Chintan Karti Sada Gopiyan
गौधरण चिन्तन करतीं सदा गोपियाँ, मुरलीधर का रम जातीं कर गान श्याम की लीलाओं का जभी चराने गौंओं को वे वन में जाते उनकी चर्चा करें, शाम तक जब वे आते अरी सखी! वंशी में जब वे स्वर को भरते सिद्ध पत्नियों के मन को नन्दनन्दन हरते मोर पंख का मुकट श्याम के मस्तक सोहे […]
Jab Gaye Shyam Mathura Udho
विरह व्यथा जब गये श्याम मथुरा ऊधो, तब से गोकुल को भूल गये यो कहते नन्द यशोदा के, आँखों से आँसू छलक गये वह सुघड़ वेष कटि पीताम्बर, मुख कमल नित्य ही स्मरण करे संग ग्वाल सखा, वंशी वादन, वृन्दावन में लाला विचरे इस तरह नित्य मैया बाबा, सुत स्नेह लहर में थे बहते स्तन […]
Jab Murali Bajaye Muralidhar
मुरली मोहिनी जब मुरली बजायें मुरलीधर, उसके स्वर में हो मग्न सभी पशु पक्षी सभी सुन कर वंशी, वे कान लगायें उसी ओर मृग पत्नी सहित गौएँ बछड़े, निस्तब्ध चकित होए विभोर अधरामृत मुरली पान करे, स्वर उसमें भरते श्याम जभी सहचरी श्याम की है मुरली, वे नहीं छोड़ते उसे कभी इसने मन मोह लियासब […]
Jamuna Tat Kridat Nand Nandan
होली जमुनातट क्रीड़त नँदनंदन, होरी परम सुहाई युवती-यूथ संग ले राधा, सन्मुख खेलन आई रत्नजटित पिचकारी भरि के, सखी एक ले धाई प्राणप्रिया मुख निरख स्याम को, छिरकत मृदु मुसकाई तब ही गुलाल भरी मुट्ठी में, पिय की ओर चलाई मानों उमगि प्रीति अतिशय हो, बाहिर देत दिखाई दौरि अचानक कुँवरि राधिका, गहे स्याम सुखदाई […]
Jay Jay Brajraj Kunwar
श्रीकृष्ण चरित्र जय जय ब्रजराज कुँवर, शोभित सुखकारी मोर-मुकुट मस्तक पर, पीताम्बर धारी मुरलीधर श्याम वर्ण, जमुना तट चारी संग ग्वाल गोपीजन, ब्रजजन बलिहारी मुनि-मन-हर मंद हँसन, गुंज माल धारी नृत्यत नटवर सुवेश, सोहत बनवारी हरत मदन-मद अशेष, राधा मनहारी
Jasoda Kaha Kahon Hon Baat
लाला की करतूत जसोदा! कहा कहों हौं बात तुम्हरे सुत के करतब मोसे, कहत कहे नहिं जात भाजन फोरि, ढोलि सब गोरस, ले माखन-दधि खात जो बरजौं तो आँखि दिखावै, रंचु-नाहिं सकुचात और अटपटी कहलौं बरनौ, छुवत पान सौं गात दास ‘चतुर्भुज’ गिरिधर-गुन हौं, कहति कहति सकुचात
Jasoda Tero Bhagya Kahyo Na Jay
यशोदा का भाग्य जसोदा तेरो भाग्य कह्यो ना जाय जो मूरति ब्रह्मादिक दुर्लभ, सो ही प्रगटी आय शिव, नारद, सनकादिक, महामुनि मिलवे करत उपाय जे नंदलाल धूरि धूसर वपु, रहत कंठ लपटाय रतन जटित पौढ़ाय पालने, वदन देखि मुसकाय बलिहारी मैं जाऊँ लाल पे, ‘परमानंद’ जस गाय
Jagahu Brajraj Lal Mor Mukut Ware
प्रभाती जागहु ब्रजराज लाल मोर मुकुट वारे पक्षी गण करहि शोर, अरुण वरुण भानु भोर नवल कमल फूल, रहे भौंरा गुंजारे भक्तन के सुने बैन, जागे करुणा अयन पूजि के मन कामधेनु, पृथ्वी पगु धारे करके फिर स्नान ध्यान, पूजन पूरण विधान बिप्रन को दियो दान, नंद के दुलारे करके भोजन गुपाल गैयन सँग भये […]
Ja Rahe Pran Dhan Mathura Ko
मथुरा प्रवास जा रहे प्राणधन मथुरा को राधा रानी हो रही व्यथित, सूझे कुछ भी नहीं उनको अंग अंग हो रहे शिथिल, और नीर भरा नयनों में आर्त देख राधा को प्रियतम, स्वयं दुःखी है मन में प्रिया और प्यारे दोनों की, व्याकुल स्थिति ऐसी दिव्य प्रेम रस की यह महिमा, उपमा कहीं न वैसी […]
Jin Ke Sarvas Jugal Kishor
युगल श्री राधाकृष्ण जिनके सर्वस जुगलकिशोर तिहिं समान अस को बड़भागी, गनि सब के सिरमौर नित्य विहार निरंतर जाको, करत पान निसि भोर ‘श्री हरिप्रिया’ निहारत छिन-छिन, चितय नयन की कोर