Prathvi Par Atyacharon Ka
प्रभु प्राकट्य पृथ्वी पर अत्याचारों का, है लग जाता अम्बार जभी मंगलमय जो है परब्रह्म, विष्णु लेते अवतार तभी पुरुषोत्तम श्रीमन् नारायण, हैं परमानन्द स्वरूप आप स्थापित करते पुनः धर्म, साधु सन्तों का हरें ताप कछुवा, वराह, हयग्रीव, मत्स्य का रूप धरे वे ही आते संहार करें वे असुरों का, पृथ्वी का भार वही हरते […]
Bangala Bhala Bana Maharaj
नश्वर देह बंगला भला बना महाराज, जिसमें नारायण बोले पाँच तत्व की र्इंट बनाई, तीन गुणों का गारा छत्तीसों की छत बनाई, चेतन चिनने हारा इस बँगले के दस दरवाजे, बीच पवन का थम्भा आवत जावत कछू ना दीखे, ये ही बड़ा अचम्भा इस बँगले में चौपड़ माँडी, खेले पाँच पचीसा कोर्ई तो बाजी हार […]
Vanshi Vat Jamuna Ke Tat Par
होली वंशी-वट जमुना के तट पर, श्याम राधिका खेले होरी ग्वाल-बाल संग में गिरिधारी, सज आई बृजभानु दुलारी संग लिये ब्रजवाल, खेल रहे होरी पिचकारी भर रंग चलावैं, भर भर मूठ गुलाल उड़ावैं धरा गगन भये लाल, खेल रहे होरी केसर कुंकुम और अरगजा, मलै परस्पर श्याम भानुजा बाढ्यो प्रेम विशाल, खेल रहे होरी लाल […]
Banshi Sadharan Vadya Nahi
मोहन की मुरली बंशी साधारण वाद्य नहीं प्राणों व साँसों से बजता, अनुपम ऐसा है वाद्य यही जब बंसी बजाते श्रीकृष्ण, आनन्द उसी में भर देते पशु पक्षी भी तब स्थिर हों, सुनने को कान लगा देते अश्चर्य चकित ऋषि-मुनि होते, तब भंग समाधि हो जाती रोमांच गोपियों को होता, घर से तत्काल निकल पड़ती […]
Baj Rahi Shyam Pag Painjaniyan
बालकृष्ण चरित्र बज रही श्याम-पग-पैंजनियाँ चलना सिखावे अँगुली पकड़ के, स्वर मीठो री रुनझुनियाँ पुलकित मन में नन्द जसोदा, नाच नचाये लाला को ठुमक-ठुमक जब चले कान्ह री, हर्षाये सब के मन को गायें गीत बजायें ताली, गोपी जन तन्मय होए माया जिनकी नाच नचाये, बालनृत्य में वे खोए
Badhai Se Nahi Phulo Man Main
प्रशंसा बड़ाई से नहिं फूलों मन में ध्यान न रहता जो भी खामियाँ, रहती हैं अपने में काम प्रशंसा का जब होए, समझो कृपा प्रभु की याद रहे कि प्रशंसा तो बस, मीठी घूँट जहर की नहीं लगाओ गले बड़ाई, दूर सदा ही भागो होगी श्लाघा बड़े बनोगे, सपने से तुम जागो
Badi Maa Kaise Jiun Bin Ram
भरत का प्रेम बड़ी माँ! जीऊँ कैसे बिन राम सिया, राम, लछमन तो वन में, पिता गये सुरधाम कुटिल बुद्धि माँ कैकेयी की, बसिये न ऐसे ग्राम भोर भये हम भी वन जैहें, अवध नहीं कछु काम अद्भुत प्रेम भरत का, प्रस्थित गये मिलन को राम
Baso Man Mandir Shyama Shyam
युगल माधुरी बसो मन-मन्दिर, श्यामा-श्याम चपला नव-नीरद से अनुपम, युगल वर्ण अभिराम मुकुलित नयन प्रफुल्लित मुखड़ा, अलकावली ललाम नील वसन, पीताम्बर सोहे, रसिक राधिका श्याम लीला रत सँग ब्रज सुन्दरियाँ, श्री वृन्दावन धाम युगल-रूप सौन्दर्य लजाये, कोटि कोटि रति काम निगमागम के सारभूत को, भज मन आठो याम
Biraj Main Holi Khelat Nandlal
होली बिरज में होरी खेलत नँदलाल ढोलक झाँझ मँजीरा बाजत, सब सखियाँ मिल होरी गावत, नाचत दे दे ताल भर भरके पिचकारी मारत, भीजत है ब्रज के नर नारी, मुग्ध भई ब्रज-बाल धरती लाल, लाल भयो अम्बर, लाल राधिका, लालहि नटवर, उड़त अबीर गुलाल होरी खेलत है कुँवर कन्हाई, जमुना तट पर धूम मचाई, क्रीड़ा […]
Biraj Main Holi Ki Hai Dhum
होली बिरज में होली की है धूम लेकर हाथ कनक पिचकारी, यहाँ खड़ें हैं कृष्ण मुरारी, उतते आई गोपकुमारी, पकड़ लियो झट से बनवारी मुख पर मल दी तभी गुलाल, बिरज में होली है अब आई वृजभानु-दुलारी, और साथ में सखियाँ न्यारी, घेर लियो फिर नँद-नंदन को, पहना दी रेशम की सारी रंग दियो श्याम […]