Koi Manushya Hai Nich Nahi

भरत-केवट मिलाप कोई मनुष्य है नीच नहीं, भगवान भक्त हो, बड़ा वही श्री भरत मिले केवट से तो, दोनों को ही आनन्द हुआ मालूम हुआ केवट से ही, राघव का उससे प्रेम हुआ तब भरत राम के जैसे ही, छाती से उसको लगा रहे केवट को इतना हर्ष हुआ, आँखों से उसके अश्रु बहे जाति […]

Kyon Dhanya Grihasthashram Kahlata

धन्य गृहस्थाश्रम क्यों धन्य गृहस्थाश्रम कहलाता मानव जीवन के तीन लक्ष्य, धन, काम, धर्म वह पाता सौमनस्य हो पति-पत्नी में, स्वर्ग बनाये घर को परोपकार, परहित सेवा, कर्तव्य मिलादे हरि को प्रभु का मंदिर समझे गृह को, भाव शुद्धता मन में हरि-कीर्तन प्रातः सन्ध्या हो, व सदाचार जीवन में पूजन एवं कृष्ण-कथा हो, साधु, सन्त […]

Khambha Fadke Pragate Narhari

नरसिंह रूप खम्भ फाड़के प्रगटे नरहरि, अपनों भक्त उबार्यो दैत्यराज हिरणाकशिपु को, नखते उदर विदार्यो नरसिंहरूप धर्यो श्रीहरि ने, धरणी भार उतार्यो जय-जयकार भयो पृथ्वी पे, सुर नर सबहिं निहार्यो कमला निकट न आवे, ऐसो रूप कबहुँ नहीं धार्यो चूमत अरु चाटत प्रह्लाद को, तुरत ही क्रोध निवार्यो राजतिलक दे दियो प्रभु ने, हस्त कमल […]

Khatir Kar Le Nai Gujarya

रसिया खातिर कर ले नई गुजरिया, रसिया ठाड़ो तेरे द्वार ठाड़ौ तेरे द्वार रसिया, ठाड़ौ तेरे द्वार ये रसिया तेरे नित नहिं आवै, प्रेम होय तो दर्शन पावै, अधरामृत को भोग लगावै, कर मेहमानी अब मत चूके समय न बारम्बार हिरदे की चौकी कर हेली, नेह को चंदन लगा नवेली, दीक्षा ले बनि जैयो चेली, […]

Khelat Gupal Nav Sakhin Sang

होली खेलत गुपाल नव सखिन संग, अंबर में छायो रंग रंग बाजत बेनु डफ और चंग, कोकिला कुहुक भरती उमंग केसर कुमकुम चंदन सुंगध, तन मन सुध बिसरी युवति वृंद कोइ निरखत है लोचन अघाय,लीनो लपेटि आनंदकंद झोरी भर-भर डारत गुलाल, मन में छाई भारी तरंग 

Gangajal Pap Baha Deta

गंगा माहात्म्य गंगा जल पाप बहा देता उसका जो सेवन नित्य करे, वह मन शांति को पा लेता गंगाजी का तो दर्शन भी, मन को निश्चित निर्मल करता जलरूप यही तो वासुदेव, सच्चा सुख जिनसे मिल जाता जिसके मन में यह भाव जगे, संभव नित गंगा-स्नान करे गंगा का सेवन सुमिरन हो, पातक उसके नितांत […]

Ganapati Gaao Re Vigan Nahi Aayega

श्री गणेश स्तुति गणपति गाओ रे, विघन नहीं आयगा सिद्धि सदन सुर-नर-मुनि वंदित, करता भरता रे, विघन नहीं आएगा ब्रह्मा, विष्णु, महेश तुम्हीं हो, संकट हरता रे, विघन नहीं आयगा कोटि सूर्य सम प्रभा तुम्हारी, बुद्धि प्रदाता रे, विघन नहीं आयगा शंकर-सुवन, पार्वती-नंदन, आनँद मनाओ रे, विघन नहीं आयगा जो जन सुमिरन करे तिहारो, भय […]

Gayo Man Shyam Sang Hi Bhag

श्याम रंग गयो मन श्याम संग ही भाग मुरली की धुन पड़ी कान में, मन उमग्यो अनुराग अधर-सुधा-रस भरी सुनाई, दिव्य मधुरतम राग मधुर मिलन की गोपीजन मन, उठी कामना जाग कैसा प्रबल प्रेम है इनका, जग से हुआ विराग दर्शन जिसको मिले श्याम का, उसका ही बड़भाग श्रुतियाँ ढूँढ रहीं हैं जिनको, पाये न […]

Giridhari Ke Rang Mainrachi

प्रीति माधुरी गिरिधारी के रंग में राची सुध बुध भूल गई मैं तो सखि, बात कहूँ मैं साँची मारग जात मिले मोहि सजनी, मो तन मुरि मुसकाने मन हर लियो नंद के नंदन, चितवनि माँझ बिकाने जा दिन ते मेरी दृष्टि परी सखि, तब से रह्यो न जावै ऐसा है कोई हितू हमारो, श्याम सों […]

Guru Charno Me Shish Nava Ke Raghuvar

धनुष-भंग (राजस्थानी) गुरुचरणों में सीस नवा के, रघुवर धनुष उठायोजी बाण चढ़ावत कोई न देख्यो, झटपट तोड़ गिरायोजी तीन लोक अरु भवन चतुर्दश, सबद सुणत थर्रायोजी धरणी डगमग डोलन लागी, शेष नाग चकरायोजी शूरवीर सब धुजण लाग्या, सबको गरब मिटायो जी