Tan Man Se Gopiyan Priti Kare

व्यथित गोपियाँ तन मन से गोपियाँ प्रीति करें, यही सोच कर प्रगटे मोहन कटि में पीताम्बर वनमाला और मोर मुकुट भी अति सोहन कमनीय कपोल, मुस्कान मधुर, अद्वितीय रूप मोहन का था उत्तेजित कर तब प्रेम भाव जो परमोज्ज्वल अति पावन था वे कण्ठ लगे उल्लास भरें, श्रीकृष्ण करें क्रीड़ा उनसे वे लगीं सोचने दुनियाँ […]

Jo Paanch Tatva Se Deh Bani

तत्व चिन्तन जो पाँच तत्व से देह बनी, वह नाशवान ऐसा जानो जीना मरना तो साथ लगा, एक तथ्य यही जो पहचानो परमात्मा ही चेतन स्वरूप और जीव अंश उसका ही है सच्चिदानंद दोनों ही तो, निर्गुण वर्णन इसका ही है जैसे की सींप में रजत दिखे, मृगतृष्णा जल होता न सत्य सम्पूर्ण जगत् ही […]

Jagat Se Prabho Ubaro

शरणागति जगत से प्रभो उबारो हे घट घट वासी, मैं पापी, मुझको आप सँभारो मुझे विदित है तुम सेवक के, दोष नहीं मन लाते ग्वाल-बाल संग क्रीड़ा करते, गाय चराने जाते तुम को प्यार गरीबों से प्रभु, साग विदुर घर खाते शबरी, सुदामा, केवट को, प्रभु तुम ही हो अपनाते तार दिया तुमने भव जल […]

Kirtan Se Man Shanti Pate

कीर्तन महिमा कीर्तन से मन:शांति पाते प्रभु के स्वरूप का चिन्तन हो, आनन्दरूप मन में आते अनुभूति प्रेम की हो जाये, तो भक्ति स्वतः मिल जाती है अपनापन होने से ही तो, माँ हमको प्यारी लगती है तन्मयता से जब कीर्तन हो, तो हरि से लौ लग जायेगी सब छुट जायेगा राग द्वेष, प्रभु-प्रीति ही […]

Karahu Prabhu Bhavsagar Se Par

नाम-महिमा करहुँ प्रभु भवसागर से पार कृपा करहु तो पार होत हौं, नहिं बूड़ति मँझधार गहिरो अगम अथाह थाह नहिं, लीजै नाथ उबार हौं अति अधम अनेक जन्म की, तुम प्रभु अधम उधार ‘रूपकुँवरि’ बिन नाम श्याम के, नहिं जग में निस्तार 

Kathinai Se Dhan Arjan Ho

सात्विक दान कठिनाई से धन अर्जन हो, और दान कर पाये धन का लोभ सदा ही रहता, त्याग कठिन हो जाये याद रहे अधिकांश धर्म में व्यय हो, कमी न आये कुएँ से जल जितना निकले, फिर से वह भर जाये धन कमाय जो भी ईमान से, वह सात्विक कहलाये कृषि एवं व्यवसाय से अर्जित, […]

Itna To Karna Swami Jab Pran Tan Se Nikale

विनती इतना तो करना स्वामी, जब प्राण तन से निकले गोविन्द नाम लेकर, फिर प्राण तन से निकले श्री यमुनाजी का तट हो, स्थान वंशी-वट हो मेरा साँवरा निकट हो, जब प्राण तन से निकलें श्री वृन्दावन का थल हो, मेरे मुख में तुलसी दल हो विष्णु-चरण का जल हो, जब प्राण तन से निकलें […]

Antarman Se Karu Archana

गायत्री स्तवन अन्तर्मन से करूँ, अर्चना हे गायत्री माता जपे आपका महामंत्र, वह सभी सिद्धियाँ पाता अनुपम रूप आपका माता, वर्णन हो नहीं पाता महिमा अपरम्पार आपकी, भक्तों की हो त्राता दिव्य तेज की एक किरण से, मन प्रकाश भर जाता

Laga Le Prem Prabhu Se Tu

शरणागति लगाले प्रेम प्रभु से तू, अगर जो मोक्ष चाहता है रचा उसने जगत् सारा, पालता वो ही सबको है वही मालिक है दुनियाँ का, पिता माता विधाता है नहीं पाताल के अंदर, नहीं आकाश के ऊपर सदा वो पास है तेरे, ढूँढने क्यों तू जाता है पड़े जो शरण में उसकी, छोड़ दुनियाँ के […]

Ek Aur Vah Kshir Nir Main Sukh Se Sowen

श्री राधाकृष्ण एक ओर वह क्षीर नीर में, सुख से सोवैं करि के शैया शेष लक्ष्मीजी, जिन पद जोवैं वे ही राधेश्याम युगल, विहरत कुंजनि में लोकपाल बनि तऊ चरावत, धेनु वननि में निज ऐश्वर्य भुलाय कें, करैं अटपटे काम है तेज पुंज उन कृष्ण को, बारम्बार प्रणाम है