Aab Tum Meri Aur Niharo

शरणागति अब तुम मेरी ओर निहारो हमरे अवगुन पै नहि जाओ, अपनो बिरुद सम्भारो जुग जुग साख तुम्हारी ऐसी, वेद पुरानन गाई पतित उधारन नाम तिहारो, यह सुन दृढ़ता आई मैं अजान तुम सम कुछ जानों, घट घट अंतरजामी मैं तो चरन तुम्हारे लागी, शरणागत के स्वामी हाथ जोरि के अरज करति हौं, अपनालो गहि […]

Tum Prem Ke Ho Ghanshyam

प्रेमवश प्रभु तुम प्रेम के हो घनश्याम गोपीजन के ऋणी बने तुम, राधा वल्लभ श्याम शबरी के जूँठे फल खाये, सीतापति श्रीराम लंका राज विभीषण पायो, राम भक्ति परिणाम बंधन मुक्त करे निज जन को, जसुमति बाँधे दाम गाढ़ी प्रीत करी ग्वालन संग, यद्यपि पूरम-काम व्यंजन त्याग साग को भोजन, कियो विदुर के ठाम राजसूय […]

Tum Bin Pyare Kahun Sukh Nahi

स्वार्थी संसार तुम बिन प्यारे कहुँ सुख नाहीं भटक्यो बहुत स्वाद-रस लम्पट, ठौर ठौर जग माहीं जित देखौं तित स्वारथ ही की निरस पुरानी बातें अतिहि मलिन व्यवहार देखिकै, घृणा आत है तातें जानत भले तुम्हारे बिनु सब, व्यर्थ ही बीतत सांसे ‘हरिचन्द्र’ नहीं टूटत है ये, कठिन मोह की फाँसे  

Prabhu Ji Tum Chandan Ham Paani

दास्य भक्ति प्रभुजी! तुम चंदन हम पानी, जाकी अँग-अँग बास समानी प्रभुजी! तुम घन वन हम मोरा, जैसे चितवत चंद चकोरा प्रभुजी! तुम दीपक हम बाती, जाकी जोति बरे दिन राती प्रभुजी! तुम मोती हम धागा, जैसे सोनहि मिलत सुहागा प्रभुजी! तुम स्वामी हम दासा, ऐसी भक्ति करे ‘रैदासा’  

Prabhu Ji Tum Bhakton Ke Hitkari

भक्त-वत्सल भगवान प्रभुजी तुम भक्तों के हितकारी हिरणाकश्यप ने भक्त प्रहलाद को कष्ट दिया जब भारी नरसिंह रूप लिये प्रभु प्रकटें, भक्तों के रखवारी जभी ग्राह ने पकड़ा गज को, आया शरण तुम्हारी सुन गुहार के मुक्त किया गज, भारी विपदा टारी दुष्ट दुःशासन खींच रहा था, द्रुपद-सुता की साड़ी दौड़े आये लाज बचाई, हे […]

Prabhu Tum Ho Din Bandhu

प्रार्थना प्रभु! तुम हो दीनबन्धु, हम दास हैं तुम्हारे माता पिता तुम्हीं हो, एकमात्र तुम सहारे ज्योतित सभी हैं तुम से, रवि चाँद हों कि तारे हैं प्राणवान तुमसे, पशु पक्षी जीव सारे हों पाप दोष हमसे, तुम से छिपें न प्यारे सन्तान हम तुम्हारी, होएँ न तुमसे न्यारे पीड़ा जनम मरण की, दूजा नहीं […]