Gopi Vallabh Ke Darshan Main
प्रीति-माधुरी गोपीवल्लभ के दर्शन में, मिलता सुख वैसा कहीं नहीं गोपीजन का था प्रेम दिव्य, प्रेमानुराग की सरित् बही दण्डकवन के ऋषि मुनि ही तो, आकर्षित थे राघव प्रति जो वे बनी गोपियाँ, पूर्ण हुर्इं, अभिलाषा थी इनके मन जो वे देह दशा को भूल गर्इं, हृदय में कोई और न था श्रीकृष्णचन्द्र से प्रेम […]
Goutam Rishi Patni Ahilya Hi
अहिल्या-उद्धार गौतम ऋषि पत्नि अहिल्या ही, शापित होकर पाषाणहुई श्रीराम चरण स्पर्श मिला, देवी तप-मूर्ति प्रकट भई बड़भागिन प्रभु के चरणों से, होकर अधीर तब लिपट गई बोली- ‘प्रभु मैं तो अभागिन हूँ, जो चरण शरण में हूँ आई मुनिवर ने शाप दिया था जो अनुग्रह का रूप लिया उसने वह दूर हुआ हरि दर्शन […]
Gou Mata Bhi Dudh Pilati
गौ माता गो माता भी दूध पिलाती, जैसे अपनी माता दधि मक्खन अरु घृत भी पाते, कौन भूल यह पाता कृषि कार्य के हेतु हमें यह, नित्य खाद भी देती उपकारों को भूल रहे हम, पोषण गैया करती भारत में गोपाल-कृष्ण ने, पूजा तुमको माता इसी देश में तेरा माता, आज न कोई त्राता कत्ल […]
Ghutno Ke Bal Chale Kanhaiya
बालकृष्ण घुटनों के बल चले कन्हैया बार-बार किलकारी मारे, आनन्दित हो मैया नवनीत कर में लिये कन्हाई, मुँह पर दही लगाये मणिमय आँगन में परछार्इं, निरख निरख हर्षाये तभी गोपियाँ गोदी लेकर, उन्हें चूमना चाहें बालकृष्ण की अतिप्रिय लीला, अपना भाग्य सराहें
Chanchal Man Ko Vash Me Karna
मनोनिग्रह चंचल मन को वश में करना दृढ़ता से साधन अपनायें, पूरा हो यह सपना भोगों में दुख दोष को देखें, तृष्णा मन की त्यागें भाव रहे समता परहित का, राग द्वेष सब भागें प्रभु के यश का करें कीर्तन, ध्यान मानसिक पूजा शरणागत हो चरण-कमल में, भाव रहे नहीं दूजा प्राणायाम करें नियम से, […]
Chapal Man Sumiro Avadh Kishor
राम स्मरण चपल मन सुमिरो अवध किशोर चन्द्रवदन राजीव नयन प्रभु, करत कृपा की कोर मेघ श्याम तन, पीत वसन या छबि की ओर ने छोर शीश मुकुट कानों में कुण्डल, चितवनि भी चितचोर धनुष बाण धारे प्रभु कर में, हरत भक्त भय घोर चरण-कमल के आश्रित मैं प्रभु, दूजो कोई न मोर
Chal Rahe Bakaiyan Manmohan
बालकृष्ण चल रहे बकैयाँ मनमोहन, सन गये धूल में जो सोहन जब नहीं दिखी मैया उनको किलकारी मारे बार बार माँ निकट रसोईघर में थी, गोदी में लेकर किया प्यार आँचल से अंगों को पोछा और दूध पिलाने लगी उन्हें क्षीरोदधि में जो शयन करें, विश्वम्भर कहते शास्त्र जिन्हें
Chalo Man Shri Vrindavan Dham
राधा कृष्ण चलो मन श्री वृन्दावन धाम किसी कुंज या यमुना-तट पे, मिल जायेंगे श्याम सुन्दर छबिमय मोर-मुकुट में, सातो रंग ललाम वही सुनहरे पीत-वसन में, शोभित शोभा-धाम वनमाला के सुमन सुमन में, सुलभ शुद्ध अनुराग और बाँसुरी की सुर-धुन में, राधा का बस राग सुन्दरियों संग रास रमण में, प्रेम ज्योति अभिराम राधा दीखे […]
Chalo Man Kalindi Ke Tir
कालिंदी कूल चलो मन कालिन्दी के तीर दरशन मिले श्यामसुन्दर को, हरे हिये की पीर तरु कदम्ब के नीचे ठाड़े, कूजत कोयल कीर अधर धरे मुरली नट-नागर, ग्वाल बाल की भीर मोर-मुकुट बैजंती माला, श्रवणन् लटकत हीर मन्द मन्द मुस्कान मनोहर, कटि सुनहरो चीर रास विलास करे मनमोहन, मन्थर बहे समीर शोभित है श्री राधा-माधव, […]
Chalo Ri Sakhi Nand Bhawan Ko Jayen
प्रभाती चलोरी सखि, नन्द भवन को जायें मिले श्याम सुन्दर का दर्शन, जीवन की निधि पायें प्रातः काल भयो सखि माँ लाला को रही जगाये उबटन लगा लाल को मैया, अब उसको नहलाये स्नेह भाव जसुमति के मन में, नवनीत उसे खिलाये केश सँवार नयन में काजल, माथे तिलक लगाये रेशम को जामा पहनाकर, स्नेह […]