Jake Priy Na Ram Vedehi

राम-पद-प्रीति जाके प्रिय न राम वैदेही तजिये ताहि कोटि बैरीसम, जद्यपि परम सनेही तज्यो पिता प्रह्लाद, विभीषन बंधु, भरत महतारी बलि गुरु तज्यो, कंत ब्रज – बनितनि, भये मुद – मंगलकारी नाते नेह राम के मनियत सुहृद सुसेव्य जहाँ लौं अंजन कहाँ आँखि जेहि फूटै, बहुतक कहौं कहाँ लौं ‘तुलसी’ सो सब भाँति परम हित […]

Jagiya Raghunath Kunwar Panchi Van Bole

प्रभाती जागिये रघुनाथ कुँवर, पँछी वन बोले चन्द्र किरन शीतल भई, चकई पिय मिलन गई त्रिविध मंद चलत पवन, पल्लव द्रुम डोले प्रात भानु प्रगट भयो, रजनी को तिमिर गयो भृंग करत गुंजगान कमलन दल खोले ब्रह्मादिक धरत ध्यान, सुर नर मुनि करत गान जागन की बेर भई, नयन पलक खोले

Jankinath Sahay Kare Tab

रामाश्रय जानकीनाथ सहाय करे, तब कौन बिगाड़ सके नर तेरो सूरज, मंगल, सोम, भृगुसुत, बुध और गुरु वरदायक तेरो राहु केतु की नाहिं गम्यता, तुला शनीचर होय है चेरो दुष्ट दुशासन निबल द्रौपदी, चीर उतारण मंत्र विचारो जाकी सहाय करी यदुनन्दन, बढ़ गयो चीरको भाग घनेरो गर्भकाल परीक्षित राख्यो, अश्वत्थामा को अस्त्र निवार्यो भारत में […]

Jhulat Ram Palne Sohe

झूला झूलत राम पालने सोहैं, भूरि-भाग जननीजन जोहैं तन मृदु मंजुल मे चकताई, झलकति बाल विभूषन झाँई अधर – पानि – पद लोहित लोने, सर – सिंगार – भव सारस सोने किलकत निरखि बिलोल खेलौना, मनहुँ विनोद लरत छबि छौना रंजित – अंजन कंज – विलोचन, भ्रातज भाल तिलक गोरोचन लस मसिबिंदु बदन – बिधुनीको, […]

Thumak Chalat Ram Chandra

शिशु राम ठुमक चलत रामचन्द्र, बाजत पैजनियाँ किलक किलक उठत धाय, गिरत भूमि लटपटाय धाय मातु गोद लेत, दशरथ की रनियाँ अंचल-रज अंग जाकि, विविध भाँति सों दुलारि तन-मन-धन वारि-वारि, कहत मृदु वचनियाँ ‘तुलसीदास’ अति अनन्द देखि के मुखारविन्द रघुवर की छबि समान, रघुवर की बनियाँ

Tu Dayalu Din Ho Tu Dani Ho Bhikhari

शरणागति तू दयालु, दीन हौं, तू दानि, हौं भिखारी हौं प्रसिद्ध पातकी, तू पाप – पुंज – हारी नाथ तू अनाथ को, अनाथ कौन मोसो मो समान आरत नहिं, आरतहर तोसो ब्रह्म तू, हौं जीव, तू ठाकुर, हौं चेरो तात, मात, गुरु, सखा तू, सब बिधि हितू मेरो तोहि मोहिं नाते अनेक, मानियै जो भावै […]

Pawan Prem Ram Charan

रामनाम महिमा पावन प्रेम राम-चरन-कमल जनम लाहु परम राम-नाम लेत होत, सुलभ सकल धरम जोग, मख, विवेक, बिरति, वेद-विदित करम करिबे कहुँ कटु कठोर, सुनत मधुर नरम ‘तुलसी’ सुनि, जानि बूझि, भूलहि जनि भरम तेहि प्रभु को होहि, जाहि सबही की सरम

Purte Nikasi Raghuvir Vadhu

वन में सीता राम पुरतें निकसी रघुवीर वधू धरि धीर दए मग में डग द्वै झलकीं भरि भाल कनीं जल कीं, पुट सूखि गए मधुराधर वै फिरि बूझति है, चलनो अब केतिक पर्ण कुटी करिहौ कित ह्वै तिय की लखि आतुरता पिय की अखियाँ अति चारु चलीं जल च्वै

Bethi Sagun Manavati Mata

माँ की आतुरता बैठी सगुन मनावति माता कब ऐहैं मेरे बाल कुसल घर, कहहु, काग ! फुरि बाता दूध-भात की दौनी दैहौं, सोने चोंच मढ़ैहौं जब सिय-सहित विलोकि नयन भरि, राम-लषन उर लैहौं अवधि समीप जानि जननी जिय अति आतुर अकुलानी गनक बोलाइ, पाँय परि पूछति, प्रेम मगन मृदु बानी तेहि अवसर कोउभरत निकट तें, […]

Bhaye Prakat Krapala Din Dayala

श्री राम जन्म भए प्रकट कृपाला दीनदयाला, कौसल्या हितकारी हरषित महतारी मुनि मन हारी, अद्भुत रूप विचारी लोचन अभिरामा तनु घनश्यामा, निज आयुध भुज चारी भूषन वनमाला नयन विशाला, सोभा सिंधु खरारी कह दुइ कर जोरी अस्तुति तोरी, केहि बिधि करौं अनंता माया गुन ज्ञानातीत अमाना, वेद पुरान भनंता करुना-सुख-सागर सब गुन आगर, जेहि गावहिं […]