Devopasna Shubhkari
देवोपासना देवोपासना शुभकारी संहिता वेद सब शास्त्र कहे, आराधन सब विधि हितकारी श्रीराम-कृष्ण व महादेव, दुर्गा भैया भी संग में हो भगवान सूर्य, श्रीगणपतिजी, ये पाँच देव पूजा में हों षोडोपचार, पंचोपचार, जैसा भी मन में हो विचार इन देवों की जो पूजा हो, श्रृद्धा की मन हो बहार कर्मों का बन्धन कट जाता, प्रभु […]
Dekha Dekha Yashoda Tera Lal
श्रीकृष्ण माधुरी देखा देखा यशोदा तेरा लाल मैंने देखा कस्तूरी का तिलक बिराजे, उर पचरंगी माल मोर पखा सिर ऊपर सोहे, घूँघर वारे बाल पीताम्बर को कटि में धारे, काँधे कारी शाल कानों में तो कुण्डल सोहे और लालिमा गाल चरणों में नुपूर छमकाये, चले लटकनी चाल यमुना तट पे रास रचाये, नाचे दे-दे ताल […]
Devi Usha Jyotirmai
विनती देवि उषा! ज्योतिर्मयी, तुम प्रेरक सत्कर्म सत्पथ पर हों अग्रसर अडिग रहे निज धर्म सूर्यदेव! गायत्री से करूँ आपका ध्यान निष्ठा होए इष्ट में, करें आप कल्याण हे प्रभु प्रेम विभोर हो, जपूँ आपका नाम नयन अश्रु विगलित रहे, सेवा हो निष्काम असत्, तिमिर अरु मृत्यु का, करो सर्वथा नाश सत्य, ज्ञान, अमृतत्व दो, […]
Do Rupon Main Avtar Liya
नर नारायण स्तुति दो रूपों में अवतार लिया नर नारायण को हम नमन करें अंशावतार वे श्री हरि के, बदरीवन में तप वहीं करें वक्षस्थल पर श्रीवत्स चिन्ह चौड़ा ललाट सुन्दर भौंहे दोनों ही वेष तपस्वी में, मस्तक पर घनी जटा सोहें तप से शंकित शचि पति प्रेरित, रति काम वहाँ पर जब आये सामर्थ्य […]
Sabse Prem Karo Man Pyare
शरणागति सबसे प्रेम करो मन प्यारे, कोई जाति या वंश द्वेष शत्रुता हो न किसी से, सब ही प्रभु के अंश प्राणों में प्रभु शक्ति न ऐसी,करूँ तुम्हारा ध्यान जड़ता भर दो इस जीवन में, बचे ने कुछ भी ज्ञान मुझसे बड़ा न पापी कोई, मैंने पाप छिपाये प्रायश्चित कर पाऊँ कैसे, समझ नहीं कुछ […]
Dhanya Sakhi Suno Jasoda Maiya
बालकृष्ण चरित धन्य सखी सुनो जसोदा मैया घुँटुरन चलत बालकृष्ण अति कोमल नन्हें पैया मनमोहन को रूप रसीलो, गोपीजन मन भावत बारंबार कमल मुख निरखत, नंदालय सब आवत किलकि किलकि हुलसत है लालन, भगत बछल मनरंजन देत असीस सबहि गोपीजन, चिरजीवो दुख-भंजन
Dhan Sanchay Se Dukhi Hote
धन संचय धन संचय से दुःखी होते दूजों को वंचित करके ही हम धन की वृद्धि कर पाते हम स्वामी उतने ही धन के जिससे कि गुजारा हो जाये ज्यादा धन को अपना माने, वह व्यक्ति चोर ही कहलाये परिवार में धन के कारण ही आपस में बँटवारा होता ज्यादा धन से सुख मिलता है, […]
Dhanya Dhanya Vrindavan Dham
वृन्दावान महिमा धन्य धन्य वृन्दावान धाम राधा के संग क्रीड़ा करते जहाँ नित्य घनश्याम ग्वाल-सखा सँग यमुना तट पे, तरु कदंब की छैंया मुरली मधुर बजाये मोहन, और चराये गैंया इसका जो भी ध्यान लगाये, हर्ष न हृदय समाये छटा वर्णनातीत लाल की, कोई पार न पाये वृन्दावन की पावन रज का, सादर तिलक लगाये […]
Dharti Mata Ye Samjhaye
निर्वेद धरती माता यह समझाये जिसको तू अपना है कहता, कुछ भी साथ न जाए मुझको पाने को ही प्यारे तुम, आपस में क्यों लड़ते खोया विवेक जो मिला प्रभु से मिल जुल क्यों नहीं रहते जो महाराजा सम्राट समझते, पृथ्वीपति अपने को हुए मृत्यु के ग्रास अन्त में, अहंकार था जिनको खोद-खोद मुझको जिसने […]
Dhara Par Pragte Palanhar
श्रीकृष्ण प्राकट्य धरा पर प्रगटे पालनहार, बिरज में आनँद छायो रे पीत पताका घर घर फहरे, मंगल गान हर्ष की लहरें गूँजे पायल की झंकार, विरज में आनँद छायो रे नर-नारी नाचे गोकुल में, मात यशोदा बलि बलि जाए द्वारे भीर गोप-गोपिन की, बिरज में आनंद छायो रे दान दे रहे नंद जसोदा, माणिक मोती […]