Gayon Ke Hit Ka Rahe Dhyan
गो माता गायों के हित का रहे ध्यान गो-मांस करे जो भी सेवन, निर्लज्ज व्यक्ति पापों की खान गौ माँ की सेवा पुण्य बड़ा, भवनिधि से करदे हमें पार वेदों ने जिनका किया गान, शास्त्र पुराण कहे बार-बार गौ-माता माँ के ही सदृश, वे दु:खी पर हम चुप रहते माँ की सेवा हो तन मन […]
Giridhari Ke Rang Mainrachi
प्रीति माधुरी गिरिधारी के रंग में राची सुध बुध भूल गई मैं तो सखि, बात कहूँ मैं साँची मारग जात मिले मोहि सजनी, मो तन मुरि मुसकाने मन हर लियो नंद के नंदन, चितवनि माँझ बिकाने जा दिन ते मेरी दृष्टि परी सखि, तब से रह्यो न जावै ऐसा है कोई हितू हमारो, श्याम सों […]
Guru Charno Me Shish Nava Ke Raghuvar
धनुष-भंग (राजस्थानी) गुरुचरणों में सीस नवा के, रघुवर धनुष उठायोजी बाण चढ़ावत कोई न देख्यो, झटपट तोड़ गिरायोजी तीन लोक अरु भवन चतुर्दश, सबद सुणत थर्रायोजी धरणी डगमग डोलन लागी, शेष नाग चकरायोजी शूरवीर सब धुजण लाग्या, सबको गरब मिटायो जी
Guru Vishnu Vidhi Mahesh Hai
गुरु वन्दना गुरु विष्णु, विधि महेश हैं, साक्षात् ही परमेश हैं अभिमान का नहीं लेश है, वे ज्ञान रूप दिनेश हैं धर्म की गति है गहन, उसको समझना है अगम गुरु दूर करते मोह माया, दुर्ज्ञेय को करते सुगम भव-सिन्धु को कैसे तरें, दुःख द्वेष का आगार हैं यदि सद्गुरु करूणा करें, समझो कि बेड़ा […]
Govind Karat Murali Gan
मुरली माधुर्य गोविन्द करत मुरली गान अधर पर धर श्याम सुन्दर, सप्त स्वर संधान विमोहे ब्रज-नारि, खग पशु, सुनत धरि रहे ध्यान चल अचल सबकी भई यह, गति अनुपम आन ध्यान छूटे मुनिजनों के, थके व्योम विमान ‘कुंभनदास’ सुजान गिरिधर, रची अद्भुत तान
Gopi Vallabh Ke Darshan Main
प्रीति-माधुरी गोपीवल्लभ के दर्शन में, मिलता सुख वैसा कहीं नहीं गोपीजन का था प्रेम दिव्य, प्रेमानुराग की सरित् बही दण्डकवन के ऋषि मुनि ही तो, आकर्षित थे राघव प्रति जो वे बनी गोपियाँ, पूर्ण हुर्इं, अभिलाषा थी इनके मन जो वे देह दशा को भूल गर्इं, हृदय में कोई और न था श्रीकृष्णचन्द्र से प्रेम […]
Goutam Rishi Patni Ahilya Hi
अहिल्या-उद्धार गौतम ऋषि पत्नि अहिल्या ही, शापित होकर पाषाणहुई श्रीराम चरण स्पर्श मिला, देवी तप-मूर्ति प्रकट भई बड़भागिन प्रभु के चरणों से, होकर अधीर तब लिपट गई बोली- ‘प्रभु मैं तो अभागिन हूँ, जो चरण शरण में हूँ आई मुनिवर ने शाप दिया था जो अनुग्रह का रूप लिया उसने वह दूर हुआ हरि दर्शन […]
Gou Mata Bhi Dudh Pilati
गौ माता गो माता भी दूध पिलाती, जैसे अपनी माता दधि मक्खन अरु घृत भी पाते, कौन भूल यह पाता कृषि कार्य के हेतु हमें यह, नित्य खाद भी देती उपकारों को भूल रहे हम, पोषण गैया करती भारत में गोपाल-कृष्ण ने, पूजा तुमको माता इसी देश में तेरा माता, आज न कोई त्राता कत्ल […]
Ghutno Ke Bal Chale Kanhaiya
बालकृष्ण घुटनों के बल चले कन्हैया बार-बार किलकारी मारे, आनन्दित हो मैया नवनीत कर में लिये कन्हाई, मुँह पर दही लगाये मणिमय आँगन में परछार्इं, निरख निरख हर्षाये तभी गोपियाँ गोदी लेकर, उन्हें चूमना चाहें बालकृष्ण की अतिप्रिय लीला, अपना भाग्य सराहें
Chanchal Man Ko Vash Me Karna
मनोनिग्रह चंचल मन को वश में करना दृढ़ता से साधन अपनायें, पूरा हो यह सपना भोगों में दुख दोष को देखें, तृष्णा मन की त्यागें भाव रहे समता परहित का, राग द्वेष सब भागें प्रभु के यश का करें कीर्तन, ध्यान मानसिक पूजा शरणागत हो चरण-कमल में, भाव रहे नहीं दूजा प्राणायाम करें नियम से, […]