Gaiye Ganpati Jag Vandan

श्री गणेश वन्दना गाइये गणपति जगवन्दन, शंकर–सुवन, भवानी-नन्दन सिद्धि सदन गज-वदन विनायक, कृपा सिन्धु सुन्दर सब लायक मोदक-प्रिय, मुद मंगलदाता, विद्या-वारिधि, बुद्धि-विधाता माँगत ‘तुलसिदास’ कर जोरे, बसहिं रामसिय मानस मोरे

Gopal Gokul Vallabhi

श्री कृष्ण वन्दना गोपाल गोकुल बल्लभी प्रिय गोपगोसुत बल्लभं चरनारबिंदमहं भजे भजनीय सुर मुनि दुर्लभं घनश्याम काम अनेक छबि, लोकाभिराम मनोहरं किंजल्क-वसन, किसोर मूरति, भूरि गुन करुनाकरं सिर केकि-पच्छ बिलोल कुंडल, अरुन बनरुह लोचनं गुंजावतंस विचित्र सब अँग धातु, भव-भय मोचनं कच-कुटिल, सुंदर तिलक भ्रू, राका मयंक समाननं अपहरन ‘तुलसीदास’ त्रास विहार वृंदा काननं

Janak Mudit Man Tutat Pinak Ke

धनुष भंग जनक मुदित मन टूटत पिनाक के बाजे हैं बधावने, सुहावने सुमंगल-गान भयो सुख एकरस रानी राजा राँक के दुंदभी बजाई, सुनि हरषि बरषि फूल सुरगन नाचैं नाच नाय कहू नाक के ‘तुलसी’ महीस देखे दिन रजनीस जैसे सूने परे सून से, मनो मिटाय आँक के

Janani Main Na Jiu Bin Ram

भरत की व्यथा जननी मैं न जीऊँ बिन राम राम लखन सिया वन को सिधाये, राउ गये सुर धाम कुटिल कुबुद्धि कैकेय नंदिनि, बसिये न वाके ग्राम प्रात भये हम ही वन जैहैं, अवध नहीं कछु काम ‘तुलसी’ भरत प्रेम की महिमा, रटत निरंतर नाम

Jay Jay Jag Janani Devi

पार्वती वन्दना जय जय जग-जननि देवि, सुर-नर-मुनि-असुर-सेवी भुक्ति-मुक्ति-दायिनि, भय-हरणि कालिका मंगल-मुद-सिद्धि-सदनि, पर्व शर्वरीश-वदनि ताप-तिमिर-तरुण-तरणि-किरण-पालिका वर्म-चर्म कर कृपाण, शूल-शेल धनुष बाण धरणि दलनि दानव दल रण करालिका पूतना-पिशाच-प्रेत-डाकिनी-शाकिनि समेत भूत-ग्रह-बेताल-खग-मृगाल-जालिका जय महेश-भामिनी, अनेक रूप नामिनी समस्त लोक स्वामिनी, हिम-शैल बालिका रघुपति-पद-परम प्रेम, ‘तुलसी’ यह अचल नेम देहु ह्वै प्रसन्न पाहि प्रणत-पालिका

Jay Jay Jay Giriraj Kishori

पार्वती वन्दना जय-जय-जय गिरिराजकिशोरी जय महेश मुखचंद्र चकोरी जय गजवदन षडानन माता जग-जननी दामिनि-द्युति दाता नहिं तव आदि मध्य अवसाना अमित प्रभाव वेद नहीं जाना भव-भय-विभव पराभव कारिणि विश्व-विमोहिनि स्वबस विहारिणि

Jay Jayti Jay Raghuvansh Bhushan

श्री राम वन्दना जय जयति जय रघुवंशभूषण राम राजिवलोचनम् त्रैताप खंडन जगत्-मंडन ध्यानगम्य अगोचरम् अद्वैत अविनाशी अनिन्दित, मोक्षप्रद अरि गंजनम् तव शरण भवनिधि-पारदायक, अन्य जगत् विडम्बनम् हे दीन-दारिद के विदारक, दयासिन्धु कृपाकरम हे भक्तजन के राम जीवन-मूल मंगल मंगलम्

Jay Ram Rama Ramnam Samanam

श्री राम वन्दना जय राम रमा- रमनं समनं , भव-ताप भयाकुल पाहिजनं अवधेस, सुरेस, रमेस विभो, सरनागत माँगत पाहि प्रभो दस-सीस-बिनासन बीस भुजा, कृत दूरि महा-महि भूरि-रुजा रजनी-चर-वृन्द-पतंग रहे, सर-पावक-तेज प्रचंड दहे महि-मंडल-मंडन चारुतरं, धृत-सायक-चाप-निषंग-बरं मद-मोह-महा ममता-रजनी, तमपुंज दिवाकर-तेज-अनी मनजात किरात निपात किए, मृग, लोभ कुभोग सरेनहिए हति नाथ अनाथनि पाहि हरे, विषया वन पाँवर […]

Jau Kahan Taji Charan Tumhare

रामाश्रय जाऊँ कहाँ तजि चरन तुम्हारे काको नाम पतित पावन जग, केहि अति दीन पियारे कौनहुँ देव बड़ाइ विरद हित, हठि हठि अधम उधारे खग मृग व्याध, पषान, विटप जड़यवन कवन सुर तारे देव दनुज, मुनि, नाग, मनुज सब माया-विवश बिचारे तिनके हाथ दास ‘तुलसी’ प्रभु, कहा अपुनपौ हारे

Jaki Gati Hai Hanuman Ki

हनुमान आश्रय जाकी गति है हनुमान की ताकी पैज पूजि आई, यह रेखा कुलिस पषान की अघटि-घटन, सुघटन-विघटन, ऐसी विरुदावलि नहिं आन की सुमिरत संकट सोच-विमोचन, मूरति मोद-निधान की तापर सानुकूल गिरिजा, शिव, राम, लखन अरु जानकी ‘तुलसी’ कपि की कृपा-विलोकनि, खानि सकल कल्यान की