया से जुड़ना फँसना है, इस बंधन से भाग रे मोह निशा में […]

Gunghat Ka Pat Khol Re Toko Peev Milenge

अज्ञान निवृत्ति घूँघट का पट खोल रे, तोहे पिया मिलेंगे घट घट में वह साईं रमता, कटुक वचन मत बोल रे धन जोबन को गरब न कीजे, झूठा पचरंग चोल रे सुन्न महल में दीप जलाले, आसन सों मत डोल रे जाग जुगुत सो रंग-महल में, पिय पायो अनमोल रे कहे ‘कबीर’ अनन्द भयो है, […]