Krishna Radhika Radha Krishna
युगल स्वरूप कृष्ण राधिका, राधा कृष्ण, तत्व रूप से दोनों एक राधे श्याम, श्याम राधिके, भिन्न तथापि अभिन्न विवेक राधामय जीवन ही कृष्ण का, कृष्णचन्द्र ही जीवन रूप ऐकमेकता दिव्य युगल की, सदा एकरस तत्व अनूप दो के बिना न संभव होता, वितरण लीला का आस्वाद इसीलिये तो तन-मन से वे, लीला करते-निर्विवाद नित्य नया […]
Koi Manushya Hai Nich Nahi
भरत-केवट मिलाप कोई मनुष्य है नीच नहीं, भगवान भक्त हो, बड़ा वही श्री भरत मिले केवट से तो, दोनों को ही आनन्द हुआ मालूम हुआ केवट से ही, राघव का उससे प्रेम हुआ तब भरत राम के जैसे ही, छाती से उसको लगा रहे केवट को इतना हर्ष हुआ, आँखों से उसके अश्रु बहे जाति […]
Kya Yagya Ka Uddeshya Ho
यज्ञ क्या यज्ञ का उद्देश्य हो दम्भ अथवा अहं हो नहीं, शुद्ध सेवा भाव हो हो समर्पण भावना, अरु विश्व का कल्याण हो इन्द्रिय-संयम भी रहे, अवशिष्ट भोगे यज्ञ में शाकल्य का मंत्रों सहित, हो हवन वैदिक यज्ञ में संयम रूपी अग्नि में, इन्द्रिय-सुखों का हवन हो अध्यात्म की दृष्टि से केवल, शास्त्र का स्वाध्याय […]
Kyon Dhanya Grihasthashram Kahlata
धन्य गृहस्थाश्रम क्यों धन्य गृहस्थाश्रम कहलाता मानव जीवन के तीन लक्ष्य, धन, काम, धर्म वह पाता सौमनस्य हो पति-पत्नी में, स्वर्ग बनाये घर को परोपकार, परहित सेवा, कर्तव्य मिलादे हरि को प्रभु का मंदिर समझे गृह को, भाव शुद्धता मन में हरि-कीर्तन प्रातः सन्ध्या हो, व सदाचार जीवन में पूजन एवं कृष्ण-कथा हो, साधु, सन्त […]
Khambha Fadke Pragate Narhari
नरसिंह रूप खम्भ फाड़के प्रगटे नरहरि, अपनों भक्त उबार्यो दैत्यराज हिरणाकशिपु को, नखते उदर विदार्यो नरसिंहरूप धर्यो श्रीहरि ने, धरणी भार उतार्यो जय-जयकार भयो पृथ्वी पे, सुर नर सबहिं निहार्यो कमला निकट न आवे, ऐसो रूप कबहुँ नहीं धार्यो चूमत अरु चाटत प्रह्लाद को, तुरत ही क्रोध निवार्यो राजतिलक दे दियो प्रभु ने, हस्त कमल […]
Khatir Kar Le Nai Gujarya
रसिया खातिर कर ले नई गुजरिया, रसिया ठाड़ो तेरे द्वार ठाड़ौ तेरे द्वार रसिया, ठाड़ौ तेरे द्वार ये रसिया तेरे नित नहिं आवै, प्रेम होय तो दर्शन पावै, अधरामृत को भोग लगावै, कर मेहमानी अब मत चूके समय न बारम्बार हिरदे की चौकी कर हेली, नेह को चंदन लगा नवेली, दीक्षा ले बनि जैयो चेली, […]
Khelat Gupal Nav Sakhin Sang
होली खेलत गुपाल नव सखिन संग, अंबर में छायो रंग रंग बाजत बेनु डफ और चंग, कोकिला कुहुक भरती उमंग केसर कुमकुम चंदन सुंगध, तन मन सुध बिसरी युवति वृंद कोइ निरखत है लोचन अघाय,लीनो लपेटि आनंदकंद झोरी भर-भर डारत गुलाल, मन में छाई भारी तरंग
Gangajal Pap Baha Deta
गंगा माहात्म्य गंगा जल पाप बहा देता उसका जो सेवन नित्य करे, वह मन शांति को पा लेता गंगाजी का तो दर्शन भी, मन को निश्चित निर्मल करता जलरूप यही तो वासुदेव, सच्चा सुख जिनसे मिल जाता जिसके मन में यह भाव जगे, संभव नित गंगा-स्नान करे गंगा का सेवन सुमिरन हो, पातक उसके नितांत […]
Ganapati Gaao Re Vigan Nahi Aayega
श्री गणेश स्तुति गणपति गाओ रे, विघन नहीं आयगा सिद्धि सदन सुर-नर-मुनि वंदित, करता भरता रे, विघन नहीं आएगा ब्रह्मा, विष्णु, महेश तुम्हीं हो, संकट हरता रे, विघन नहीं आयगा कोटि सूर्य सम प्रभा तुम्हारी, बुद्धि प्रदाता रे, विघन नहीं आयगा शंकर-सुवन, पार्वती-नंदन, आनँद मनाओ रे, विघन नहीं आयगा जो जन सुमिरन करे तिहारो, भय […]
Gayo Man Shyam Sang Hi Bhag
श्याम रंग गयो मन श्याम संग ही भाग मुरली की धुन पड़ी कान में, मन उमग्यो अनुराग अधर-सुधा-रस भरी सुनाई, दिव्य मधुरतम राग मधुर मिलन की गोपीजन मन, उठी कामना जाग कैसा प्रबल प्रेम है इनका, जग से हुआ विराग दर्शन जिसको मिले श्याम का, उसका ही बड़भाग श्रुतियाँ ढूँढ रहीं हैं जिनको, पाये न […]