Chapal Man Sumiro Avadh Kishor

राम स्मरण चपल मन सुमिरो अवध किशोर चन्द्रवदन राजीव नयन प्रभु, करत कृपा की कोर मेघ श्याम तन, पीत वसन या छबि की ओर ने छोर शीश मुकुट कानों में कुण्डल, चितवनि भी चितचोर धनुष बाण धारे प्रभु कर में, हरत भक्त भय घोर चरण-कमल के आश्रित मैं प्रभु, दूजो कोई न मोर

Chal Rahe Bakaiyan Manmohan

बालकृष्ण चल रहे बकैयाँ मनमोहन, सन गये धूल में जो सोहन जब नहीं दिखी मैया उनको किलकारी मारे बार बार माँ निकट रसोईघर में थी, गोदी में लेकर किया प्यार आँचल से अंगों को पोछा और दूध पिलाने लगी उन्हें क्षीरोदधि में जो शयन करें, विश्वम्भर कहते शास्त्र जिन्हें

Chalo Man Shri Vrindavan Dham

राधा कृष्ण चलो मन श्री वृन्दावन धाम किसी कुंज या यमुना-तट पे, मिल जायेंगे श्याम सुन्दर छबिमय मोर-मुकुट में, सातो रंग ललाम वही सुनहरे पीत-वसन में, शोभित शोभा-धाम वनमाला के सुमन सुमन में, सुलभ शुद्ध अनुराग और बाँसुरी की सुर-धुन में, राधा का बस राग सुन्दरियों संग रास रमण में, प्रेम ज्योति अभिराम राधा दीखे […]

Chalo Man Kalindi Ke Tir

कालिंदी कूल चलो मन कालिन्दी के तीर दरशन मिले श्यामसुन्दर को, हरे हिये की पीर तरु कदम्ब के नीचे ठाड़े, कूजत कोयल कीर अधर धरे मुरली नट-नागर, ग्वाल बाल की भीर मोर-मुकुट बैजंती माला, श्रवणन् लटकत हीर मन्द मन्द मुस्कान मनोहर, कटि सुनहरो चीर रास विलास करे मनमोहन, मन्थर बहे समीर शोभित है श्री राधा-माधव, […]

Chalo Ri Mile Natwar Nand Kishor

श्री राधा कृष्ण चलोरी, मिले नटवर नंदकिशोर श्रीराधा के सँग विहरत है सघन कुंज चितचोर तैसिय छटा घुमड़ि चहुँ दिसि तें, गरजत है घनघोर बिजुरी चमक रही अंबर में, पवन चलत अति जोर पीत-वसन में श्याम, राधिका नील-वसन तन गोर सदा विहार करो ‘परमानँद’, बसो युगल मन मोर

Chalo Ri Sakhi Nand Bhawan Ko Jayen

प्रभाती चलोरी सखि, नन्द भवन को जायें मिले श्याम सुन्दर का दर्शन, जीवन की निधि पायें प्रातः काल भयो सखि माँ लाला को रही जगाये उबटन लगा लाल को मैया, अब उसको नहलाये स्नेह भाव जसुमति के मन में, नवनीत उसे खिलाये केश सँवार नयन में काजल, माथे तिलक लगाये रेशम को जामा पहनाकर, स्नेह […]

Chahta Jo Param Sukh Tu

नाम जप चाहता जो परम सुख तूँ, जाप कर हरिनाम का परम पावन परम सुन्दर, परम मंगल धाम का हैं सभी पातक पुराने, घास सूखे के समान भस्म करने को उन्हें, हरि नाम है पावक महान जाप करते जो चतुर नर, सावधानी से सदा वे न बँधते भूलकर, यम-पाश दारुण में कदा साथ मिलकर प्रेम […]

Chahe Puja Path Stavan Ho

कर्तव्य निष्ठा चाहे पूजा पाठ स्तवन हो, सब नित्य कर्म के जैसा ही मन में श्रद्धा तन्मयता हो, तब उपादेय होता वोही हम आँखे खोल तनिक देखें, कुछ भला कार्य क्या कर पाये बस माया मोह में फँसे रहे, दिन रात यूँ ही बीता जाये पूजन में जो नहीं बसे देव तो उसे छोड़ कर […]

Dhwast Kiya Haygriv Detya

दशावतार ध्वस्त किया हयग्रीव दैत्य और वेदों का भी उद्धार मत्सत्य रूप धार्यो नारायण, जय जगदीश हरे पृथ्वी को जल पर स्थिर की, हिरण्याक्ष को मारा शूकर रूप धर्यो नारायण, जय जगदीश हरे हिरण्यकाशीपु का नाश हुआ, भक्त प्रहलाद की रक्षा की नरसिंह रूप धर्यो नारायण, जय जगदीश हरे अमृत से वंचित हुए असुर देवों […]

Garharsthya Dharma Sarvottam Hi

गृहस्थ जीवन गार्हस्थ्य धर्म सर्वोत्तमही इन्द्रिय-निग्रह व सदाचार, अरु दयाभाव स्वाभाविक ही सेवा हो माता पिता गुरु की, परिचर्या प्रिय पति की भी हो ऐसे गृहस्थी पर तो प्रसन्न, निश्चय ही पितर देवता हो हो साधु, संत, सन्यासी के, जीवनयापन का भी अधार जहाँ सत्य, अहिंसा, शील तथा, सद्गुण का भी निश्चित विचार