Bhawani Dur Karo Dukh Maa

निवेदन भवानी, दूर करो दु:ख माँ तेरो बालक करे पुकार, भवानी! दूर करो दुख माँ मैं तो हूँ अति कपटी पापी, औगुण को घर माँ राग-द्वेष में डूब रह्यो नित, शुभ लक्षण नहीं माँ पूजा-पाठ कछू नहीं जाणूँ, भक्ति न जाणू माँ साधु-संगत कबहुँ न किन्ही, तीरथ व्रत नहीं माँ बालपणो तरुणाई बीती, तन-जर्जर अब […]

Bhai Duj Bal Mohan Dou

भाई दूज भाई दूज बल मोहन दोऊ, बहन सुभद्रा के घर आये विविध भाँति श्रृंगार कियो पट भूषण बहुत सुहाये अति प्रसन्न हो भोजन परसे, भाई के मन भाये तत्पश्चात् तिलक बीड़ा दे, बहन अधिक सुख पाये श्रीफल और मिठाई से भाई की गोद भराई ‘रामदास’ प्रभु तुम चिर-जीवौ, दे अशीष हरषाई 

Bhukh Lagi Hai Mohan Pyare

प्रेम के भूखे भूख लगी है मोहन प्यारे यज्ञ करे मथुरा में ब्राह्मण, जाओ उनके द्वारे हाँ ना कुछ भी कहे न द्विज तो, चाह स्वर्ग की मन में ग्वाल-बाल सब भूखे ही लोटे, घोर निराशा उन में बोले हरि यों आस न छोड़ों अनुचित है यह राह यज्ञ-पत्नियाँ जो कि वहाँ है, पूर्ण करेंगी […]

Bheje Man Bhawan Ke Uddhav Ke Aawan Ki

गोपियों की ललक भेजे मन-भावन के उद्धव के आवन की, सुधि ब्रज-गाँवनि में पावन जबैं लगी कहैं, ‘रतनाकर’ गुवालिनि की झौरि-झौरि, दौरि-दौरि नंद-पौरि आवन तबै लगीं उझकि-उझकि पद-कंजनि के पंजनि पै, पेखि-पेखि पाती छाती छोहनि छबै लगीं हमकौं लिख्यौ है कहा, हमकौं लिख्यौ है कहा, हमकौं लिख्यौ है कहा, कहन सबै लगीं

Bhojan Kare Shyam Kanan Main

वन-विहार भोजन करे श्याम कानन में ग्वाल-बाल संग हँसे हँसाये, मुदित सभी है मन में छीके खोल सखा सब बैठे, यमुना तट पर सोहे उनके मध्य श्याम-सुन्दर छबि, सबके मन को मोहे जूठे का संकोच नहीं, सब छीन झपट के खायें सभी निहारें मोहन मुखड़ा, स्वाद से भोजन पायें छटा निराली नटनागर की, धरी वेणु […]

Mangal Diwas Chathi Ko Aayo

उत्सव मंगल दिवस छठी को आयो आनन्दित नंदराय जसोदा, मानों निर्धन धन को पायो न्हवा कान्ह को जसुमति मैया, कुल देवी के चरण परायो विविध भाँति के व्यंजन धर के, देवी को भलिभाँति मनायो सब ब्रज नारी बधावन आई, बालकृष्ण को तिलक करायो जय जयकार होत गोकुल में, ‘परमानंद’ हरषि जस गायो  

Mathura Se Shyam Nahin Loute

ज्ञान पर भक्ति की विजय मथुरा से श्याम नहीं लौटे हैं, दुःखी सब ही ब्रज में मात यशोदा बाबा नन्द को, लाला की याद आय मन में मथुरा राजमहल में व्याकुल, रहें सदा ही राधाकान्त रोक नहीं पाते अपने को रोते थे पाकर एकान्त ब्रज बालाएँ डूब रहीं थीं, विरह वेदना में दिन रात उद्धव […]

Man Main Yah Rup Niwas Kare

युगल स्वरूप मन में यह रूप निवास करे दो गात धरे वह एक तत्व, अनुपम शोभा जो चित्त हरे वृषभानु-सुता देवकी-नन्दन के अंगों का बेजोड़ लास्य मधुरातिमधुर जिनका स्वरूप, अधरों पर उनके मंद हास्य गल स्वर्णहार, बैजंति-माल, आल्हादिनि राधा मनमोहन वृन्दावन में विचरण करते, वे वरदाता अतिशय सोहन निमग्न रास क्रीड़ा में जो, रति कामदेव […]

Manmohan Hamko Ati Pyare

बालकृष्ण प्रति प्रेम मनमोहन हम को अति प्यारे बार-बार किलकारी मारे, चले कन्हैया घुटनों से ब्रज-वधुएँ आनन्दित होकर, उसे लगायें छाती से कहें-इसे हम जभी देखतीं, प्यार उमड़ता हम सबको रोक नहीं पाती उमंग को, सुध-बुध रहे नहीं हमको कितनी बार गोद में लेतीं, किन्तु न मन ही भरता है धन्य प्रेम इनका कान्हा प्रति, […]

Mahaveer Aapki Jay Ho

महावीर हनुमान महावीर आपकी जय जय हो संताप, शोक, हरने वाले, हनुमान आपकी जय जय हो सात्विक-गुण बुद्धि के सागर, अंजनी पुत्र की जय जय हो आनन्द बढ़ाये रघुवर का, केसरी-नंदन की जय जय हो माँ सीता के दुख दूर किये, इन पवन-पुत्र की जय जय हो भुज-दण्ड बड़े जिनके प्रचण्ड, रुद्रावतार की जय-जय हो […]