Aao Aao Shyam Hraday Ki Tapan Bujhao
हृदय की तपन आओ आओ श्याम, हृदय की तपन बुझाओ चरण कमल हिय धरो, शोक संताप नसाओ यों कहि रोई फूटि-फूटि के, गोपी सस्वर रहि न सके तब श्याम भये, प्रकटित तहँ सत्वर मदन मनोहर वेष तैं, मनमथ के मनकूँ करत प्रकटे प्रभु तिन मध्य में, शोक मोह हियको हरत
Aur Ansha Avtar Krishna Bhagwan Swayam Hai
परब्रह्म श्री कृष्ण और अंश अवतार कृष्ण भगवान स्वयम् हैं वे मानुस बनि गये, यशोदा नन्द-नँदन हैं सकल भुवन के ईश एक, आश्रय वनवारी मोर मुकुट सिर धारि अधर, मुरली अति प्यारी रस सरबस श्रृंगार के, साक्षात् श्रृंगार हैं जो विभु हैं, आनन्दघन, उन प्रभु की हम शरन हैं
Ek Aur Vah Kshir Nir Main Sukh Se Sowen
श्री राधाकृष्ण एक ओर वह क्षीर नीर में, सुख से सोवैं करि के शैया शेष लक्ष्मीजी, जिन पद जोवैं वे ही राधेश्याम युगल, विहरत कुंजनि में लोकपाल बनि तऊ चरावत, धेनु वननि में निज ऐश्वर्य भुलाय कें, करैं अटपटे काम है तेज पुंज उन कृष्ण को, बारम्बार प्रणाम है
Kachu Pat Pahinati Rahi
बंसी का जादू कछु पट पहिनति रही, कछुक आभूषण धारति कछु दर्पन महँ देखि माँग, सिन्दूर सम्हारति जो जो कारज करति रही, त्यागो सो तिनने चलीं बेनु सुनि काज अधुरे छोड़े उनने बरजी पति पितु बन्धु ने, रोकी बहुत पर नहीं रुकी कही बहुत पर ते नहीं, लोक लाज सम्मुख झुकी
Ka Mere Man Mah Base Vrindawan Var Dham
अभिलाषा कब मेरे मन महँ बसै, वृन्दावन वर धाम कब रसना निशि दिन रटै, सुखते श्यामा श्याम कब इन नयननिते लखूँ, वृन्दावन की धूरि जो रसिकनि की परम प्रिय, पावन जीवन मूरि कब लोटूँ अति विकल ह्वै, ब्रजरज महँ हरषाय करूँ कीच कब धूरि की, नयननि नीर बहाय कब रसिकनि के पैर परि, रोऊँ ह्वैके […]
Kalindi Kamniy Kulgat
श्री कृष्ण माधुर्य कालिन्दी कमनीय कूलगत, बालु सुकोमल ब्रज बाथिनि महँ बिछी रहे, बनिके तहँ निश्चल तापै विहरत श्याम चरण, मनि नूपुर धारे परम मृदुल मद भरे बजे, जहाँ जहाँ सुकुमारे अब टक ब्रजरज मध्य में, अंकित जो पदचिन्ह हैं तिनि चरननि वन्दन करौं, जो सबही तें भिन्न हैं केशपाश अति सघन, वरन कारे घुँघरारे […]
Ganga Ganga Kahe Nitya
गंगा महिमा गंगा गंगा कहें नित्य गंगा जल पीवैं सदा बसै तट निकट, गंग- जल हीतें जीवैं गंगारज तन लाइ, नहावैं गंगा जल महँ बसैं गंगपथ परसि अनिल, बिहरैं जिहिं थल महँ श्री गंगा के नाम तें, कोटि जनम पातक नसहिं भोगे भू पै भोग बहु, अन्त जाहि सुरपुर बसहिं
Jagat Main Radha Nam Amol
श्री राधा स्मरण जगत में राधा नाम अमोल व्यर्थ न करो बकवाद बावरे, राधा राधा बोल राधा नाम सरस अति सुन्दर, हीरा सम अनमोल जातें सुखद वस्तु नहिं जग में, भक्तनि लीयो तोल राधा कच कारे घुँघराले, बाँके लोचन लोल हिय मनहर कटि छीन उदर बर, रूप अनूप सुडोल
Janani Janki Jad Jivani Dhing Chyon Tum Aayi
श्री जानकी स्तुति जननि जानकी! जड़ जीवनि ढिँग च्यौं तुम आयीं च्यौं अति करुनामयी दुखद लीला दरसायीं तब करुना के पात्र अज्ञ, जड़ जीव नहीं माँ करुनावश ह्वै जगत हेतु, अति विपति सहीं माँ हाय! कहाँ अति मृदुल पद, कहँ कंकड़युत पथ विकट ह्वैकें अति प्रिय राम की, रहि न सकीं तिनके निकट
Durga Devi Daya Karahu
श्री दुर्गा स्तुति दुर्गा देवी दया करहु, दुख दुरित नसाओ शक्ति हीन संतान परी माँ! आय जगाओ भये भवानी भीत, आय भय भूत भगाओ खड्ग हाथ महँ देहु, युद्ध को पाठ पढ़ाओ कलि कराल कलुषित करहिँ, करि कल्यान कपर्दिनी मेटो ममता मोह कूँ, महिषासुर मद मर्दिनी